Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَفَسَّحُوا: एक-दूसरे के लिए जगह बनाओ, विस्तार करो।
- انشُزُوا: उठो, खड़े हो जाओ (किसी अच्छे काम के लिए)।
- دَرَجَاتٍ: ऊँचे दर्जे, कई स्तर।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस (सभा) में जगह बनाओ, तो जगह बनाया करो। अल्लाह तुम्हारे लिए (दुनिया और आख़िरत में) कुशादगी (विस्तार) पैदा करेगा। और जब तुमसे कहा जाए कि उठो (किसी नेक काम के लिए या किसी बड़े को जगह देने के लिए), तो उठ जाया करो। अल्लाह उन लोगों के दर्जे बुलंद करेगा जो तुममें से सच्चे ईमानवाले हैं और उन्हें भी ऊँचाइयाँ देगा जिन्हें ज्ञान (इल्म) दिया गया है। अल्लाह तुम्हारे हर अमल से ख़ूब वाक़िफ है और वह तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा हिसाब लेगा।
इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को सिखा रहा है कि आपसी मेल-जोल और इज्ज़त का ख़याल रखो। जब कोई साथी आए और जगह तंग हो, तो एक-दूसरे के लिए जगह बनाओ। यह बड़ी अच्छी आदत है जो मोहब्बत और भाईचारे को बढ़ाती है। इसके बदले में अल्लाह वादा कर रहा है कि वह तुम्हें दुनिया और आख़िरत में कुशादगी देगा। यानी जो दिल से दूसरों के लिए जगह बनाता है, अल्लाह उसके लिए रिज़्क़, दिल और क़ब्र में भी कुशादगी पैदा करता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जब नेक काम के लिए उठने को कहा जाए, तो उठ जाओ। यह सिखाता है कि इंसान को हक़ की बात पर, नेकी के काम पर और दीन की ख़िदमत में हमेशा तैयार रहना चाहिए। जो लोग ईमान के साथ इल्म (ज्ञान) हासिल करते हैं, अल्लाह उनके दर्जे बुलंद करता है। इल्म वालों को ईमानवालों से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है, क्योंकि इल्म इंसान को अमल की तरफ़ ले जाता है और अल्लाह की पहचान कराता है। यही वजह है कि अल्लाह ने यहाँ ईमान और इल्म दोनों को साथ जोड़ा और फिर फ़रमाया कि अल्लाह तुम्हारे सारे अमल से बाख़बर है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में अख़लाक़ (शिष्टाचार) की कितनी अहमियत है। मजलिस में जगह बनाना, बड़ों की इज़्ज़त करना, और इल्म हासिल करना — ये सब ऐसे काम हैं जो इंसान को अल्लाह के करीब लाते हैं। अल्लाह ने जिन्हें इल्म दिया, उनके दर्जे बुलंद किए। यानी अगर हम चाहते हैं कि अल्लाह हमें बुलंद करे, तो हमें इल्म हासिल करना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यह आयत हमें बताती है कि दुनिया में एक-दूसरे के लिए जगह बनाने वालों को अल्लाह आख़िरत में जन्नत की कुशादगी अता करेगा। कितनी प्यारी बात है कि अल्लाह हमें छोटी-छोटी अच्छाइयों पर भी बड़ा अज्र देने का वादा करता है।
📜 आयत 9-13 — सूरा अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 11
सूरा अल-मुजादिला आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह…सूरा आयत 11/22 — सूरा अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुजादिला सुनें, सूरा अल-मुजादिला अनुवाद, सूरा अल-मुजादिला mp3, सूरा अल-मुजादिला pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुजादिला
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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