अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُبَشِّرُ: खुशखबरी देता है।
- الْمَوَدَّةَ: प्रेम और स्नेह।
- الْقُرْبَى: रिश्तेदारी, निकट के लोग।
- يَقْتَرِفْ: कमाता है, अर्जित करता है।
- حَسَنَةً: अच्छा काम, नेकी।
- شَكُورٌ: बहुत अधिक शुक्र अदा करने वाला, अच्छाई की क़द्र करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह वह महान खुशखबरी है जिसकी घोषणा अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जिन्होंने ईमान लाया और अच्छे कर्म किए। यानी जिन लोगों ने अल्लाह पर विश्वास किया और अपने जीवन को उसकी आज्ञाओं के अनुसार ढाला, उनके लिए जन्नत की नेमतें, अल्लाह की रज़ा और उसकी करीबी तैयार है। यह कोई साधारण खुशखबरी नहीं, बल्कि ऐसी बशारत है जो हर मोमिन के दिल को सुकून और उम्मीद से भर देती है।
अल्लाह अपने नबी ﷺ से कहता है कि आप कह दें: "मैं तुमसे इस (इस्लाम और क़ुरआन) के बदले कोई मेहनताना या बदला नहीं माँगता, सिवाय इसके कि तुम मेरे रिश्तेदारों से प्रेम करो।" यानी नबी ﷺ की दावत का उद्देश्य कोई दुनियावी फ़ायदा नहीं था, न वे धन चाहते थे और न ही कोई पद। उनकी एक ही चाहत थी कि लोग उनके ख़ानदान और रिश्तेदारों (अहले-बैत) से मुहब्बत रखें, क्योंकि यह मुहब्बत दरअसल नबी ﷺ की मुहब्बत का हिस्सा है और यही वह रिश्ता है जो उन्हें उम्मत से जोड़ता है। यह कोई बोझ नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता है जो हर मुसलमान के दिल में पहले से मौजूद होना चाहिए।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "जो कोई एक नेकी कमाता है, हम उसके लिए उसमें और अच्छाई बढ़ा देते हैं।" यानी अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता। एक छोटी सी नेकी भी अल्लाह के यहाँ ज़ाइया नहीं होती, बल्कि वह उसे कई गुना बढ़ा देता है — एक नेकी का बदला दस से लेकर सात सौ गुना तक, और अल्लाह जिसे चाहे उसे और भी ज़्यादा दे। यह अल्लाह का वादा है, और वह अपने वादे में कभी ख़िलाफ़ नहीं करता।
अंत में अल्लाह अपनी दो खूबियाँ बयान करता है: "बेशक अल्लाह ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला) और शकूर (बहुत क़द्र करने वाला) है।" यानी वह अपने बंदों की ग़लतियों और पापों को माफ कर देता है जब वे तौबा करते हैं, और साथ ही वह उनकी छोटी से छोटी नेकी की भी क़द्र करता है और उसका पूरा-पूरा बदला देता है। यह कितनी बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब इतना दयालु है कि गुनाहों को माफ करता है और नेकियों को बढ़ाकर लौटाता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में नबी ﷺ से मुहब्बत और उनके अहले-बैत से मुहब्बत ईमान का हिस्सा है। यह मुहब्बत कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल का रिश्ता है जो हमें नबी ﷺ की सुन्नत पर चलने की तरफ़ ले जाता है। साथ ही, यह आयत हमें अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखने की तालीम देती है — चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह की माफ़ी का दरवाज़ा खुला है, और चाहे हमारी नेकी कितनी ही छोटी क्यों न हो, अल्लाह उसे कभी ज़ाइया नहीं करेगा। यही वह उम्मीद है जो एक मुसलमान को अच्छे कर्मों पर स्थिर रखती है और उसे अल्लाह की तरफ़ खींचती है।
📜 आयत 21-25 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 23
सूरा अश-शूरा आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही (ईनाम) है जिसकी ख़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी…सूरा आयत 23/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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