अल-हश्र · 22/24
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हश्र
هُوَ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۖ هُوَ الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ ۝٢٢
Huwal-laahul-lazee laaa Ilaaha illaa Huwa `Aalimul Ghaibi wash-shahaada; Huwar Rahmaanur-Raheem
📖 हिंदी अर्थ
वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला वही बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْغَيْبِ (अल-ग़ैब): वह सब कुछ जो इंद्रियों से छिपा हुआ हो, जिसे मनुष्य न देख सके और न जान सके।
  • الشَّهَادَةِ (अश-शहादाह): वह सब कुछ जो दृश्यमान हो, जिसे मनुष्य देखता और जानता है।
  • الرَّحْمَٰنُ (अर-रहमान): वह जिसकी रहमत (दया) असीम और व्यापक है, जो सभी प्राणियों को शामिल करती है।
  • الرَّحِيمُ (अर-रहीम): वह जो विशेष रूप से अपने ईमानवाले बंदों पर दया करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की पहचान कराती है और उसके सबसे सुंदर नामों और गुणों से परिचित कराती है। अल्लाह ही वह सच्चा माबूद (पूज्य) है, जिसके अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं। वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। वह عالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ है—यानी वह हर उस चीज़ को जानता है जो हमारी आँखों से छिपी है, चाहे वह आकाशों की ऊँचाइयों में हो या धरती की गहराइयों में, और वह हर उस चीज़ को भी जानता है जो हमारे सामने प्रकट है। उसके ज्ञान से कुछ भी छिपा नहीं है—न हमारे दिलों के राज़, न हमारे विचार, न हमारे कर्म। यह हमारे लिए एक बड़ी शक्ति और सांत्वना है कि हमारा रब हमारी हर स्थिति से अवगत है।

फिर अल्लाह अपने दो सबसे प्यारे नामों का ज़िक्र करता है: الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ। वह रहमान है—उसकी दया इस दुनिया में सभी प्राणियों पर छाई हुई है, चाहे वे ईमानवाले हों या न हों। वह हर किसी को रिज़्क़ देता है, हर किसी पर दया करता है। और वह रहीम है—वह अपने ईमानवाले बंदों पर विशेष दया करता है, उन्हें आख़िरत में अपनी जन्नत से नवाज़ता है और उनके गुनाहों को माफ़ करता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस रब की हम इबादत करते हैं, वह न केवल सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है, बल्कि असीम दया और करुणा का मालिक भी है। यह हमारे दिलों में अल्लाह के प्रति प्रेम, आशा और भरोसा पैदा करती है। जब हम जानते हैं कि हमारा रब हमें पूरी तरह जानता है और उसकी दया असीम है, तो हम उसकी ओर रुजू करते हैं, उससे अपनी ज़रूरतें माँगते हैं और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होते।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की पहचान ही असली इल्म है। जिसने अल्लाह को उसके नामों और गुणों के साथ पहचान लिया, उसने सबसे बड़ी सच्चाई को पा लिया। यह पहचान हमें जीवन में सीधे रास्ते पर चलने की ताकत देती है, क्योंकि हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर अच्छाई और बुराई को देख रहा है, और उसकी दया हमें हर मुश्किल में सहारा देती है।



📜 आयत 20-24 — सूरा अल-हश्र

20لَا يَسْتَوِي أَصْحَابُ النَّارِ وَأَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۚ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ هُمُ الْفَائِزُونَ
जहन्नुमी और जन्नती किसी तरह बराबर नहीं हो सकते जन्नती लोग ही तो कामयाबी हासिल करने वाले हैं
21لَوْ أَنزَلْنَا هَٰذَا الْقُرْآنَ عَلَىٰ جَبَلٍ لَّرَأَيْتَهُ خَاشِعًا مُّتَصَدِّعًا مِّنْ خَشْيَةِ اللَّهِ ۚ وَتِلْكَ الْأَمْثَالُ نَضْرِبُهَا لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
अगर हम इस क़ुरान को किसी पहाड़ पर (भी) नाज़िल करते तो तुम उसको देखते कि ख़ुदा के डर से झुका और फटा जाता है ये मिसालें हम लोगों (के समझाने) के लिए बयान करते हैं ताकि वह ग़ौर करें
22هُوَ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۖ هُوَ الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ
वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला वही बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
23هُوَ اللَّهُ الَّذِي لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْمَلِكُ الْقُدُّوسُ السَّلَامُ الْمُؤْمِنُ الْمُهَيْمِنُ الْعَزِيزُ الْجَبَّارُ الْمُتَكَبِّرُ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
वही वह ख़ुदा है जिसके सिवा कोई क़ाबिले इबादत नहीं (हक़ीक़ी) बादशाह, पाक ज़ात (हर ऐब से) बरी अमन देने वाला निगेहबान, ग़ालिब ज़बरदस्त बड़ाई वाला ये लोग जिसको (उसका) शरीक ठहराते हैं उससे पाक है
24هُوَ اللَّهُ الْخَالِقُ الْبَارِئُ الْمُصَوِّرُ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ ۚ يُسَبِّحُ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
वही ख़ुदा (तमाम चीज़ों का ख़ालिक) मुजिद सूरतों का बनाने वाला उसी के अच्छे अच्छे नाम हैं जो चीज़े सारे आसमान व ज़मीन में हैं सब उसी की तसबीह करती हैं, और वही ग़ालिब हिकमत वाला है
अल-हश्रकुरान सूची
24आयत
मदनीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अल-हश्र 22

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Monday, September 28, 2026

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