Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَنَفْرُغُ: हम ध्यान देंगे, हम पूरी तरह से एकाग्र होंगे। यहाँ इसका अर्थ है हिसाब के लिए पूरी तरह तैयार होना।
- الثَّقَلَانِ: दो भारी चीज़ें, यानी जिन्न और इंसान। इन्हें इसलिए 'थक़लैन' कहा गया क्योंकि ये दोनों ज़मीन के निवासी हैं और अपने वजूद से ज़मीन को भारी करते हैं, और इनका हिसाब भी बहुत भारी होगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को एक बहुत ही गंभीर और अहम चेतावनी दे रहा है। वह फ़रमाता है: "हम जल्द ही तुम्हारे लिए खाली होंगे, ऐ जिन्न और इंसान!" यानी हिसाब के दिन हम पूरी तरह से तुम्हारे कर्मों की जाँच-पड़ताल में लग जाएँगे। यहाँ "फ़ारिग़ होने" का मतलब यह नहीं है कि अल्लाह को कोई थकान या कमी लगती है, बल्कि यह एक शानदार अंदाज़ में वादा है कि उस दिन हर एक को उसके किए का पूरा बदला दिया जाएगा। अल्लाह तआला किसी काम से दूसरे काम से नहीं रुकता, उसकी शान इससे पाक है। यह सिर्फ़ एक तरह से डराने और सचेत करने का ज़रिया है।
अल्लाह ने इंसानों और जिन्नों को "थक़लैन" (दो भारी चीज़ें) क्यों कहा? क्योंकि ये दोनों ज़मीन पर रहने वाले हैं, और ज़िंदा हों या मुर्दा, ज़मीन उनसे भारी रहती है। यह भी इशारा है कि इन दोनों मख़लूक़ात पर अल्लाह की तरफ से बहुत बड़ी ज़िम्मेदारियाँ हैं, और उनका हिसाब भी बहुत बारीकी से होगा।
यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया कोई खेल-तमाशा नहीं है। हर इंसान और हर जिन्न से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा। जिसने नेकी की होगी, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने गुनाह किए होंगे, उसे सज़ा मिलेगी। यह अल्लाह का न्याय है, और उसका वादा सच्चा है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें जागरूक करती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल, हर काम, हर साँस का हिसाब होना है। अल्लाह तआला ने हमें यह दुनिया इम्तिहान के लिए दी है। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया में ऐसे काम करें जो अल्लाह को पसंद हों, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो और हम जन्नत के हक़दार बनें। यह डर हमें गुनाहों से दूर रखता है और नेकियों की तरफ ले जाता है। अल्लाह से डरो, उसकी रहमत की उम्मीद रखो, और याद रखो कि उसका हिसाब बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है। जो लोग उसकी तरफ रुजू करेंगे, उनके लिए खुशखबरी है।
📜 आयत 29-33 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 31
सूरा अर-रहमान आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ दोनों गिरोहों) हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ मुतावज्जे होंगेसूरा आयत 31/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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