अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- हरज (حرج): तंगी, संकीर्णता, गुनाह, पाबंदी या कोई बोझ।
- आ'मा (الأعمى): अंधा व्यक्ति।
- आ'रज (الأعرج): लंगड़ा व्यक्ति।
- मरीज़ (المريض): बीमार व्यक्ति।
- युती'अ (يطيع): आज्ञा का पालन करना।
- यतवल्ला (يتول): मुँह मोड़ना, आज्ञा से विमुख हो जाना।
- अज़ाबन अलीमन (عذابًا أليما): दर्दनाक और बहुत पीड़ादायक यातना।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों पर अपनी असीम रहमत और आसानी का पैगाम दे रहा है। वह फ़रमाता है कि अंधे व्यक्ति पर कोई गुनाह नहीं, लंगड़े व्यक्ति पर कोई गुनाह नहीं, और बीमार व्यक्ति पर भी कोई गुनाह नहीं—अगर वे जिहाद (धर्मयुद्ध) या उन कठिन कार्यों में शामिल न हो सकें जिनके लिए तंदुरुस्ती और ताकत की ज़रूरत होती है। यह अल्लाह की ओर से एक विशेष रियायत और सहूलत है, क्योंकि इस्लाम कभी भी किसी पर उसकी हैसियत से बढ़कर बोझ नहीं डालता। अल्लाह हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार ही जिम्मेदारी देता है।
यह आयत उस वक्त नाज़िल हुई जब कुछ कमज़ोर और बीमार साथियों ने पूछा कि अगर हम जिहाद में नहीं जा सकते तो क्या हम पर कोई गुनाह है? तो अल्लाह ने यह आयत उतारी कि नहीं, तुम पर कोई गुनाह नहीं, बशर्ते तुम्हारा दिल नेक और इरादा सच्चा हो।
इसके बाद अल्लाह तआला दो रास्ते साफ़ बयान करता है: पहला, जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा का पालन करेगा, उसे अल्लाह ऐसी जन्नतों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं—वहाँ की खुशियाँ, सुकून और नेमतें किसी भी ज़ुबान में बयान नहीं की जा सकतीं। दूसरा, जो इस आज्ञा से मुँह मोड़ेगा और अल्लाह के दीन से विमुख हो जाएगा, उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में हर व्यक्ति के लिए उसकी स्थिति के अनुसार रास्ता खुला है। अगर कोई शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है, तो उसके लिए दुआ, नेकी, अच्छी सलाह और दूसरे अच्छे कामों के ज़रिए अल्लाह की राह में योगदान करने के दरवाजे हमेशा खुले हैं। अल्लाह ने किसी को भी अपनी रहमत से निराश नहीं किया। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करते हैं, उनके लिए जन्नत की नेमतें तैयार हैं, और जो विमुख होते हैं, वे खुद अपने लिए अज़ाब का सामान करते हैं। अल्लाह हमें अपनी आज्ञा का पालन करने और उसकी रहमत पाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 15-19 — अल-फतह
अनुवाद — अल-फतह 17
सूरा अल-फतह आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जेहाद से पीछे रह जाने का) न तो अन्धे ही…सूरा आयत 17/29 — अल-फतह الفتح (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फतह सुनें, अल-फतह अनुवाद, अल-फतह mp3, अल-फतह pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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