अल-मुजादिला · 11/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا فِي الْمَجَالِسِ فَافْسَحُوا يَفْسَحِ اللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ انشُزُوا فَانشُزُوا يَرْفَعِ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَالَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ دَرَجَاتٍ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ۝١١
Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo izaa qeela lakum tafassahoo fil majaalisi fafsahoo yafsahil laahu lakum wa izaa qeelan shuzoo fanshuzoo yarfa`il laahul lazeena aamanoo minkum wallazeena ootul `ilma darajaat; wallaahu bimaa ta`maloona khabeer
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह कुशादा करो वह तो कुशादा कर दिया करो ख़ुदा तुमको कुशादगी अता करेगा और जब तुमसे कहा जाए कि उठ खड़े हो तो उठ खड़े हुआ करो जो लोग तुमसे ईमानदार हैं और जिनको इल्म अता हुआ है ख़ुदा उनके दर्जे बुलन्द करेगा और ख़ुदा तुम्हारे सब कामों से बेख़बर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَفَسَّحُوا: एक-दूसरे के लिए जगह बनाओ, विस्तार करो।
  • انشُزُوا: उठो, खड़े हो जाओ (किसी अच्छे काम के लिए)।
  • دَرَجَاتٍ: ऊँचे दर्जे, कई स्तर।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस (सभा) में जगह बनाओ, तो जगह बनाया करो। अल्लाह तुम्हारे लिए (दुनिया और आख़िरत में) कुशादगी (विस्तार) पैदा करेगा। और जब तुमसे कहा जाए कि उठो (किसी नेक काम के लिए या किसी बड़े को जगह देने के लिए), तो उठ जाया करो। अल्लाह उन लोगों के दर्जे बुलंद करेगा जो तुममें से सच्चे ईमानवाले हैं और उन्हें भी ऊँचाइयाँ देगा जिन्हें ज्ञान (इल्म) दिया गया है। अल्लाह तुम्हारे हर अमल से ख़ूब वाक़िफ है और वह तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा हिसाब लेगा।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को सिखा रहा है कि आपसी मेल-जोल और इज्ज़त का ख़याल रखो। जब कोई साथी आए और जगह तंग हो, तो एक-दूसरे के लिए जगह बनाओ। यह बड़ी अच्छी आदत है जो मोहब्बत और भाईचारे को बढ़ाती है। इसके बदले में अल्लाह वादा कर रहा है कि वह तुम्हें दुनिया और आख़िरत में कुशादगी देगा। यानी जो दिल से दूसरों के लिए जगह बनाता है, अल्लाह उसके लिए रिज़्क़, दिल और क़ब्र में भी कुशादगी पैदा करता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जब नेक काम के लिए उठने को कहा जाए, तो उठ जाओ। यह सिखाता है कि इंसान को हक़ की बात पर, नेकी के काम पर और दीन की ख़िदमत में हमेशा तैयार रहना चाहिए। जो लोग ईमान के साथ इल्म (ज्ञान) हासिल करते हैं, अल्लाह उनके दर्जे बुलंद करता है। इल्म वालों को ईमानवालों से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है, क्योंकि इल्म इंसान को अमल की तरफ़ ले जाता है और अल्लाह की पहचान कराता है। यही वजह है कि अल्लाह ने यहाँ ईमान और इल्म दोनों को साथ जोड़ा और फिर फ़रमाया कि अल्लाह तुम्हारे सारे अमल से बाख़बर है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में अख़लाक़ (शिष्टाचार) की कितनी अहमियत है। मजलिस में जगह बनाना, बड़ों की इज़्ज़त करना, और इल्म हासिल करना — ये सब ऐसे काम हैं जो इंसान को अल्लाह के करीब लाते हैं। अल्लाह ने जिन्हें इल्म दिया, उनके दर्जे बुलंद किए। यानी अगर हम चाहते हैं कि अल्लाह हमें बुलंद करे, तो हमें इल्म हासिल करना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यह आयत हमें बताती है कि दुनिया में एक-दूसरे के लिए जगह बनाने वालों को अल्लाह आख़िरत में जन्नत की कुशादगी अता करेगा। कितनी प्यारी बात है कि अल्लाह हमें छोटी-छोटी अच्छाइयों पर भी बड़ा अज्र देने का वादा करता है।



📜 आयत 9-13 — अल-मुजादिला

9يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا تَنَاجَيْتُمْ فَلَا تَتَنَاجَوْا بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَتَنَاجَوْا بِالْبِرِّ وَالتَّقْوَىٰ ۖ وَاتَّقُوا اللَّهَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और ख़ुदा से डरते रहो जिसके सामने (एक दिन) जमा किए जाओगे
10إِنَّمَا النَّجْوَىٰ مِنَ الشَّيْطَانِ لِيَحْزُنَ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيْسَ بِضَارِّهِمْ شَيْئًا إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(बरी बातों की) सरगोशी तो बस एक शैतानी काम है (और इसलिए करते हैं) ताकि ईमानदारों को उससे रंज पहुँचे हालॉकि ख़ुदा की तरफ से आज़ादी दिए बग़ैर सरगोशी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती और मोमिनीन को तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
11يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا فِي الْمَجَالِسِ فَافْسَحُوا يَفْسَحِ اللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ انشُزُوا فَانشُزُوا يَرْفَعِ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَالَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ دَرَجَاتٍ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह कुशादा करो वह तो कुशादा कर दिया करो ख़ुदा तुमको कुशादगी अता करेगा और जब तुमसे कहा जाए कि उठ खड़े हो तो उठ खड़े हुआ करो जो लोग तुमसे ईमानदार हैं और जिनको इल्म अता हुआ है ख़ुदा उनके दर्जे बुलन्द करेगा और ख़ुदा तुम्हारे सब कामों से बेख़बर है
12يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نَاجَيْتُمُ الرَّسُولَ فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَةً ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ ईमानदारों जब पैग़म्बर से कोई बात कान में कहनी चाहो तो कुछ ख़ैरात अपनी सरगोशी से पहले दे दिया करो यही तुम्हारे वास्ते बेहतर और पाकीज़ा बात है पस अगर तुमको इसका मुक़दूर न हो तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
13أَأَشْفَقْتُمْ أَن تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَاتٍ ۚ فَإِذْ لَمْ تَفْعَلُوا وَتَابَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
(मुसलमानों) क्या तुम इस बात से डर गए कि (रसूल के) कान में बात कहने से पहले ख़ैरात कर लो तो जब तुम लोग (इतना सा काम) न कर सके और ख़ुदा ने तुम्हें माफ़ कर दिया तो पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा उसके रसूल की इताअत करो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
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अनुवाद — अल-मुजादिला 11

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Tuesday, August 18, 2026

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