अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُذْتُ (मैंने पनाह ली) — अर्थात मैंने सुरक्षा और शरण मांगी।
- مُتَكَبِّرٍ (अहंकारी) — वह व्यक्ति जो सत्य को स्वीकार करने से घमंड के कारण इनकार करे।
- يَوْمِ الْحِسَابِ (हिसाब के दिन) — क़ियामत का दिन, जब अल्लाह सभी प्राणियों से उनके कर्मों का हिसाब लेगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन की धमकी और उसके अत्याचारी रवैये को देखा, तो उन्होंने बड़े साहस और भरोसे के साथ कहा: "मैंने अपने रब और तुम्हारे रब की पनाह ले ली है।" यह कहकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि फ़िरऔन की शक्ति और उसके इरादों से उन्हें कोई भय नहीं, क्योंकि उनकी सुरक्षा उस परम शक्तिशाली अल्लाह के हाथ में है, जो सभी का रब है — चाहे वह फ़िरऔन हो या उसकी प्रजा।
हज़रत मूसा ने यह भी बताया कि वे हर उस अहंकारी से अल्लाह की पनाह मांगते हैं जो सत्य के आगे सिर नहीं झुकाता, जो अल्लाह की एकता और उसकी आज्ञा को स्वीकार नहीं करता, और जो उस दिन पर ईमान नहीं रखता जब सभी को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। यह अहंकार ही है जो इंसान को सत्य से दूर करता है और उसे अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल बना देता है।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी शिक्षा है — जब भी हम किसी ज़ालिम या अत्याचारी के सामने हों, तो हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से सुरक्षा मांगनी चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करें। यह भी याद रखें कि अहंकार और घमंड विनाश का कारण है, और जो लोग हिसाब के दिन को नहीं मानते, वे अपनी ही हानि करते हैं।
हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में विनम्रता अपनाएँ, अल्लाह के आगे सिर झुकाएँ, और उस दिन की तैयारी करें जब हर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब होगा। यही सच्ची सफलता का मार्ग है — अल्लाह की पनाह में रहना और उसके दीन पर स्थिर रहना।
📜 आयत 25-29 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 27
सूरा ग़ाफिर आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मूसा ने कहा कि मैं तो हर मुताकब्बिर से…सूरा आयत 27/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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