अल-हश्र · 5/24
अनुवाद उच्चारण — अल-हश्र
مَا قَطَعْتُم مِّن لِّينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَائِمَةً عَلَىٰ أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ اللَّهِ وَلِيُخْزِيَ الْفَاسِقِينَ ۝٥
Maa qata`tum mil leenatin aw taraktumoohaa qaaa`imatan`alaaa usoolihaa fabi iznil laahi wa liyukhziyal faasiqeen
📖 हिंदी अर्थ
(मोमिनों) खजूर का दरख्त जो तुमने काट डाला या जूँ का तँ से उनकी जड़ों पर खड़ा रहने दिया तो ख़ुदा ही के हुक्म से और मतलब ये था कि वह नाफरमानों को रूसवा करे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • लीनह (لينة): उत्तम प्रकार की खजूर की नर या मादा पेड़, यहाँ विशेष रूप से खजूर का पेड़ मुराद है।
  • अस्ल (أصول): जड़ें, तना, वह आधार जिस पर पेड़ खड़ा रहता है।
  • फ़ासिक़ीन (الفاسقين): आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, अवज्ञाकारी, जो अल्लाह के हुक्म से बाहर निकल जाएं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! जब तुमने बनी नज़ीर (यहूदी क़बीले) के साथ मुठभेड़ की, तो अल्लाह के हुक्म से तुमने उनके बाग़ों में से कुछ खजूर के पेड़ काट डाले, और कुछ को उनकी जड़ों पर खड़ा छोड़ दिया — ताकि उनका मनोबल टूटे और वे समझें कि उनका ठिकाना समाप्त हो गया। यह कार्य तुम्हारी अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि अल्लाह की इजाज़त और उसकी मंशा से हुआ। अल्लाह ने यह इसलिए किया कि उन अवज्ञाकारियों को रुसवा करे, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) से किया हुआ वादा तोड़ दिया, और विश्वासघात का रास्ता अपनाया।

कुछ मुसलमानों के दिलों में यह ख्याल आया कि क्या पेड़ काटना ज़मीन में फ़साद फैलाना नहीं है? तो अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि यह फ़साद नहीं, बल्कि उसकी आज्ञा का पालन है। जब अल्लाह का हुक्म हो, तो उसमें भलाई ही भलाई है — चाहे वह पेड़ काटना हो या छोड़ना। यह कार्य अल्लाह की इजाज़त से था, और इसका उद्देश्य था कि अल्लाह अपने दुश्मनों को ज़लील करे और ईमानवालों को उन पर ग़लबा (विजय) दे।

इस घटना में हमारे लिए बड़ी सीख है कि अल्लाह की राह में किया गया हर काम — चाहे वह जंग का सामान हो या दुश्मन की ताकत को कमज़ोर करना — अल्लाह की मर्ज़ी के बिना नहीं होता। और जब अल्लाह की मर्ज़ी होती है, तो उसमें बरकत और हिकमत (समझदारी) छिपी होती है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके हुक्म के आगे सिर झुकाएं। जब अल्लाह किसी काम का आदेश देता है, तो उसमें दुनिया और आख़िरत की भलाई होती है, भले ही हमारी अक़्ल उसे न समझ पाए। यह भी याद रखें कि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें दुश्मनों पर फ़तह देता है — बशर्ते वे सब्र करें और उसकी आज्ञा का पालन करें। आज भी जो लोग अल्लाह की राह में क़ुर्बानी देते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है और उनके दुश्मनों को रुसवा करता है।



📜 आयत 3-7 — अल-हश्र

3وَلَوْلَا أَن كَتَبَ اللَّهُ عَلَيْهِمُ الْجَلَاءَ لَعَذَّبَهُمْ فِي الدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابُ النَّارِ
और ख़ुदा ने उनकी किसमत में ज़िला वतनी न लिखा होता तो उन पर दुनिया में भी (दूसरी तरह) अज़ाब करता और आख़ेरत में तो उन पर जहन्नुम का अज़ाब है ही
4ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۖ وَمَن يُشَاقِّ اللَّهَ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त की और जिसने ख़ुदा की मुख़ालेफ़त की तो (याद रहे कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब देने वाला है
5مَا قَطَعْتُم مِّن لِّينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَائِمَةً عَلَىٰ أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ اللَّهِ وَلِيُخْزِيَ الْفَاسِقِينَ
(मोमिनों) खजूर का दरख्त जो तुमने काट डाला या जूँ का तँ से उनकी जड़ों पर खड़ा रहने दिया तो ख़ुदा ही के हुक्म से और मतलब ये था कि वह नाफरमानों को रूसवा करे
6وَمَا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ مِنْهُمْ فَمَا أَوْجَفْتُمْ عَلَيْهِ مِنْ خَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُسَلِّطُ رُسُلَهُ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(तो) जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को उन लोगों से बे लड़े दिलवा दिया उसमें तुम्हार हक़ नहीं क्योंकि तुमने उसके लिए कुछ दौड़ धूप तो की ही नहीं, न घोड़ों से न ऊँटों से, मगर ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जिस पर चाहता है ग़लबा अता फरमाता है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
7مَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ مِنْ أَهْلِ الْقُرَىٰ فَلِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَابْنِ السَّبِيلِ كَيْ لَا يَكُونَ دُولَةً بَيْنَ الْأَغْنِيَاءِ مِنكُمْ ۚ وَمَا آتَاكُمُ الرَّسُولُ فَخُذُوهُ وَمَا نَهَاكُمْ عَنْهُ فَانتَهُوا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
तो जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को देहात वालों से बे लड़े दिलवाया है वह ख़ास ख़ुदा और उसके रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और परदेसियों का है ताकि जो लोग तुममें से दौलतमन्द हैं हिर फिर कर दौलत उन्हीं में न रहे, हाँ जो तुमको रसूल दें दें वह ले लिया करो और जिससे मना करें उससे बाज़ रहो और ख़ुदा से डरते रहो बेशक ख़ुदा सख्त अज़ाब देने वाला है
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अनुवाद — अल-हश्र 5

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Tuesday, August 18, 2026

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