अल-जासिया · 28/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
وَتَرَىٰ كُلَّ أُمَّةٍ جَاثِيَةً ۚ كُلُّ أُمَّةٍ تُدْعَىٰ إِلَىٰ كِتَابِهَا الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٢٨
Wa taraa kulla ummatin jaasiyah; kullu ummatin tud`aaa ilaa kitaabihaa al Yawma tujzawna maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम हर उम्मत को देखोगे कि (फैसले की मुन्तज़िर अदब से) घूटनों के बल बैठी होगी और हर उम्मत अपने नामाए आमाल की तरफ बुलाइ जाएगी जो कुछ तुम लोग करते थे आज तुमको उसका बदला दिया जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जाथिया (جَاثِيَةً): घुटनों के बल बैठी हुई, जैसे कोई मुकद्दमे के लिए हाकिम के सामने घुटनों के बल बैठता है।
  • उम्मत (أُمَّةٍ): समुदाय, गिरोह, या वह समूह जो किसी पैग़म्बर पर ईमान लाया या उसे झुठलाया।
  • किताबिहा (كِتَابِهَا): उसका (आमाल का) लेखा-जोखा, जो फ़रिश्तों ने लिखा है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस दिन देखेंगे जब क़यामत आएगी, कि हर उम्मत (समुदाय) घुटनों के बल बैठी होगी — डरी हुई, सहमी हुई, अपने अंजाम का इंतज़ार करती हुई। यह वही हालत होगी जैसे कोई मुजरिम हाकिम के सामने पेश किया जाए। हर गिरोह को उसके आमाल की किताब की तरफ़ बुलाया जाएगा, और उससे कहा जाएगा: "आज तुम्हें वही बदला दिया जाएगा जो तुम दुनिया में करते थे — नेकी का बदला नेकी से, और बुराई का बदला बुराई से।"

यह वह दिन होगा जब कोई किसी की मदद नहीं कर सकेगा, न कोई सिफ़ारिश काम आएगी, और न कोई बहाना क़ुबूल होगा। हर इंसान अपने किए पर पछताएगा, लेकिन पछतावे का वक़्त बीत चुका होगा। यह अल्लाह का वादा है जो सच्चा है — और अल्लाह अपने वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें जगाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर लम्हा लिखा जा रहा है। फ़रिश्ते हमारे हर अमल को दर्ज कर रहे हैं — चाहे वह छोटा हो या बड़ा। जिस दिन वह किताब खोली जाएगी, हम खुद अपने आमाल देखेंगे। इसलिए आज ही वह किताब ऐसी बनाएं जो हमारे लिए रोशनी बने, अंधेरा नहीं। नेकी का एक छोटा सा काम भी उस दिन बहुत भारी होगा, और बुराई का एक पल भी पछतावे का सबब बनेगा। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें उन लोगों में शामिल करे जिनका नामा-ए-आमाल दाहिने हाथ में दिया जाएगा, और हमें उस दिन की रुसवाई से बचाए। याद रखें — आज का हर अमल, कल की जज़ा (बदला) का ज़रिया है।



📜 आयत 26-30 — अल-जासिया

26قُلِ اللَّهُ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يَجْمَعُكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा ही तुमको ज़िन्दा (पैदा) करता है और वही तुमको मारता है फिर वही तुमको क़यामत के दिन जिस (के होने) में किसी तरह का शक़ नहीं जमा करेगा मगर अक्सर लोग नहीं जानते
27وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَخْسَرُ الْمُبْطِلُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत ख़ास ख़ुदा की है और जिस रोज़ क़यामत बरपा होगी उस रोज़ अहले बातिल बड़े घाटे में रहेंगे
28وَتَرَىٰ كُلَّ أُمَّةٍ جَاثِيَةً ۚ كُلُّ أُمَّةٍ تُدْعَىٰ إِلَىٰ كِتَابِهَا الْيَوْمَ تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम हर उम्मत को देखोगे कि (फैसले की मुन्तज़िर अदब से) घूटनों के बल बैठी होगी और हर उम्मत अपने नामाए आमाल की तरफ बुलाइ जाएगी जो कुछ तुम लोग करते थे आज तुमको उसका बदला दिया जाएगा
29هَٰذَا كِتَابُنَا يَنطِقُ عَلَيْكُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّا كُنَّا نَسْتَنسِخُ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
ये हमारी किताब (जिसमें आमाल लिखे हैं) तुम्हारे मुक़ाबले में ठीक ठीक बोल रही है जो कुछ भी तुम करते थे हम लिखवाते जाते थे
30فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُدْخِلُهُمْ رَبُّهُمْ فِي رَحْمَتِهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْمُبِينُ
ग़रज़ जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किये तो उनको उनका परवरदिगार अपनी रहमत (से बेहिश्त) में दाख़िल करेगा यही तो सरीही कामयाबी है
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
28आयत

अनुवाद — अल-जासिया 28

सूरा अल-जासिया आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम हर उम्मत को देखोगे कि (फैसले…

सूरा आयत 28/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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