अश-शूरा · 23/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
ذَٰلِكَ الَّذِي يُبَشِّرُ اللَّهُ عِبَادَهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۗ قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَىٰ ۗ وَمَن يَقْتَرِفْ حَسَنَةً نَّزِدْ لَهُ فِيهَا حُسْنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ شَكُورٌ ۝٢٣
Zaalikal lazee yubash shirul laahu `ibaadahul lazeena aamanoo wa `amilus saalihaat; qul laaa as`alukum `alaihi ajran illal mawaddata fil qurbaa; wa mai yaqtarif hasanatan nazid lahoo feehaa husnaa; innal laaha Ghafoorun Shakoor
📖 हिंदी अर्थ
यही (ईनाम) है जिसकी ख़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी देता है जो ईमान लाए और नेक काम करते रहे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं इस (तबलीग़े रिसालत) का अपने क़रातबदारों (अहले बैत) की मोहब्बत के सिवा तुमसे कोई सिला नहीं मांगता और जो शख़्श नेकी हासिल करेगा हम उसके लिए उसकी ख़ूबी में इज़ाफा कर देंगे बेशक वह बड़ा बख्शने वाला क़दरदान है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُبَشِّرُ: खुशखबरी देता है।
  • الْمَوَدَّةَ: प्रेम और स्नेह।
  • الْقُرْبَى: रिश्तेदारी, निकट के लोग।
  • يَقْتَرِفْ: कमाता है, अर्जित करता है।
  • حَسَنَةً: अच्छा काम, नेकी।
  • شَكُورٌ: बहुत अधिक शुक्र अदा करने वाला, अच्छाई की क़द्र करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह महान खुशखबरी है जिसकी घोषणा अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जिन्होंने ईमान लाया और अच्छे कर्म किए। यानी जिन लोगों ने अल्लाह पर विश्वास किया और अपने जीवन को उसकी आज्ञाओं के अनुसार ढाला, उनके लिए जन्नत की नेमतें, अल्लाह की रज़ा और उसकी करीबी तैयार है। यह कोई साधारण खुशखबरी नहीं, बल्कि ऐसी बशारत है जो हर मोमिन के दिल को सुकून और उम्मीद से भर देती है।

अल्लाह अपने नबी ﷺ से कहता है कि आप कह दें: "मैं तुमसे इस (इस्लाम और क़ुरआन) के बदले कोई मेहनताना या बदला नहीं माँगता, सिवाय इसके कि तुम मेरे रिश्तेदारों से प्रेम करो।" यानी नबी ﷺ की दावत का उद्देश्य कोई दुनियावी फ़ायदा नहीं था, न वे धन चाहते थे और न ही कोई पद। उनकी एक ही चाहत थी कि लोग उनके ख़ानदान और रिश्तेदारों (अहले-बैत) से मुहब्बत रखें, क्योंकि यह मुहब्बत दरअसल नबी ﷺ की मुहब्बत का हिस्सा है और यही वह रिश्ता है जो उन्हें उम्मत से जोड़ता है। यह कोई बोझ नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता है जो हर मुसलमान के दिल में पहले से मौजूद होना चाहिए।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "जो कोई एक नेकी कमाता है, हम उसके लिए उसमें और अच्छाई बढ़ा देते हैं।" यानी अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता। एक छोटी सी नेकी भी अल्लाह के यहाँ ज़ाइया नहीं होती, बल्कि वह उसे कई गुना बढ़ा देता है — एक नेकी का बदला दस से लेकर सात सौ गुना तक, और अल्लाह जिसे चाहे उसे और भी ज़्यादा दे। यह अल्लाह का वादा है, और वह अपने वादे में कभी ख़िलाफ़ नहीं करता।

