अर-रहमान · 31/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ الثَّقَلَانِ ۝٣١
Sanafrughu lakum ayyuhas saqalaan
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ दोनों गिरोहों) हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ मुतावज्जे होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَنَفْرُغُ: हम ध्यान देंगे, हम पूरी तरह से एकाग्र होंगे। यहाँ इसका अर्थ है हिसाब के लिए पूरी तरह तैयार होना।
  • الثَّقَلَانِ: दो भारी चीज़ें, यानी जिन्न और इंसान। इन्हें इसलिए 'थक़लैन' कहा गया क्योंकि ये दोनों ज़मीन के निवासी हैं और अपने वजूद से ज़मीन को भारी करते हैं, और इनका हिसाब भी बहुत भारी होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को एक बहुत ही गंभीर और अहम चेतावनी दे रहा है। वह फ़रमाता है: "हम जल्द ही तुम्हारे लिए खाली होंगे, ऐ जिन्न और इंसान!" यानी हिसाब के दिन हम पूरी तरह से तुम्हारे कर्मों की जाँच-पड़ताल में लग जाएँगे। यहाँ "फ़ारिग़ होने" का मतलब यह नहीं है कि अल्लाह को कोई थकान या कमी लगती है, बल्कि यह एक शानदार अंदाज़ में वादा है कि उस दिन हर एक को उसके किए का पूरा बदला दिया जाएगा। अल्लाह तआला किसी काम से दूसरे काम से नहीं रुकता, उसकी शान इससे पाक है। यह सिर्फ़ एक तरह से डराने और सचेत करने का ज़रिया है।

अल्लाह ने इंसानों और जिन्नों को "थक़लैन" (दो भारी चीज़ें) क्यों कहा? क्योंकि ये दोनों ज़मीन पर रहने वाले हैं, और ज़िंदा हों या मुर्दा, ज़मीन उनसे भारी रहती है। यह भी इशारा है कि इन दोनों मख़लूक़ात पर अल्लाह की तरफ से बहुत बड़ी ज़िम्मेदारियाँ हैं, और उनका हिसाब भी बहुत बारीकी से होगा।

यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया कोई खेल-तमाशा नहीं है। हर इंसान और हर जिन्न से उसके अमल का हिसाब लिया जाएगा। जिसने नेकी की होगी, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने गुनाह किए होंगे, उसे सज़ा मिलेगी। यह अल्लाह का न्याय है, और उसका वादा सच्चा है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें जागरूक करती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल, हर काम, हर साँस का हिसाब होना है। अल्लाह तआला ने हमें यह दुनिया इम्तिहान के लिए दी है। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया में ऐसे काम करें जो अल्लाह को पसंद हों, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो और हम जन्नत के हक़दार बनें। यह डर हमें गुनाहों से दूर रखता है और नेकियों की तरफ ले जाता है। अल्लाह से डरो, उसकी रहमत की उम्मीद रखो, और याद रखो कि उसका हिसाब बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है। जो लोग उसकी तरफ रुजू करेंगे, उनके लिए खुशखबरी है।



📜 आयत 29-33 — अर-रहमान

29يَسْأَلُهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ
और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं (सब) उसी से माँगते हैं वह हर रोज़ (हर वक्त) मख़लूक के एक न एक काम में है
30فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की कौन कौन सी नेअमत से मुकरोगे
31سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ الثَّقَلَانِ
(ऐ दोनों गिरोहों) हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ मुतावज्जे होंगे
32فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत को न मानोगे
33يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ إِنِ اسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا مِنْ أَقْطَارِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ فَانفُذُوا ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَانٍ
ऐ गिरोह जिन व इन्स अगर तुममें क़ुदरत है कि आसमानों और ज़मीन के किनारों से (होकर कहीं) निकल (कर मौत या अज़ाब से भाग) सको तो निकल जाओ (मगर) तुम तो बग़ैर क़ूवत और ग़लबे के निकल ही नहीं सकते (हालॉ कि तुममें न क़ूवत है और न ही ग़लबा)
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
31आयत

अनुवाद — अर-रहमान 31

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सूरा आयत 31/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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