अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَفَّ – रोक दिया, हटा दिया
- أَيْدِيَهُمْ – उनके हाथ
- بِبَطْنِ مَكَّةَ – मक्का के भीतरी भाग में (हुदैबिया के क्षेत्र में)
- أَظْفَرَكُمْ – तुम्हें विजयी बनाया, तुम्हें उन पर प्रभुत्व दिया
- بَصِيرًا – सब कुछ देखने वाला, पूर्ण दृष्टा
तफ़सीर:
यह आयत उस महान ईश्वरीय कृपा का वर्णन करती है जो अल्लाह ने हुदैबिया के अवसर पर मुसलमानों पर की। अल्लाह ही वह है जिसने काफिरों के हाथों को तुमसे रोके रखा और तुम्हारे हाथों को उनसे रोके रखा, उस समय जब तुम मक्का के भीतरी भाग (हुदैबिया) में थे। यह घटना उस समय की है जब लगभग अस्सी हथियारबंद काफिर मक्का से निकलकर रसूलुल्लाह ﷺ के कैम्प की ओर आए थे, उनका इरादा मुसलमानों को नुकसान पहुँचाने का था। लेकिन अल्लाह ने उन्हें मुसलमानों के क़ाबू में कर दिया — मुसलमानों ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया और वे पूरी तरह उनके अधीन हो गए। इसके बाद भी अल्लाह की रहमत और हिकमत से मुसलमानों ने उन्हें मारा नहीं, बल्कि उन्हें आज़ाद कर दिया। यह अल्लाह की तरफ से एक बड़ी नेमत और रहमत थी, क्योंकि अल्लाह चाहता तो उन्हें तुम्हारे हाथों से मरवा सकता था, लेकिन उसने यह इसलिए किया ताकि मक्का में फ़ितना और खून-खराबा न हो और आगे चलकर फ़तह-ए-मक्का (मक्का की विजय) जैसी बड़ी कामयाबी का रास्ता हमवार हो।
अल्लाह तआला हर उस अमल से पूरी तरह वाक़िफ़ है जो तुम करते हो — चाहे वह खुला हो या छिपा, छोटा हो या बड़ा। उसकी नज़र से कोई चीज़ पोशीदा नहीं है, और वही तुम्हारे अमलों का पूरा-पूरा हिसाब लेगा और उसका बदला देगा।
दावती पहलू:
इस आयत में अल्लाह की क़ुदरत और उसकी हिफ़ाज़त का जो नमूना पेश किया गया है, वह हर मुसलमान के लिए यक़ीन और भरोसे की बुनियाद है। जब अल्लाह किसी बंदे का हाथ पकड़ लेता है, तो दुनिया की तमाम ताक़तें उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यह आयत हमें सिखाती है कि मुश्किल वक़्त में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए — वही है जो दुश्मनों के हाथों को रोकता है और दिलों को क़ाबू में रखता है। साथ ही, यह भी सबक़ है कि ताक़त और ग़लबा मिलने पर भी मुसलमान को रहम और इंसाफ़ का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि अल्लाह देख रहा है कि तुम क्या करते हो। यही वह पैग़ाम है जो इस उम्मत को इज़्ज़त और कामयाबी की राह दिखाता है — अल्लाह से डरो, उस पर भरोसा रखो, और उसकी राह में नेकी और रहमत को अपनाओ।
📜 आयत 22-26 — अल-फतह
अनुवाद — अल-फतह 24
सूरा अल-फतह आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह वही तो है जिसने तुमको उन कुफ्फ़ार पर…सूरा आयत 24/29 — अल-फतह الفتح (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फतह सुनें, अल-फतह अनुवाद, अल-फतह mp3, अल-फतह pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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