अंत में अल्लाह अपनी दो खूबियाँ बयान करता है: "बेशक अल्लाह ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला) और शकूर (बहुत क़द्र करने वाला) है।" यानी वह अपने बंदों की ग़लतियों और पापों को माफ कर देता है जब वे तौबा करते हैं, और साथ ही वह उनकी छोटी से छोटी नेकी की भी क़द्र करता है और उसका पूरा-पूरा बदला देता है। यह कितनी बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब इतना दयालु है कि गुनाहों को माफ करता है और नेकियों को बढ़ाकर लौटाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में नबी ﷺ से मुहब्बत और उनके अहले-बैत से मुहब्बत ईमान का हिस्सा है। यह मुहब्बत कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल का रिश्ता है जो हमें नबी ﷺ की सुन्नत पर चलने की तरफ़ ले जाता है। साथ ही, यह आयत हमें अल्लाह की रहमत से उम्मीद रखने की तालीम देती है — चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह की माफ़ी का दरवाज़ा खुला है, और चाहे हमारी नेकी कितनी ही छोटी क्यों न हो, अल्लाह उसे कभी ज़ाइया नहीं करेगा। यही वह उम्मीद है जो एक मुसलमान को अच्छे कर्मों पर स्थिर रखती है और उसे अल्लाह की तरफ़ खींचती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अश-शूरा

21أَمْ لَهُمْ شُرَكَاءُ شَرَعُوا لَهُم مِّنَ الدِّينِ مَا لَمْ يَأْذَن بِهِ اللَّهُ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةُ الْفَصْلِ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۗ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
क्या उन लोगों के (बनाए हुए) ऐसे शरीक हैं जिन्होंने उनके लिए ऐसा दीन मुक़र्रर किया है जिसकी ख़ुदा ने इजाज़त नहीं दी और अगर फ़ैसले (के दिन) का वायदा न होता तो उनमें यक़ीनी अब तक फैसला हो चुका होता और ज़ालिमों के वास्ते ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है
22تَرَى الظَّالِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا كَسَبُوا وَهُوَ وَاقِعٌ بِهِمْ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فِي رَوْضَاتِ الْجَنَّاتِ ۖ لَهُم مَّا يَشَاءُونَ عِندَ رَبِّهِمْ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَضْلُ الْكَبِيرُ
(क़यामत के दिन) देखोगे कि ज़ालिम लोग अपने आमाल (के वबाल) से डर रहे होंगे और वह उन पर पड़ कर रहेगा और जिन्होने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे काम किए वह बेहिश्त के बाग़ों में होंगे वह जो कुछ चाहेंगे उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में (मौजूद) है यही तो (ख़ुदा का) बड़ा फज़ल है
23ذَٰلِكَ الَّذِي يُبَشِّرُ اللَّهُ عِبَادَهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۗ قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَىٰ ۗ وَمَن يَقْتَرِفْ حَسَنَةً نَّزِدْ لَهُ فِيهَا حُسْنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ شَكُورٌ
यही (ईनाम) है जिसकी ख़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी देता है जो ईमान लाए और नेक काम करते रहे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं इस (तबलीग़े रिसालत) का अपने क़रातबदारों (अहले बैत) की मोहब्बत के सिवा तुमसे कोई सिला नहीं मांगता और जो शख़्श नेकी हासिल करेगा हम उसके लिए उसकी ख़ूबी में इज़ाफा कर देंगे बेशक वह बड़ा बख्शने वाला क़दरदान है
24أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۖ فَإِن يَشَإِ اللَّهُ يَخْتِمْ عَلَىٰ قَلْبِكَ ۗ وَيَمْحُ اللَّهُ الْبَاطِلَ وَيُحِقُّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
क्या ये लोग (तुम्हारी निस्बत कहते हैं कि इस (रसूल) ने ख़ुदा पर झूठा बोहतान बाँधा है तो अगर (ऐसा) होता तो) ख़ुदा चाहता तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा देता (कि तुम बात ही न कर सकते) और ख़ुदा तो झूठ को नेस्तनाबूद और अपनी बातों से हक़ को साबित करता है वह यक़ीनी दिलों के राज़ से ख़ूब वाक़िफ है
25وَهُوَ الَّذِي يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَعْفُو عَنِ السَّيِّئَاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ
और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और गुनाहों को माफ़ करता है और तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह जानता है
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — अश-शूरा 23

सूरा अश-शूरा आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही (ईनाम) है जिसकी ख़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी…

सूरा आयत 23/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए