अल-फतह · 23/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फतह
سُنَّةَ اللَّهِ الَّتِي قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا ۝٢٣
Sunnatal laahil latee qad khalat min qablu wa lan tajida lisunnatil laahi tabdeelaa
📖 हिंदी अर्थ
यही ख़ुदा की आदत है जो पहले ही से चली आती है और तुम ख़ुदा की आदत को बदलते न देखोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُنَّةَ اللَّهِ: अल्लाह की सुन्नत (रीति/क़ानून)।
  • خَلَتْ: गुज़र चुकी है, पहले से जारी है।
  • تَبْدِيلًا: बदलाव, परिवर्तन।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला के उस अटल और अपरिवर्तनीय क़ानून को बयान करती है जो उसने अपनी सृष्टि में हमेशा से जारी रखा है। अल्लाह की सुन्नत यह रही है कि वह अपने ईमानवाले और सच्चे बंदों की मदद करता है, उन्हें विजय प्रदान करता है, और अपने दुश्मनों को अपमानित करके हार देता है। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछली उम्मतों के साथ भी अल्लाह का यही व्यवहार रहा है। जो लोग सच्चाई पर डटे रहे और अल्लाह के दीन की मदद की, अल्लाह ने उन्हें कभी निराश नहीं किया, और जिन्होंने सत्य का विरोध किया, वे अंततः पस्त हुए।

अल्लाह तआला फरमाता है कि यह सुन्नत (रीति) कभी बदलती नहीं, और न ही इसमें कोई परिवर्तन आ सकता है। यानी यह क़ानून हर ज़माने और हर जगह लागू रहेगा। जिस तरह अल्लाह ने पहले के नबियों और उनके साथियों की मदद की और उन्हें फ़तह दी, उसी तरह वह इस उम्मत के सच्चे मोमिनों की भी मदद करेगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी टलता नहीं।

इस आयत में मोमिनों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी और दिलासा है। जब कोई मुसलमान इस आयत को पढ़ता है तो उसके दिल में यक़ीन पैदा होता है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी। शर्त यह है कि हम सच्चे ईमान, अच्छे आचरण और अल्लाह के दीन पर स्थिरता के साथ डटे रहें। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का क़ानून हमारे पक्ष में है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं और सब्र के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, उनके लिए विजय निश्चित है।

यह भी याद रखें कि अल्लाह की सुन्नत में कोई बदलाव नहीं आता, इसलिए हमें अपने जीवन में भी इसी क़ानून के अनुसार चलना चाहिए — नेकी को अपनाना, बुराई से बचना, और अल्लाह के वादों पर पूरा भरोसा रखना। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 21-25 — सूरा अल-फतह

21وَأُخْرَىٰ لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا قَدْ أَحَاطَ اللَّهُ بِهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और दूसरी (ग़नीमतें भी दी) जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे (और) ख़ुदा ही उन पर हावी था और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
22وَلَوْ قَاتَلَكُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوَلَّوُا الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
(और) अगर कुफ्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर भाग जाते फिर वह न (अपना) किसी को सरपरस्त ही पाते न मददगार
23سُنَّةَ اللَّهِ الَّتِي قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
यही ख़ुदा की आदत है जो पहले ही से चली आती है और तुम ख़ुदा की आदत को बदलते न देखोगे
24وَهُوَ الَّذِي كَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ عَنْهُم بِبَطْنِ مَكَّةَ مِن بَعْدِ أَنْ أَظْفَرَكُمْ عَلَيْهِمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرًا
और वह वही तो है जिसने तुमको उन कुफ्फ़ार पर फ़तेह देने के बाद मक्के की सरहद पर उनके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे रोक दिए और तुम लोग जो कुछ भी करते थे ख़ुदा उसे देख रहा था
25هُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَالْهَدْيَ مَعْكُوفًا أَن يَبْلُغَ مَحِلَّهُ ۚ وَلَوْلَا رِجَالٌ مُّؤْمِنُونَ وَنِسَاءٌ مُّؤْمِنَاتٌ لَّمْ تَعْلَمُوهُمْ أَن تَطَئُوهُمْ فَتُصِيبَكُم مِّنْهُم مَّعَرَّةٌ بِغَيْرِ عِلْمٍ ۖ لِّيُدْخِلَ اللَّهُ فِي رَحْمَتِهِ مَن يَشَاءُ ۚ لَوْ تَزَيَّلُوا لَعَذَّبْنَا الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
ये वही लोग तो हैं जिन्होने कुफ़्र किया और तुमको मस्जिदुल हराम (में जाने) से रोका और क़ुरबानी के जानवरों को भी (न आने दिया) कि वह अपनी (मुक़र्रर) जगह (में) पहुँचने से रूके रहे और अगर कुछ ऐसे ईमानदार मर्द और ईमानदार औरतें न होती जिनसे तुम वाक़िफ न थे कि तुम उनको (लड़ाई में कुफ्फ़ार के साथ) पामाल कर डालते पस तुमको उनकी तरफ से बेख़बरी में नुकसान पहँच जाता (तो उसी वक्त तुमको फतेह हुई मगर ताख़ीर) इसलिए (हुई) कि ख़ुदा जिसे चाहे अपनी रहमत में दाख़िल करे और अगर वह (ईमानदार कुफ्फ़ार से) अलग हो जाते तो उनमें से जो लोग काफ़िर थे हम उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ज़रूर सज़ा देते
अल-फतहकुरान सूची
29आयत
मदनीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — अल-फतह 23

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Thursday, October 1, 2026

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