अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- रहबत (رهبة): डर, भय, खौफ।
- सुदूरिहिम (صدورهم): उनके दिलों में।
- ला यफ़क़हून (لا يفقهون): वे समझते नहीं, उन्हें अल्लाह की असलीयत और उसकी शान का इल्म नहीं।
तफ़सीर:
ऐ ईमान वालो! ये बात बड़ी हैरान करने वाली है कि मुनाफ़िक़ीन और यहूदियों के दिलों में तुम्हारा खौफ़ अल्लाह के खौफ़ से ज़्यादा होता है। वे तुमसे इस कदर डरते हैं जैसे कोई अपने सबसे बड़े दुश्मन से डरता है, लेकिन अल्लाह से उनके दिलों में वो रोब और दहशत नहीं होती जो होनी चाहिए। ये उनकी नासमझी और जहालत की वजह से है — वे अल्लाह की अज़मत, उसकी क़ुदरत और उसके इंतक़ाम को नहीं समझते। अगर वे सच में समझते कि अल्लाह कितना बड़ा है, उसका अज़ाब कितना सख्त है, और वो ही है जो तुम्हें उन पर ग़ालिब बनाता है, तो वे अल्लाह से ज़्यादा डरते, तुमसे नहीं।
ये बात ईमान वालों के लिए बड़ी तसल्ली और हौसले की है। अल्लाह ने तुम्हारे रोब को उनके दिलों में डाल रखा है, और ये उसी की तरफ़ से है। जब अल्लाह किसी बंदे की मदद करता है, तो दुश्मनों के दिलों में उसका खौफ़ पैदा कर देता है, चाहे वो ताक़त में कम ही क्यों न हो। ये अल्लाह की सुन्नत है — ईमान वालों को इज़्ज़त देना और मुनाफ़िक़ों को ज़िल्लत में डालना।
इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि अल्लाह से डरना ही असली डर है। जो बंदा अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसे हर चीज़ से महफ़ूज़ रखता है और उसके दुश्मनों को उससे डरा देता है। लेकिन जो अल्लाह से नहीं डरता, वो हर चीज़ से डरता है — यहाँ तक कि उसके अपने दिल में भी खौफ़ बस जाता है। ईमान वालों को चाहिए कि वे अल्लाह की अज़मत को समझें, उसकी क़ुदरत को याद रखें, और उसी पर भरोसा करें। जब दिल में अल्लाह का खौफ़ होगा, तो दुनिया की कोई ताक़त हमें नहीं डरा सकती। और याद रखो, अल्लाह अपने ईमान वाले बंदों के साथ है — यही सबसे बड़ी ताक़त है।
📜 आयत 11-15 — अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 13
सूरा अल-हश्र आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर उनको कहीं से कुमक भी न मिलेगी (मोमिनों) तुम्हारी…सूरा आयत 13/24 — अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हश्र सुनें, अल-हश्र अनुवाद, अल-हश्र mp3, अल-हश्र pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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