अल-हश्र · 12/24
अनुवाद उच्चारण — अल-हश्र
لَئِنْ أُخْرِجُوا لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ وَلَئِن قُوتِلُوا لَا يَنصُرُونَهُمْ وَلَئِن نَّصَرُوهُمْ لَيُوَلُّنَّ الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ ۝١٢
La`in ukhrijoo laa yakhrujoona ma`ahum wa la`in qootiloo laa yansuroonahum wa la`in nasaroohum la yuwallunnal adbaara summa laa yunsaroon
📖 हिंदी अर्थ
अगर कुफ्फ़ार निकाले भी जाएँ तो ये मुनाफेक़ीन उनके साथ न निकलेंगे और अगर उनसे लड़ाई हुई तो उनकी मदद भी न करेंगे और यक़ीनन करेंगे भी तो पीठ फेर कर भाग जाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَئِنْ أُخْرِجُوا – यदि वे (यहूदी) निकाले जाएँ
  • لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ – वे (मुनाफ़िक़) उनके साथ नहीं निकलेंगे
  • وَلَئِن قُوتِلُوا – और यदि उनसे युद्ध किया जाए
  • لَا يَنصُرُونَهُمْ – वे उनकी सहायता नहीं करेंगे
  • لَيُوَلُّنَّ الْأَدْبَارَ – वे पीठ फेरकर भाग जाएँगे
  • ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ – फिर उन्हें (कहीं से) सहायता नहीं मिलेगी

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की असलियत और उनके वादों की झूठी होने की सच्चाई बयान कर रहे हैं। यह उन यहूदी क़बीलों के संदर्भ में है जिन्होंने मुनाफ़िक़ों से मदद का वादा किया था, लेकिन अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि ये वादे खोखले हैं।

अल्लाह फ़रमाता है: अगर यहूदियों को उनके घरों से निकाला जाए, तो ये मुनाफ़िक़ उनके साथ नहीं निकलेंगे। और अगर यहूदियों से जंग लड़ी जाए, तो ये मुनाफ़िक़ उनकी मदद नहीं करेंगे। और अगर वे (मुनाफ़िक़) किसी तरह उनकी मदद करने भी आएँ, तो वे मैदान-ए-जंग से पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे, और फिर उन्हें (यहूदियों को) कहीं से कोई सहायता नसीब नहीं होगी।

यह अल्लाह की ओर से एक भविष्यवाणी थी, जो बिल्कुल सच साबित हुई। जब बनी नज़ीर का क़बीला मदीना से निकाला गया, तो मुनाफ़िक़ों ने उनकी कोई मदद नहीं की, और जो वादे उन्होंने किए थे, वे सब झूठे निकले। अल्लाह ने यह बात पहले ही बता दी ताकि मुसलमानों को यक़ीन हो कि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसकी मदद मुसलमानों के साथ है।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है कि इंसान को कभी भी अल्लाह के दुश्मनों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, चाहे वे कितने भी वादे कर लें। सच्ची मदद सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से आती है। जो लोग अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, अल्लाह उनकी मदद करता है, और जो अल्लाह के दुश्मनों के साथ खड़े होते हैं, वे आख़िरकार रुसवा और ज़लील होकर रहते हैं।

यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपनी ताक़त और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखें, न कि इंसानों के वादों पर। क्योंकि इंसान के वादे बदलते रहते हैं, लेकिन अल्लाह का वादा कभी नहीं बदलता। अल्लाह ने मोमिनों से वादा किया है कि वह उनकी मदद करेगा और उन्हें कामयाबी देगा, बशर्ते वे उसके दीन पर साबित-क़दम रहें।

आइए हम इस आयत से सबक़ लें कि हम अपने जीवन में सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें। अल्लाह हमें सच्चे मोमिन बनाए और हमें मुनाफ़िक़ों के रास्ते से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — अल-हश्र

10وَالَّذِينَ جَاءُوا مِن بَعْدِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا إِنَّكَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और उनका भी हिस्सा है और जो लोग उन (मोहाजेरीन) के बाद आए (और) दुआ करते हैं कि परवरदिगारा हमारी और उन लोगों की जो हमसे पहले ईमान ला चुके मग़फेरत कर और मोमिनों की तरफ से हमारे दिलों में किसी तरह का कीना न आने दे परवरदिगार बेशक तू बड़ा शफीक़ निहायत रहम वाला है
11۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نَافَقُوا يَقُولُونَ لِإِخْوَانِهِمُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَئِنْ أُخْرِجْتُمْ لَنَخْرُجَنَّ مَعَكُمْ وَلَا نُطِيعُ فِيكُمْ أَحَدًا أَبَدًا وَإِن قُوتِلْتُمْ لَنَنصُرَنَّكُمْ وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
क्या तुमने उन मुनाफ़िकों की हालत पर नज़र नहीं की जो अपने काफ़िर भाइयों अहले किताब से कहा करते हैं कि अगर कहीं तुम (घरों से) निकाले गए तो यक़ीन जानों कि हम भी तुम्हारे साथ (ज़रूर) निकल खड़े होंगे और तुम्हारे बारे में कभी किसी की इताअत न करेंगे और अगर तुमसे लड़ाई होगी तो ज़रूर तुम्हारी मदद करेंगे, मगर ख़ुदा बयान किए देता है कि ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
12لَئِنْ أُخْرِجُوا لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْ وَلَئِن قُوتِلُوا لَا يَنصُرُونَهُمْ وَلَئِن نَّصَرُوهُمْ لَيُوَلُّنَّ الْأَدْبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ
अगर कुफ्फ़ार निकाले भी जाएँ तो ये मुनाफेक़ीन उनके साथ न निकलेंगे और अगर उनसे लड़ाई हुई तो उनकी मदद भी न करेंगे और यक़ीनन करेंगे भी तो पीठ फेर कर भाग जाएँगे
13لَأَنتُمْ أَشَدُّ رَهْبَةً فِي صُدُورِهِم مِّنَ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ
फिर उनको कहीं से कुमक भी न मिलेगी (मोमिनों) तुम्हारी हैबत उनके दिलों में ख़ुदा से भी बढ़कर है, ये इस वजह से कि ये लोग समझ नहीं रखते
14لَا يُقَاتِلُونَكُمْ جَمِيعًا إِلَّا فِي قُرًى مُّحَصَّنَةٍ أَوْ مِن وَرَاءِ جُدُرٍ ۚ بَأْسُهُم بَيْنَهُمْ شَدِيدٌ ۚ تَحْسَبُهُمْ جَمِيعًا وَقُلُوبُهُمْ شَتَّىٰ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَعْقِلُونَ
ये सब के सब मिलकर भी तुमसे नहीं लड़ सकते, मगर हर तरफ से महफूज़ बस्तियों में या (शहर पनाह की) दीवारों की आड़ में इनकी आपस में तो बड़ी धाक है कि तुम ख्याल करोगे कि सब के सब (एक जान) हैं मगर उनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं ये इस वजह से कि ये लोग बेअक्ल हैं
अल-हश्रकुरान सूची
24आयत
मदनीRevelation
12आयत

अनुवाद — अल-हश्र 12

सूरा अल-हश्र आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर कुफ्फ़ार निकाले भी जाएँ तो ये मुनाफेक़ीन उनके साथ…

सूरा आयत 12/24 — अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हश्र सुनें, अल-हश्र अनुवाद, अल-हश्र mp3, अल-हश्र pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए