ग़ाफिर · 28/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَقَالَ رَجُلٌ مُّؤْمِنٌ مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَكْتُمُ إِيمَانَهُ أَتَقْتُلُونَ رَجُلًا أَن يَقُولَ رَبِّيَ اللَّهُ وَقَدْ جَاءَكُم بِالْبَيِّنَاتِ مِن رَّبِّكُمْ ۖ وَإِن يَكُ كَاذِبًا فَعَلَيْهِ كَذِبُهُ ۖ وَإِن يَكُ صَادِقًا يُصِبْكُم بَعْضُ الَّذِي يَعِدُكُمْ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ كَذَّابٌ ۝٢٨
Wa qaala rajulum mu`minummin Aali Fir`awna yaktumu eemaanahooo ataqtuloona rajulan ai yaqoola Rabbi yal laahu wa qad jaaa`akum bil haiyinaati mir Rabbikum wa iny yaku kaaziban fa`alaihi kazi buhoo wa iny yaku saadiqany yasibkum ba`dul lazee ya`idukum innal laaha laa yahdee man huwa musrifun kaazaab
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन के लोगों में एक ईमानदार शख्स (हिज़कील) ने जो अपने ईमान को छिपाए रहता था (लोगों से कहा) कि क्या तुम लोग ऐसे शख्स के क़त्ल के दरपै हो जो (सिर्फ) ये कहता है कि मेरा परवरदिगार अल्लाह है) हालाँकि वह तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आया और अगर (बिल ग़रज़) ये शख्स झूठा है तो इसके झूठ का बवाल इसी पर पड़ेगा और अगर यह कहीं सच्चा हुआ तो जिस (अज़ाब की) तुम्हें ये धमकी देता है उसमें से कुछ तो तुम लोगों पर ज़रूर वाकेए होकर रहेगा बेशक ख़ुदा उस शख्स की हिदायत नहीं करता जो हद से गुज़रने वाला (और) झूठा हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلِ فِرْعَوْنَ: फिरौन के परिवार या उसके दरबार से संबंधित लोग।
  • يَكْتُمُ إِيمَانَهُ: अपने ईमान को छिपाता था।
  • بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार।
  • مُسْرِفٌ: हद से गुज़रने वाला, सत्य को छोड़कर असत्य की ओर बढ़ने वाला।
  • كَذَّابٌ: बहुत झूठ बोलने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने फिरौन के परिवार के एक ईमानदार व्यक्ति का ज़िक्र किया है, जो अपने ईमान को छिपाए हुए था। जब फिरौन और उसकी क़ौम ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को क़त्ल करने का इरादा किया, तो यह नेक इंसान उनके सामने खड़ा हुआ और उन्हें इस ज़ुल्म से रोकने की कोशिश की। उसने अंदाज़े से कहा: "क्या तुम एक ऐसे व्यक्ति को क़त्ल करोगे जिसने सिर्फ़ यह कहा है कि मेरा रब अल्लाह है? और वह तुम्हारे पास अपने रब की ओर से स्पष्ट निशानियाँ और चमत्कार लेकर आया है?"

उसने उन्हें समझाया कि अगर यह झूठा है, तो उसके झूठ का वबाल (बुरा अंजाम) खुद उसी पर पड़ेगा, और तुम्हें उसे सज़ा देने की ज़रूरत नहीं। लेकिन अगर यह सच्चा है, तो जिस अज़ाब (यातना) से यह तुम्हें डरा रहा है, उसका कुछ हिस्सा तुम पर आ पड़ेगा, और तुम सब तबाह हो जाओगे। यानी उसने उन्हें सोचने की दावत दी कि जल्दबाज़ी में किसी को क़त्ल करना अक्लमंदी नहीं।

फिर उसने उन्हें यह भी याद दिलाया कि अल्लाह उस व्यक्ति को हिदायत नहीं देता जो हद से गुज़र जाए और अल्लाह पर झूठ बोलने वाला हो। यानी जो लोग सच्चाई को छोड़कर बुराई और ज़ुल्म पर आगे बढ़ते हैं और अल्लाह के बारे में झूठे दावे करते हैं, वे कभी सही रास्ता नहीं पा सकते।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि एक इंसान चाहे कितनी भी कमज़ोर स्थिति में हो, उसे सच्चाई के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। उस ईमानदार व्यक्ति ने फिरौन के सामने खड़े होकर सच बोला, और अल्लाह ने उसके इस साहस को हमेशा के लिए क़ुरआन में महफ़ूज़ कर दिया। यह हमारे लिए सबक़ है कि हमें भी बुराई के खिलाफ़ बोलना चाहिए, भले ही हम अकेले हों। अल्लाह सच्चाई पर क़ायम रहने वालों की मदद करता है और उन्हें कभी नाकाम नहीं होने देता। इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में किसी को बिना सबूत के क़त्ल करना बहुत बड़ा ज़ुल्म है, और अल्लाह के नबियों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।



