Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- उद्वानन (عدوان): हद से आगे बढ़ना, सीमा का उल्लंघन करना।
- ज़ुल्म (ظلم): किसी चीज़ को उसके सही स्थान पर न रखना, अन्याय करना।
- नुस्लीहि (نصليه): हम उसे आग में झोंक देंगे, दाखिल करेंगे।
- यसीर (يسير): आसान, सहज।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के लिए बहुत स्पष्ट चेतावनी है जो अल्लाह द्वारा निषिद्ध किए गए कार्यों को जानबूझकर और हद से बढ़कर करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो कोई इन निषिद्ध कामों को करेगा—जैसे दूसरों का माल नाजायज़ तरीक़े से हड़पना, चोरी करना, धोखा देना, या किसी की जान लेना—और वह ऐसा जानते-बूझते हुए, हद से आगे बढ़कर और ज़ुल्म के साथ करे, न कि भूल से या अनजाने में, तो उसका अंजाम बहुत भयानक होगा। अल्लाह उसे ऐसी आग में डालेगा जिसकी गर्मी और यातना का कोई अंत नहीं। यह सज़ा उसके लिए इसलिए है क्योंकि उसने अल्लाह की स्पष्ट आज्ञाओं को तोड़ा और दूसरों के हक़ को रौंदा।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह सज़ा उसके लिए बिल्कुल आसान है—यानी अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं। वह जिसे चाहे सज़ा दे सकता है और जिसे चाहे माफ़ कर सकता है। यह बात हमारे दिलों में अल्लाह का खौफ़ पैदा करती है और हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन में कभी भी अल्लाह की नाफ़रमानी न करें, खासकर दूसरों के हक़ को नष्ट करने वाले कामों से बचें।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि अख़लाक़ और इंसाफ़ का भी नाम है। जो व्यक्ति दूसरों के साथ ज़ुल्म करता है, वह अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है—जो कोई अपने गुनाहों से तौबा कर ले, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह आयत हमें बताती है कि हमें अपने जीवन में हमेशा इंसाफ़ और नेकी पर चलना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है। आओ, हम अपने आपको इन बुराइयों से बचाएँ और अल्लाह की रज़ा के लिए नेक काम करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 28-32 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 30
सूरा अन-निसा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी…सूरा आयत 30/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


