Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَتَمَنَّوْا – तुम आरज़ू मत करो (अर्थात, दिल में लालसा मत रखो)।
- فَضَّلَ – विशेषता दी, श्रेष्ठता प्रदान की।
- نَصِيبٌ – हिस्सा, भाग।
- اكْتَسَبُوا / اكْتَسَبْنَ – उन्होंने कमाया (पुरुषों के लिए / स्त्रियों के लिए)।
- فَضْلِهِ – उसकी दया, उसका अनुग्रह, उसका दिया हुआ।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को नसीहत करता है कि वे उन चीज़ों की तमन्ना न करें जिनमें अल्लाह ने एक को दूसरे पर फ़ज़ीलत दी है—चाहे वह माल हो, ज़मीन-जायदाद हो, ज्ञान हो, शारीरिक शक्ति हो, या कोई और दुनियावी नेमत। यह तमन्ना करना कि "काश मेरे पास भी वही हो जो उसके पास है" अक्सर दिल में जलन (हसद) और नाराज़गी पैदा करता है, और यह अल्लाह की तक़दीर पर एतराज़ के बराबर है।
अल्लाह फ़रमाता है कि हर इंसान के लिए उसकी कमाई के अनुसार हिस्सा है। पुरुषों के लिए उनके कर्मों का प्रतिफल है, और स्त्रियों के लिए उनके कर्मों का प्रतिफल है। अल्लाह ने हर एक को उसकी हैसियत, उसकी क्षमता और उसके काम के अनुसार दिया है। इसलिए किसी को दूसरे से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह का बंटवारा न्याय पर आधारित है।
फिर अल्लाह सिखाता है कि तमन्ना करनी चाहिए तो अल्लाह से उसके फ़ज़ल (दया और अनुग्रह) की—यानी दुआ करो कि "ऐ अल्लाह! मुझे अपनी दया से दे, जो तू चाहे।" यह सिखाया गया है कि इंसान अपनी मेहनत और कोशिश करे, और साथ ही अल्लाह से उसकी रहमत की उम्मीद रखे। आख़िर में फ़रमाया कि अल्लाह हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखता है—वह जानता है कि किसे कितना देना उचित है, और उसका हर फ़ैसला ज्ञान और हिकमत पर आधारित है।
फ़ायदे (उपदेश):
- क़िस्मत पर संतोष: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने जो बाँटा है उस पर राज़ी रहना चाहिए। दूसरों की नेमतों को देखकर जलना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह का बंटवारा बेहतर जानता है।
- ईर्ष्या से बचाव: हसद (ईर्ष्या) दिल की बीमारी है जो इंसान की नेकियों को खा जाती है। यह आयत हमें इस बीमारी से बचाती है और दिल को साफ़ रखने की तालीम देती है।
- दुआ की तरफ़ रुख़: तमन्ना करने के बजाय अल्लाह से माँगना सिखाया गया है। दुआ इंसान को अल्लाह से जोड़ती है और उसे सब्र और उम्मीद सिखाती है।
- न्याय का एहसास: अल्लाह हर इंसान को उसके कर्मों के अनुसार देगा। यह हमें बताता है कि अल्लाह का न्याय पूर्ण है, और हर व्यक्ति को उसकी मेहनत का फल अवश्य मिलेगा।
- अल्लाह के ज्ञान पर भरोसा: अल्लाह हर चीज़ जानता है, इसलिए उसके फ़ैसले पर भरोसा करना चाहिए। जो हमें अच्छा नहीं लगता, हो सकता है उसमें हमारी भलाई हो।
📜 आयत 30-34 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 32
सूरा अन-निसा आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह…सूरा आयत 32/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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