Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آلاء: नेमतें, उपकार, अनगिनत अहसान।
- تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों झुठलाते हो (यहाँ ख़िताब इंसानों और जिन्नों दोनों को है)।
तफ़सीर:
ऐ इंसानों और जिन्नों की जमात! तुम्हारे रब की नेमतें और उसके अहसानात इतने ज़्यादा हैं कि उन्हें गिना नहीं जा सकता। हर साँस में, हर पल में, हर चीज़ में उसका करम और फज़ल शामिल है। वही है जिसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हें रिज़्क़ दिया, तुम्हें सुनने और देखने की ताक़त दी, तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछौना और आसमान को छत बनाया। उसने तुम्हें अक़्ल दी, समझ दी, और हिदायत के लिए रसूल और किताबें भेजीं। फिर ऐ इंसानों और जिन्नों! तुम अपने रब की इन कितनी नेमतों को झुठलाओगे? कौन सी नेमत ऐसी है जिसे तुम मना कर सकते हो? क्या तुम्हारे पास कोई दलील है कि इनमें से कोई नेमत तुम्हारे रब की नहीं?
ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों का अहसान मानना और उसका शुक्र अदा करना हमारा फर्ज़ है। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — सूरज, चाँद, सितारे, पानी, हवा, पेड़-पौधे, जानवर, और सबसे बड़ी नेमत ईमान और हिदायत — तो हमारा दिल चाहता है कि हम अपने रब की तारीफ़ करें और उसका शुक्रिया अदा करें। ये आयत हमें उस मालिक की तरफ़ मुड़ने की तरग़ीब देती है जिसने हमें ये सब कुछ दिया है, और हमें बताती है कि उसकी नेमतों का इनकार करना कितनी बड़ी नाइंसाफ़ी है।
अल्लाह तआला हम सबको अपनी नेमतों की क़द्र करने और उसका शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 28-32 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 30
सूरा अर-रहमान आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की कौन कौन सी नेअमत…सूरा आयत 30/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


