अर-रहमान · 64/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
مُدْهَامَّتَانِ ۝٦٤
Mudhaaammataan
📖 हिंदी अर्थ
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مُدْهَامَّتَانِ: अत्यंत हरी-भरी, जिनका हरापन इतना गहरा हो कि कालेपन की ओर झुक जाए। यह "देहक़" (दहक़) से लिया गया है, जिसका अर्थ है गहरा कालापन, और यहाँ इसका प्रयोग अत्यधिक हरियाली और ताज़गी के लिए हुआ है।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में दो जन्नतों का वर्णन कर रहे हैं जो उन लोगों के लिए हैं जो अपने रब के सामने खड़े होने से डरते हैं। ये दो जन्नतें इतनी हरी-भरी और सघन हैं कि उनका हरापन गहरे कालेपन में बदल गया है। यह उनकी अत्यधिक ताज़गी, सुंदरता और समृद्धि की निशानी है। जब कोई चीज़ अत्यधिक हरी और सजीव होती है, तो वह दूर से काली दिखाई देती है। यहाँ अल्लाह ने इस शब्द से जन्नत की उस हरियाली और खूबसूरती को बयान किया है जो किसी आँख ने नहीं देखी, किसी कान ने नहीं सुनी और किसी दिल ने नहीं सोची।

इस आयत के बाद अल्लाह फरमाता है: "तो तुम दोनों (जिन्न और इंसान) अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?" यह एक प्यार भरा सवाल है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि अल्लाह ने हमें कितनी नेमतें दी हैं, और हम उनके लिए शुक्र क्यों नहीं करते?

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की रहमत और उसके इनामों की याद दिलाती है। अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए ऐसी जन्नतें तैयार की हैं जिनकी कोई मिसाल नहीं। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन को अल्लाह की राह में लगाएँ, उसकी इबादत करें और उसके हुक्मों का पालन करें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करते हैं और उसकी राह में चलते हैं, उनके लिए आख़िरत में ऐसी नेमतें हैं जो हमारे दिमाग़ से परे हैं। यह हमें अल्लाह की मोहब्बत और उसके दीन की तरफ़ रागिब करती है। आइए, हम अपने रब के शुक्रगुज़ार बनें और उसकी रहमत के हक़दार बनने की कोशिश करें।



📜 आयत 62-66 — सूरा अर-रहमान

62وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ
उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं
63فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
64مُدْهَامَّتَانِ
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब
65فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे
66فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ
उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — अर-रहमान 64

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Thursday, October 1, 2026

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