अन-निसा · 30/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا ۝٣٠
Wa mai yaf`al zaalika `udwaananw wa zulman fasawfa nusleehi Naaraa; wa kaana zaalika `alal laahi yaseeraa
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • उद्वानन (عدوان): हद से आगे बढ़ना, सीमा का उल्लंघन करना।
  • ज़ुल्म (ظلم): किसी चीज़ को उसके सही स्थान पर न रखना, अन्याय करना।
  • नुस्लीहि (نصليه): हम उसे आग में झोंक देंगे, दाखिल करेंगे।
  • यसीर (يسير): आसान, सहज।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए बहुत स्पष्ट चेतावनी है जो अल्लाह द्वारा निषिद्ध किए गए कार्यों को जानबूझकर और हद से बढ़कर करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो कोई इन निषिद्ध कामों को करेगा—जैसे दूसरों का माल नाजायज़ तरीक़े से हड़पना, चोरी करना, धोखा देना, या किसी की जान लेना—और वह ऐसा जानते-बूझते हुए, हद से आगे बढ़कर और ज़ुल्म के साथ करे, न कि भूल से या अनजाने में, तो उसका अंजाम बहुत भयानक होगा। अल्लाह उसे ऐसी आग में डालेगा जिसकी गर्मी और यातना का कोई अंत नहीं। यह सज़ा उसके लिए इसलिए है क्योंकि उसने अल्लाह की स्पष्ट आज्ञाओं को तोड़ा और दूसरों के हक़ को रौंदा।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह सज़ा उसके लिए बिल्कुल आसान है—यानी अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं। वह जिसे चाहे सज़ा दे सकता है और जिसे चाहे माफ़ कर सकता है। यह बात हमारे दिलों में अल्लाह का खौफ़ पैदा करती है और हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन में कभी भी अल्लाह की नाफ़रमानी न करें, खासकर दूसरों के हक़ को नष्ट करने वाले कामों से बचें।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि अख़लाक़ और इंसाफ़ का भी नाम है। जो व्यक्ति दूसरों के साथ ज़ुल्म करता है, वह अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है—जो कोई अपने गुनाहों से तौबा कर ले, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह आयत हमें बताती है कि हमें अपने जीवन में हमेशा इंसाफ़ और नेकी पर चलना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है। आओ, हम अपने आपको इन बुराइयों से बचाएँ और अल्लाह की रज़ा के लिए नेक काम करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 28-32 — अन-निसा

28يُرِيدُ اللَّهُ أَن يُخَفِّفَ عَنكُمْ ۚ وَخُلِقَ الْإِنسَانُ ضَعِيفًا
करे और जो लोग नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पडे हैं वह ये चाहते हैं कि तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَكُم بَيْنَكُم بِالْبَاطِلِ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَارَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ ۚ وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हॉ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूंट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है
30وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान है
31إِن تَجْتَنِبُوا كَبَائِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًا كَرِيمًا
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे
32وَلَا تَتَمَنَّوْا مَا فَضَّلَ اللَّهُ بِهِ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ لِّلرِّجَالِ نَصِيبٌ مِّمَّا اكْتَسَبُوا ۖ وَلِلنِّسَاءِ نَصِيبٌ مِّمَّا اكْتَسَبْنَ ۚ وَاسْأَلُوا اللَّهَ مِن فَضْلِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाक़िफ़ है
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अनुवाद — अन-निसा 30

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Tuesday, August 18, 2026

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