Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ظَاهِرِينَ: ग़ालिब (प्रभुत्वशाली) होकर, ऊपर रहते हुए
- بَأْسِ: यातना, अज़ाब, कठोर पकड़
- سَبِيلَ الرَّشَاد: सीधा और भलाई का रास्ता
तफ़सीर:
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! आज तुम्हें मिस्र की ज़मीन पर पूरा राज्य और अधिकार हासिल है, तुम ग़ालिब हो और अपनी रिआया (प्रजा) पर पूरा नियंत्रण रखते हो। लेकिन याद रखो, यह सब कुछ फ़ानी है और एक दिन ख़त्म होने वाला है। अगर अल्लाह का अज़ाब आ जाए, तो कौन है जो हमें उससे बचा सकता है? क्या तुम्हारी सल्तनत, तुम्हारी फ़ौजें या तुम्हारी ताक़त अल्लाह की पकड़ से बचा सकती है? यह सवाल उस ईमानदार आदमी ने किया जो फ़िरऔन के दरबार में ईमान छिपाकर रहता था, और वह अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से डरा रहा था।
इस पर फ़िरऔन ने अपनी हठधर्मिता और अहंकार के साथ जवाब दिया: "मैं तुम्हें वही राय देता हूं जो मैं खुद अपने लिए बेहतर समझता हूं, और मैं तुम्हें सिवाय भलाई और सीधे रास्ते के और किसी चीज़ की तरफ़ नहीं बुलाता।" यानी फ़िरऔन अपनी ग़लत राय को ही सच्चाई समझ रहा था और अपनी ज़िद पर अड़ा हुआ था। उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) को क़त्ल करने की साज़िश की, यह समझते हुए कि यही रास्ता सही है, जबकि वह अपने और अपनी क़ौम के लिए तबाही का रास्ता चुन रहा था।
दीनी पैग़ाम:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी अक्ल और राय को ही आख़िरी फ़ैसला न समझे, बल्कि अल्लाह की वही और नबी की शिक्षा को अपना रहनुमा बनाए। फ़िरऔन जैसे लोग अपनी सल्तनत और ताक़त पर इतना घमंड करते हैं कि उन्हें यक़ीन हो जाता है कि कोई उन्हें हरा नहीं सकता, लेकिन अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह के हुक्म को सबसे ऊपर रखें, क्योंकि असली इज़्ज़त और कामयाबी उसी की तरफ़ से आती है। जो लोग अपनी राय को ही सब कुछ समझ लेते हैं और हक़ की दावत को ठुकरा देते हैं, वे आख़िरकार उसी अज़ाब में मुब्तला होते हैं जिससे वे बचना चाहते थे। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें हक़ को हक़ समझकर उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे और बातिल को बातिल समझकर उससे बचने की हिम्मत अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 27-31 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 29
सूरा ग़ाफिर आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरी क़ौम आज तो (बेशक) तुम्हारी बादशाहत है (और)…सूरा आयत 29/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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