📜 आयत 26-30 — सूरा ग़ाफिर

26وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُونِي أَقْتُلْ مُوسَىٰ وَلْيَدْعُ رَبَّهُ ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُبَدِّلَ دِينَكُمْ أَوْ أَن يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ
और फिरऔन कहने लगा मुझे छोड़ दो कि मैं मूसा को तो क़त्ल कर डालूँ, और ( मैं देखूँ ) अपने परवरदिगार को तो अपनी मदद के लिए बुलालें (भाईयों) मुझे अन्देशा है कि (मुबादा) तुम्हारे दीन को उलट पुलट कर डाले या मुल्क में फसाद पैदा कर दें
27وَقَالَ مُوسَىٰ إِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُم مِّن كُلِّ مُتَكَبِّرٍ لَّا يُؤْمِنُ بِيَوْمِ الْحِسَابِ
और मूसा ने कहा कि मैं तो हर मुताकब्बिर से जो हिसाब के दिन (क़यामत पर ईमान नहीं लाता) अपने और तुम्हारे परवरदिगार की पनाह ले चुका हूं
28وَقَالَ رَجُلٌ مُّؤْمِنٌ مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَكْتُمُ إِيمَانَهُ أَتَقْتُلُونَ رَجُلًا أَن يَقُولَ رَبِّيَ اللَّهُ وَقَدْ جَاءَكُم بِالْبَيِّنَاتِ مِن رَّبِّكُمْ ۖ وَإِن يَكُ كَاذِبًا فَعَلَيْهِ كَذِبُهُ ۖ وَإِن يَكُ صَادِقًا يُصِبْكُم بَعْضُ الَّذِي يَعِدُكُمْ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ كَذَّابٌ
और फिरऔन के लोगों में एक ईमानदार शख्स (हिज़कील) ने जो अपने ईमान को छिपाए रहता था (लोगों से कहा) कि क्या तुम लोग ऐसे शख्स के क़त्ल के दरपै हो जो (सिर्फ) ये कहता है कि मेरा परवरदिगार अल्लाह है) हालाँकि वह तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आया और अगर (बिल ग़रज़) ये शख्स झूठा है तो इसके झूठ का बवाल इसी पर पड़ेगा और अगर यह कहीं सच्चा हुआ तो जिस (अज़ाब की) तुम्हें ये धमकी देता है उसमें से कुछ तो तुम लोगों पर ज़रूर वाकेए होकर रहेगा बेशक ख़ुदा उस शख्स की हिदायत नहीं करता जो हद से गुज़रने वाला (और) झूठा हो
29يَا قَوْمِ لَكُمُ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ظَاهِرِينَ فِي الْأَرْضِ فَمَن يَنصُرُنَا مِن بَأْسِ اللَّهِ إِن جَاءَنَا ۚ قَالَ فِرْعَوْنُ مَا أُرِيكُمْ إِلَّا مَا أَرَىٰ وَمَا أَهْدِيكُمْ إِلَّا سَبِيلَ الرَّشَادِ
ऐ मेरी क़ौम आज तो (बेशक) तुम्हारी बादशाहत है (और) मुल्क में तुम्हारा ही बोल बाला है लेकिन (कल) अगर ख़ुदा का अज़ाब हम पर आ जाए तो हमारी कौन मदद करेगा फिरऔन ने कहा मैं तो वही बात समझाता हूँ जो मैं ख़़ुद समझता हूँ और वही राह दिखाता हूँ जिसमें भलाई है
30وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُم مِّثْلَ يَوْمِ الْأَحْزَابِ
तो जो शख्स (दर पर्दा) ईमान ला चुका था कहने लगा, भाईयों मुझे तो तुम्हारी निस्बत भी और उम्मतों की तरह रोज़ (बद) का अन्देशा है
ग़ाफिरकुरान सूची
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28आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 28

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Thursday, October 1, 2026

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