अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- आलाइ (آلاء): अल्लाह की नेमतें और एहसान।
- तुकज़्ज़िबान (تُكَذِّبَان): तुम दोनों झुठलाते हो।
तफ़सीर:
ऐ जिन्न और इंसानों के समूह! तुम दोनों पर अल्लाह की कितनी ही नेमतें बरस रही हैं—आसमान और ज़मीन की पैदाइश, सूरज और चाँद की रोशनी, बारिश का नाज़िल होना, रिज़्क़ का मिलना, मौत और ज़िंदगी का निज़ाम, और हर वो चीज़ जो तुम्हारे काम आती है। फिर इन सब नेमतों में से कौन सी नेमत को तुम झुठलाओगे? यानी तुम्हारे पास इनकार करने की कोई गुंजाइश ही नहीं, क्योंकि हर नेमत अल्लाह की तरफ से है और उसका शुक्र अदा करना तुम्हारा फर्ज़ है।
यह आयत बार-बार दोहराई गई है ताकि इंसान और जिन्न दोनों को एहसास हो कि अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं और उनका शुक्र अदा करना चाहिए, न कि कुफ़्र और नाशुक्री करनी चाहिए। जो शख्स इन नेमतों को देखकर अल्लाह की तारीफ़ करता है और उसकी इबादत में लगा रहता है, वही सच्चा शुक्रगुज़ार है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल अल्लाह की नेमतों से भरा हुआ है। जब हम सुबह उठते हैं, साँस लेते हैं, खाना खाते हैं, पानी पीते हैं—हर चीज़ में अल्लाह का करम है। अगर हम इन नेमतों को गिनना चाहें तो गिन नहीं सकते। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़बान से हमेशा "अल्हम्दुलिल्लाह" कहें और अपने अमल से अल्लाह की इताअत करें। यह आयत हमें नेमतों की क़द्र करना सिखाती है और हमें उस रब के करीब लाती है जो अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है। जो शख्स इन नेमतों को पहचान लेता है, उसका दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है और वह अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक गुज़ारता है।
📜 आयत 30-34 — अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 32
सूरा अर-रहमान आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत…सूरा आयत 32/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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