अल-मुजादिला · 12/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نَاجَيْتُمُ الرَّسُولَ فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَةً ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١٢
Yaaa ayyuhal lazeena aamanooo izaa naajitumur Rasoola faqaddimoo baina yadai najwaakum sadaqah; zaalika khairul lakum wa athar; fa il lam tajidoo fa innal laaha ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों जब पैग़म्बर से कोई बात कान में कहनी चाहो तो कुछ ख़ैरात अपनी सरगोशी से पहले दे दिया करो यही तुम्हारे वास्ते बेहतर और पाकीज़ा बात है पस अगर तुमको इसका मुक़दूर न हो तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَاجَيْتُمُ: गुप्त बातचीत करना, कान में बात कहना, सरगोशी करना।
  • فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ: अपनी गुप्त बातचीत से पहले (सदक़ा) दान आगे बढ़ाओ।
  • صَدَقَةً: दान, ख़ैरात।
  • أَطْهَرُ: अधिक पवित्र, दिल को गुनाहों से साफ़ करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! जब तुम रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अकेले में कोई गुप्त बात करना चाहो, तो पहले अपनी उस सरगोशी से पहले किसी ज़रूरतमंद को सदक़ा दे दो। यह काम तुम्हारे लिए बेहतर है और तुम्हारे दिलों को गुनाहों से पाक करने वाला है। यह आदेश इसलिए दिया गया कि सहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से बहुत ज़्यादा सवाल-जवाब करते थे, जिससे आप पर बोझ पड़ता था। इस हुक्म के बाद अमीर लोग शर्म और कंजूसी की वजह से सवाल करने से रुक गए, और ग़रीब लोग सदक़ा न पा सकने की वजह से रुक गए। फिर अल्लाह ने रहमत फ़रमाते हुए यह आसानी दी कि अगर तुम्हें सदक़ा देने के लिए कुछ न मिले, तो कोई गुनाह नहीं, क्योंकि अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला और अत्यंत दयावान है। उसने अपने बंदों पर वही ज़िम्मेदारी डाली जो उनकी ताक़त के भीतर थी।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों पर कभी ऐसा बोझ नहीं डालता जो उनके बस से बाहर हो। वह हमेशा आसानी और रहमत का रास्ता दिखाता है। साथ ही, यह भी सबक़ है कि नेक कामों में जल्दी करनी चाहिए और अल्लाह की राह में ख़र्च करने से दिल साफ़ होता है और इंसान अल्लाह के करीब होता है। यह आयत हमें रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदाब का भी पाठ पढ़ाती है कि उनसे बात करने का तरीक़ा भी अल्लाह सिखाता है, ताकि हम उनकी महबूबियत को समझें और उनके साथ अदब से पेश आएँ। अल्लाह हमें इस आयत पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 10-14 — अल-मुजादिला

10إِنَّمَا النَّجْوَىٰ مِنَ الشَّيْطَانِ لِيَحْزُنَ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَيْسَ بِضَارِّهِمْ شَيْئًا إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(बरी बातों की) सरगोशी तो बस एक शैतानी काम है (और इसलिए करते हैं) ताकि ईमानदारों को उससे रंज पहुँचे हालॉकि ख़ुदा की तरफ से आज़ादी दिए बग़ैर सरगोशी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती और मोमिनीन को तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
11يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قِيلَ لَكُمْ تَفَسَّحُوا فِي الْمَجَالِسِ فَافْسَحُوا يَفْسَحِ اللَّهُ لَكُمْ ۖ وَإِذَا قِيلَ انشُزُوا فَانشُزُوا يَرْفَعِ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا مِنكُمْ وَالَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ دَرَجَاتٍ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह कुशादा करो वह तो कुशादा कर दिया करो ख़ुदा तुमको कुशादगी अता करेगा और जब तुमसे कहा जाए कि उठ खड़े हो तो उठ खड़े हुआ करो जो लोग तुमसे ईमानदार हैं और जिनको इल्म अता हुआ है ख़ुदा उनके दर्जे बुलन्द करेगा और ख़ुदा तुम्हारे सब कामों से बेख़बर है
12يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نَاجَيْتُمُ الرَّسُولَ فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَةً ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لَّكُمْ وَأَطْهَرُ ۚ فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ ईमानदारों जब पैग़म्बर से कोई बात कान में कहनी चाहो तो कुछ ख़ैरात अपनी सरगोशी से पहले दे दिया करो यही तुम्हारे वास्ते बेहतर और पाकीज़ा बात है पस अगर तुमको इसका मुक़दूर न हो तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
13أَأَشْفَقْتُمْ أَن تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوَاكُمْ صَدَقَاتٍ ۚ فَإِذْ لَمْ تَفْعَلُوا وَتَابَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ فَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
(मुसलमानों) क्या तुम इस बात से डर गए कि (रसूल के) कान में बात कहने से पहले ख़ैरात कर लो तो जब तुम लोग (इतना सा काम) न कर सके और ख़ुदा ने तुम्हें माफ़ कर दिया तो पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा उसके रसूल की इताअत करो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
14۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ تَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللَّهُ عَلَيْهِم مَّا هُم مِّنكُمْ وَلَا مِنْهُمْ وَيَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
क्या तुमने उन लोगों की हालत पर ग़ौर नहीं किया जो उन लोगों से दोस्ती करते हैं जिन पर ख़ुदा ने ग़ज़ब ढाया है तो अब वह न तुम मे हैं और न उनमें ये लोग जानबूझ कर झूठी बातो पर क़समें खाते हैं और वह जानते हैं
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अनुवाद — अल-मुजादिला 12

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Tuesday, August 18, 2026

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