Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْغَيْبِ (अल-ग़ैब): वह सब कुछ जो इंद्रियों से छिपा हुआ हो, जिसे मनुष्य न देख सके और न जान सके।
- الشَّهَادَةِ (अश-शहादाह): वह सब कुछ जो दृश्यमान हो, जिसे मनुष्य देखता और जानता है।
- الرَّحْمَٰنُ (अर-रहमान): वह जिसकी रहमत (दया) असीम और व्यापक है, जो सभी प्राणियों को शामिल करती है।
- الرَّحِيمُ (अर-रहीम): वह जो विशेष रूप से अपने ईमानवाले बंदों पर दया करता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें अल्लाह की पहचान कराती है और उसके सबसे सुंदर नामों और गुणों से परिचित कराती है। अल्लाह ही वह सच्चा माबूद (पूज्य) है, जिसके अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं। वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं। वह عالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ है—यानी वह हर उस चीज़ को जानता है जो हमारी आँखों से छिपी है, चाहे वह आकाशों की ऊँचाइयों में हो या धरती की गहराइयों में, और वह हर उस चीज़ को भी जानता है जो हमारे सामने प्रकट है। उसके ज्ञान से कुछ भी छिपा नहीं है—न हमारे दिलों के राज़, न हमारे विचार, न हमारे कर्म। यह हमारे लिए एक बड़ी शक्ति और सांत्वना है कि हमारा रब हमारी हर स्थिति से अवगत है।
फिर अल्लाह अपने दो सबसे प्यारे नामों का ज़िक्र करता है: الرَّحْمَٰنُ الرَّحِيمُ। वह रहमान है—उसकी दया इस दुनिया में सभी प्राणियों पर छाई हुई है, चाहे वे ईमानवाले हों या न हों। वह हर किसी को रिज़्क़ देता है, हर किसी पर दया करता है। और वह रहीम है—वह अपने ईमानवाले बंदों पर विशेष दया करता है, उन्हें आख़िरत में अपनी जन्नत से नवाज़ता है और उनके गुनाहों को माफ़ करता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जिस रब की हम इबादत करते हैं, वह न केवल सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है, बल्कि असीम दया और करुणा का मालिक भी है। यह हमारे दिलों में अल्लाह के प्रति प्रेम, आशा और भरोसा पैदा करती है। जब हम जानते हैं कि हमारा रब हमें पूरी तरह जानता है और उसकी दया असीम है, तो हम उसकी ओर रुजू करते हैं, उससे अपनी ज़रूरतें माँगते हैं और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होते।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की पहचान ही असली इल्म है। जिसने अल्लाह को उसके नामों और गुणों के साथ पहचान लिया, उसने सबसे बड़ी सच्चाई को पा लिया। यह पहचान हमें जीवन में सीधे रास्ते पर चलने की ताकत देती है, क्योंकि हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर अच्छाई और बुराई को देख रहा है, और उसकी दया हमें हर मुश्किल में सहारा देती है।
📜 आयत 20-24 — सूरा अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 22
सूरा अल-हश्र आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, पोशीदा और…सूरा आयत 22/24 — सूरा अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हश्र सुनें, सूरा अल-हश्र अनुवाद, सूरा अल-हश्र mp3, सूरा अल-हश्र pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
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Monday, September 28, 2026
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