अर-रहमान · 65/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٦٥
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلاء: अल्लाह की अनगिनत नेमतें और एहसान।
  • تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों (इंसान और जिन्न) झुठलाते हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी उन दो जन्नतों का ज़िक्र कर रहे हैं जो उनके डरने वाले और नेक बंदों के लिए तैयार की गई हैं। ये दोनों जन्नतें गहरी हरी-भरी हैं, उनकी हरियाली इतनी शिद्दत से गहरी है कि वह कालेपन की तरफ माइल हो गई है। यह उनकी ताज़गी, खूबसूरती और बहार की निशानी है।

इसके बाद अल्लाह तआला फरमाते हैं: "तो फिर ऐ इंसानों और जिन्नों! तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?" यह एक ऐसा सवाल है जो दिल को झिंझोड़ देता है। यह पूछने का अंदाज़ इसलिए है ताकि इंसान और जिन्न अपने रब की नेमतों को गिनें, उन पर ग़ौर करें और उनका एहसान मानें।

अल्लाह तआला ने यह नेमतें सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि जिन्नात पर भी नाज़िल की हैं। दोनों को अक्ल दी, हिदायत दी, रिज़्क दिया, और दुनिया की हर चीज़ को उनके लिए मुसख़्खर कर दिया। फिर भी इंसान और जिन्न में से कुछ ऐसे हैं जो इन नेमतों से मुँह मोड़ लेते हैं और उन्हें झुठलाते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब की हर छोटी-बड़ी नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए। जब हम सुबह उठते हैं, साँस लेते हैं, खाना खाते हैं, पानी पीते हैं, या किसी भी आराम में होते हैं — यह सब अल्लाह की नेमतें हैं। अगर हम इन्हें गिनना चाहें तो गिन नहीं सकते। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान से हमेशा "अल्हम्दुलिल्लाह" कहें और अपने अमल से अल्लाह की इताअत करें।

यह आयत हमें डराती भी है और उम्मीद भी देती है — डर इसलिए कि कहीं हम नेमतों का इन्कार करके अल्लाह के अज़ाब के हक़दार न बन जाएँ, और उम्मीद इसलिए कि अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नतें उनके लिए हैं जो उसकी नेमतों को पहचानें और उसका शुक्र अदा करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 63-67 — अर-रहमान

63فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने पालने वाले की किस किस नेअमत से इन्कार करोगे
64مُدْهَامَّتَانِ
दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब
65فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को न मानोगे
66فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ
उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे
67فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे
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अनुवाद — अर-रहमान 65

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Tuesday, August 18, 2026

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