अर-रहमान · 63/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٦٣
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلاء: अल्लाह की अनगिनत नेमतें और उपकार।
  • تُكَذِّبَان: तुम दोनों (इंसान और जिन्न) झुठलाते हो।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने पिछली आयतों में दो जन्नतों (बागों) का ज़िक्र किया था, जो उन लोगों के लिए हैं जो अपने रब के सामने खड़े होने से डरते हैं। फिर इस आयत में अल्लाह फ़रमाता है कि इन दो जन्नतों के अलावा उनके लिए दो और जन्नतें भी हैं। यानी अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए चार जन्नतें तैयार की हैं।

अब अल्लाह तआला इंसानों और जिन्नात दोनों को संबोधित करते हुए फ़रमाता है: "तो तुम दोनों अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?" यानी जब अल्लाह ने इतनी बड़ी नेमतें दी हैं, इतने शानदार बाग़ बनाए हैं, तो क्या तुम इन्हें नहीं पहचानोगे? क्या तुम इन पर ईमान नहीं लाओगे?

यह आयत एक प्यार भरी डांट है, एक मोह भरी चेतावनी है। अल्लाह तआला अपने बंदों से पूछ रहा है कि जब मैंने तुम्हें इतना कुछ दिया है, तो तुम मेरी इन नेमतों को कैसे झुठला सकते हो? क्या तुम्हारे पास कोई जवाब है? क्या तुम इन नेमतों का शुक्र अदा करोगे या फिर इन्हें नकारोगे?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें अनगिनत हैं। हर सांस में, हर पल में, हर तरफ उसकी मेहरबानियाँ बरस रही हैं। हमें चाहिए कि इन नेमतों को पहचानें, इनका शुक्र अदा करें और इन्हें झुठलाने से बचें। अल्लाह की नेमतों का इनकार करना सबसे बड़ी नाइंशुक्री है।

याद रखिए! जिस दिन हम अल्लाह के सामने खड़े होंगे, उस दिन हमसे हर नेमत के बारे में पूछा जाएगा। इसलिए आज ही अपने रब की नेमतों को पहचानें, उन पर ईमान लाएं और शुक्रगुज़ार बनें। अल्लाह हमें अपनी नेमतों का सही इस्तेमाल करने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 61-65 — अर-रहमान

61فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत को झुठलाओगे
62وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ
उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं
63فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
64مُدْهَامَّتَانِ
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब
65فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
63आयत

अनुवाद — अर-रहमान 63

सूरा अर-रहमान आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत…

सूरा आयत 63/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए