Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَعْشَرَ: समूह, जमात
- تَنفُذُوا: बाहर निकलो, भाग जाओ
- أَقْطَارِ: किनारों, छोरों, दिशाओं से
- سُلْطَانٍ: शक्ति, प्रमाण, अधिकार
तफ़सीर:
अल्लाह तआला क़ियामत के दिन जिन्न और इंसानों के समूह को संबोधित करते हुए फ़रमाता है: "ऐ जिन्न और इंसानों की जमात! अगर तुममें यह ताक़त है कि आसमानों और ज़मीन की हदों से निकलकर मेरे हुक्म और मेरी पकड़ से बच सको, तो निकल भागो।" यह एक चुनौती है जो अल्लाह तआला उन्हें दे रहा है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यह काम उनके बस में नहीं है। वे कभी भी अल्लाह के इल्म और उसकी क़ुदरत के दायरे से बाहर नहीं निकल सकते।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तुम बाहर नहीं निकल सकते, मगर एक सुल्तान (शक्ति और प्रमाण) के साथ।" यानी तुम्हारे पास न तो कोई ताक़त है और न ही कोई दलील जिसके बल पर तुम अल्लाह के हुक्म से भाग सको। यहाँ "सुल्तान" से मुराद वह शक्ति और अधिकार है जो अल्लाह के दिए बिना किसी को हासिल नहीं हो सकता। और अल्लाह की पकड़ से बचने के लिए तो कोई सुल्तान हो सकता ही नहीं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत और उसके इल्म से कोई चीज़ बाहर नहीं है। इंसान चाहे कितना ही तरक़्क़ी कर ले, चाहे वह अंतरिक्ष में चला जाए या समुद्र की गहराइयों में, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता। यह आयत हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक नसीहत भी कि हमें अल्लाह के सामने झुकना चाहिए, उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए, क्योंकि उससे बचने की कोई जगह नहीं।
इस आयत में अल्लाह तआला ने जिन्न और इंसान दोनों को एक साथ संबोधित किया है, क्योंकि दोनों ही मुकल्लफ़ (जिम्मेदार) हैं और दोनों को ही हिसाब देना है। यह भी एक बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमें चेतावनी दी और हमें मौका दिया कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधार लें।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तो ऐ जिन्न और इंसान! तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?" यह एक ऐसा सवाल है जो हर इंसान के दिल को झिंझोड़ देता है। अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं - ज़िंदगी, सेहत, रिज़्क़, हिदायत, और सबसे बड़ी नेमत इस्लाम और ईमान। हमें चाहिए कि हम इन नेमतों का शुक्र अदा करें और अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।
याद रखिए! जिस दिन यह चुनौती दी जाएगी, उस दिन हर शख्स अपने आमाल के साथ हाज़िर होगा। आज हमारे पास मौका है कि हम तौबा करें, अल्लाह की रहमत की तरफ लौटें, और उसके हुक्मों पर अमल करें। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहीम है, वह तौबा करने वालों को गले लगाता है और उनके गुनाह माफ कर देता है।
📜 आयत 31-35 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 33
सूरा अर-रहमान आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ गिरोह जिन व इन्स अगर तुममें क़ुदरत है कि…सूरा आयत 33/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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