Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَئِنْ أُخْرِجُوا – यदि वे (यहूदी) निकाले जाएँ
- لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ – वे (मुनाफ़िक़) उनके साथ नहीं निकलेंगे
- وَلَئِن قُوتِلُوا – और यदि उनसे युद्ध किया जाए
- لَا يَنصُرُونَهُمْ – वे उनकी सहायता नहीं करेंगे
- لَيُوَلُّنَّ الْأَدْبَارَ – वे पीठ फेरकर भाग जाएँगे
- ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ – फिर उन्हें (कहीं से) सहायता नहीं मिलेगी
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की असलियत और उनके वादों की झूठी होने की सच्चाई बयान कर रहे हैं। यह उन यहूदी क़बीलों के संदर्भ में है जिन्होंने मुनाफ़िक़ों से मदद का वादा किया था, लेकिन अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि ये वादे खोखले हैं।
अल्लाह फ़रमाता है: अगर यहूदियों को उनके घरों से निकाला जाए, तो ये मुनाफ़िक़ उनके साथ नहीं निकलेंगे। और अगर यहूदियों से जंग लड़ी जाए, तो ये मुनाफ़िक़ उनकी मदद नहीं करेंगे। और अगर वे (मुनाफ़िक़) किसी तरह उनकी मदद करने भी आएँ, तो वे मैदान-ए-जंग से पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे, और फिर उन्हें (यहूदियों को) कहीं से कोई सहायता नसीब नहीं होगी।
यह अल्लाह की ओर से एक भविष्यवाणी थी, जो बिल्कुल सच साबित हुई। जब बनी नज़ीर का क़बीला मदीना से निकाला गया, तो मुनाफ़िक़ों ने उनकी कोई मदद नहीं की, और जो वादे उन्होंने किए थे, वे सब झूठे निकले। अल्लाह ने यह बात पहले ही बता दी ताकि मुसलमानों को यक़ीन हो कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसकी मदद मुसलमानों के साथ है।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है कि इंसान को कभी भी अल्लाह के दुश्मनों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, चाहे वे कितने भी वादे कर लें। सच्ची मदद सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से आती है। जो लोग अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, अल्लाह उनकी मदद करता है, और जो अल्लाह के दुश्मनों के साथ खड़े होते हैं, वे आख़िरकार रुसवा और ज़लील होकर रहते हैं।
यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपनी ताक़त और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखें, न कि इंसानों के वादों पर। क्योंकि इंसान के वादे बदलते रहते हैं, लेकिन अल्लाह का वादा कभी नहीं बदलता। अल्लाह ने मोमिनों से वादा किया है कि वह उनकी मदद करेगा और उन्हें कामयाबी देगा, बशर्ते वे उसके दीन पर साबित-क़दम रहें।
आइए हम इस आयत से सबक़ लें कि हम अपने जीवन में सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें। अल्लाह हमें सच्चे मोमिन बनाए और हमें मुनाफ़िक़ों के रास्ते से बचाए। आमीन।
📜 आयत 10-14 — सूरा अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 12
सूरा अल-हश्र आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर कुफ्फ़ार निकाले भी जाएँ तो ये मुनाफेक़ीन उनके साथ…सूरा आयत 12/24 — सूरा अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हश्र सुनें, सूरा अल-हश्र अनुवाद, सूरा अल-हश्र mp3, सूरा अल-हश्र pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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