अर-रहमान · 29/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
يَسْأَلُهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ ۝٢٩
Yas`aluhoo man fissamaawaati walard; kulla ywmin huwa fee shaan
📖 हिंदी अर्थ
और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْأَلُهُ (उससे माँगते हैं) — अर्थात अपनी ज़रूरतें और हाजतें उसी से पूछते हैं।
  • مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ (जो कोई आसमानों और ज़मीन में है) — इसमें फ़रिश्ते, जिन्न, इंसान और सभी मख़लूक़ात शामिल हैं।
  • كُلَّ يَوْمٍ (हर दिन) — अर्थात हर वक़्त और हर लम्हा।
  • هُوَ فِي شَأْنٍ (वह एक काम में मशग़ूल है) — यानी वह हर पल नए मामले पैदा करता है, किसी को इज़्ज़त देता है, किसी को ज़िल्लत, किसी को रिज़्क़, किसी से छीन लेता है।

तफ़सीर:

यह आयत अल्लाह तआला की उस क़ुदरत और रहमत का बयान करती है जो हर लम्हा और हर पल जारी है। अल्लाह से हर वो चीज़ जो आसमानों में है — फ़रिश्ते, और जो ज़मीन में है — इंसान, जिन्न, जानवर, हर मख़लूक़, सब अपनी ज़रूरतें माँगते हैं। कोई भी उससे बेनियाज़ नहीं है। फ़रिश्ते उससे रहमत की दुआ करते हैं, इंसान अपनी रोज़ी, माफ़ी, हिदायत और हर ज़रूरत के लिए उसी की तरफ़ हाथ फैलाते हैं, जिन्न भी अपनी हाजतों के लिए उसी को पुकारते हैं। यहाँ तक कि जानवर और परिंदे भी अपनी रिज़्क़ के लिए अल्लाह ही पर भरोसा रखते हैं — वे ज़बान से नहीं माँगते, लेकिन उनकी फ़ितरत की ज़ुबान उसी से माँगती है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "हर दिन वह एक नए काम में है" — यानी अल्लाह तआला हर वक़्त अपनी मख़लूक़ात के मामलों को संभाल रहा है। किसी को इज़्ज़त देता है, किसी को ज़िल्लत; किसी को दौलत देता है, किसी से छीन लेता है; किसी को शिफ़ा देता है, किसी को बीमारी; किसी की दुआ क़ुबूल करता है, किसी को माफ़ करता है, किसी को हिदायत देता है। हर पल वह नए फ़ैसले करता है, नई तदबीरें फ़रमाता है। यह उसकी क़ुदरत का इज़हार है कि वह कभी खाली नहीं बैठता, उसकी रहमत और इंतज़ाम का सिलसिला कभी रुकता नहीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें हर वक़्त अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से माँगना चाहिए। जब हम देखते हैं कि पूरी कायनात — आसमान के फ़रिश्तों से लेकर ज़मीन के कीड़ों तक — सब उसी की तरफ़ रुजू करते हैं, तो हमें भी अपनी हर ज़रूरत में उसी का दामन थामना चाहिए। अल्लाह हर पल हमारे साथ है, हमारी हर ज़रूरत को जानता है, और अपनी हिकमत से हमें देता है। यह हमारे लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है कि हमारा रब कभी हमसे ग़ाफ़िल नहीं, वह हर लम्हा हमारे मामलात में मशग़ूल है। तो आओ, हम अपनी हर ज़रूरत में सिर्फ़ उसी से माँगें, और उस पर पूरा भरोसा रखें — क्योंकि वही है जो हर दिन नए काम करता है, और उसकी रहमत का दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अर-रहमान

27وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
और सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी
28فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
29يَسْأَلُهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ
और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है
30فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की कौन कौन सी नेअमत से मुकरोगे
31سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ الثَّقَلَانِ
(ऐ दोनों गिरोहों) हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ मुतावज्जे होंगे
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
29आयत

अनुवाद — अर-रहमान 29

सूरा अर-रहमान आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब)…

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Tuesday, August 18, 2026

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