अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آلاء: अल्लाह की अनगिनत नेमतें और एहसान।
- تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों (इंसान और जिन्न) झुठलाते हो।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी उन दो जन्नतों का ज़िक्र कर रहे हैं जो उनके डरने वाले और नेक बंदों के लिए तैयार की गई हैं। ये दोनों जन्नतें गहरी हरी-भरी हैं, उनकी हरियाली इतनी शिद्दत से गहरी है कि वह कालेपन की तरफ माइल हो गई है। यह उनकी ताज़गी, खूबसूरती और बहार की निशानी है।
इसके बाद अल्लाह तआला फरमाते हैं: "तो फिर ऐ इंसानों और जिन्नों! तुम दोनों अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?" यह एक ऐसा सवाल है जो दिल को झिंझोड़ देता है। यह पूछने का अंदाज़ इसलिए है ताकि इंसान और जिन्न अपने रब की नेमतों को गिनें, उन पर ग़ौर करें और उनका एहसान मानें।
अल्लाह तआला ने यह नेमतें सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि जिन्नात पर भी नाज़िल की हैं। दोनों को अक्ल दी, हिदायत दी, रिज़्क दिया, और दुनिया की हर चीज़ को उनके लिए मुसख़्खर कर दिया। फिर भी इंसान और जिन्न में से कुछ ऐसे हैं जो इन नेमतों से मुँह मोड़ लेते हैं और उन्हें झुठलाते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब की हर छोटी-बड़ी नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए। जब हम सुबह उठते हैं, साँस लेते हैं, खाना खाते हैं, पानी पीते हैं, या किसी भी आराम में होते हैं — यह सब अल्लाह की नेमतें हैं। अगर हम इन्हें गिनना चाहें तो गिन नहीं सकते। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान से हमेशा "अल्हम्दुलिल्लाह" कहें और अपने अमल से अल्लाह की इताअत करें।
यह आयत हमें डराती भी है और उम्मीद भी देती है — डर इसलिए कि कहीं हम नेमतों का इन्कार करके अल्लाह के अज़ाब के हक़दार न बन जाएँ, और उम्मीद इसलिए कि अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नतें उनके लिए हैं जो उसकी नेमतों को पहचानें और उसका शुक्र अदा करें।
📜 आयत 63-67 — अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 65
सूरा अर-रहमान आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम दोनों अपने सरपरस्त की किन किन नेअमतों को…सूरा आयत 65/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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