अश-शूरा · 24/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۖ فَإِن يَشَإِ اللَّهُ يَخْتِمْ عَلَىٰ قَلْبِكَ ۗ وَيَمْحُ اللَّهُ الْبَاطِلَ وَيُحِقُّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ ۝٢٤
Am yaqooloonaf tara `alal laahi kaziban fa-iny yasha il laahu yakhtim `alaa qalbik; wa yamhul laahul baatila wa yuhiqqul haqqa bi Kalimaatih; innahoo `Aleemum bizaatis sudoor
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग (तुम्हारी निस्बत कहते हैं कि इस (रसूल) ने ख़ुदा पर झूठा बोहतान बाँधा है तो अगर (ऐसा) होता तो) ख़ुदा चाहता तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा देता (कि तुम बात ही न कर सकते) और ख़ुदा तो झूठ को नेस्तनाबूद और अपनी बातों से हक़ को साबित करता है वह यक़ीनी दिलों के राज़ से ख़ूब वाक़िफ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • افْتَرَىٰ: झूठ गढ़ना, मन से बना लेना और किसी और की ओर जोड़ देना।
  • يَخْتِمْ عَلَىٰ قَلْبِكَ: तुम्हारे दिल पर मुहर लगा दे, यानी तुम्हें कुरान भुला दे और समझने की शक्ति छीन ले।
  • يَمْحُ: मिटा दे, नष्ट कर दे।
  • يُحِقُّ: स्थापित करे, सच्चा और कायम कर दे।
  • بِكَلِمَاتِهِ: अपने फैसलों और वादों के जरिए।
  • ذَاتِ الصُّدُورِ: जो कुछ दिलों में छिपा है।

तफसीर (व्याख्या):

ये मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) की बात है, जो कहते थे कि मुहम्मद (ﷺ) ने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है और ये कुरान खुद बना लिया है। अल्लाह तआला इसका जवाब देते हुए फरमाता है: क्या ये लोग कहते हैं कि पैगंबर ने अल्लाह पर झूठ बांधा? अगर ऐसा होता, तो अल्लाह चाहता तो आपके दिल पर मुहर लगा देता, यानी आपको कुरान भुला देता और आपकी जुबान बंद कर देता। लेकिन अल्लाह ने ऐसा नहीं किया, बल्कि आपको कुरान याद कराया और उसे हमेशा के लिए महफूज़ रखा — यही इस बात की सबसे बड़ी दलील है कि आप सच्चे हैं और ये कुरान अल्लाह की तरफ से है।

फिर अल्लाह फरमाता है: अल्लाह बातिल (झूठ और कुफ्र) को मिटा देगा और अपनी कलामों (वही और अपने फैसलों) के जरिए हक (सच्चाई और इस्लाम) को स्थापित करेगा। ये अल्लाह का वादा है, जो कभी टलता नहीं। और ये वादा पूरा हुआ — इस्लाम का झंडा बुलंद हुआ और कुफ्र का नामोनिशान मिट गया।

आखिर में अल्लाह फरमाता है: वह उन सब बातों को जानता है जो दिलों में छिपी हैं। किसी का नेक इरादा हो या बुरा, सब उसके इल्म में है। वह हर इंसान को उसकी नीयत और अमल के हिसाब से बदला देगा।


दावत और नसीहत:

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है — अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहता है, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिश कर लें। बातिल चाहे कितना भी ताकतवर लगे, अल्लाह उसे मिटा देता है। इसलिए हमें हक पर डटे रहना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का वादा है कि हक ही जीतेगा। साथ ही, हमें अपने दिलों को साफ रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह दिलों का हाल जानता है — नेक नीयत और सच्चाई ही कामयाबी की चाबी है।



📜 आयत 22-26 — अश-शूरा

22تَرَى الظَّالِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا كَسَبُوا وَهُوَ وَاقِعٌ بِهِمْ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فِي رَوْضَاتِ الْجَنَّاتِ ۖ لَهُم مَّا يَشَاءُونَ عِندَ رَبِّهِمْ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَضْلُ الْكَبِيرُ
(क़यामत के दिन) देखोगे कि ज़ालिम लोग अपने आमाल (के वबाल) से डर रहे होंगे और वह उन पर पड़ कर रहेगा और जिन्होने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे काम किए वह बेहिश्त के बाग़ों में होंगे वह जो कुछ चाहेंगे उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में (मौजूद) है यही तो (ख़ुदा का) बड़ा फज़ल है
23ذَٰلِكَ الَّذِي يُبَشِّرُ اللَّهُ عِبَادَهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۗ قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَىٰ ۗ وَمَن يَقْتَرِفْ حَسَنَةً نَّزِدْ لَهُ فِيهَا حُسْنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ شَكُورٌ
यही (ईनाम) है जिसकी ख़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी देता है जो ईमान लाए और नेक काम करते रहे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं इस (तबलीग़े रिसालत) का अपने क़रातबदारों (अहले बैत) की मोहब्बत के सिवा तुमसे कोई सिला नहीं मांगता और जो शख़्श नेकी हासिल करेगा हम उसके लिए उसकी ख़ूबी में इज़ाफा कर देंगे बेशक वह बड़ा बख्शने वाला क़दरदान है
24أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۖ فَإِن يَشَإِ اللَّهُ يَخْتِمْ عَلَىٰ قَلْبِكَ ۗ وَيَمْحُ اللَّهُ الْبَاطِلَ وَيُحِقُّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
क्या ये लोग (तुम्हारी निस्बत कहते हैं कि इस (रसूल) ने ख़ुदा पर झूठा बोहतान बाँधा है तो अगर (ऐसा) होता तो) ख़ुदा चाहता तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा देता (कि तुम बात ही न कर सकते) और ख़ुदा तो झूठ को नेस्तनाबूद और अपनी बातों से हक़ को साबित करता है वह यक़ीनी दिलों के राज़ से ख़ूब वाक़िफ है
25وَهُوَ الَّذِي يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَعْفُو عَنِ السَّيِّئَاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ
और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और गुनाहों को माफ़ करता है और तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह जानता है
26وَيَسْتَجِيبُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ وَالْكَافِرُونَ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे उनकी (दुआ) क़ुबूल करता है फज़ल व क़रम से उनको बढ़ कर देता है और काफिरों के लिए सख्त अज़ाब है
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अनुवाद — अश-शूरा 24

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Tuesday, August 18, 2026

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