अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- شَاقُّوا (शाक्कू): अर्थात उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की खिलाफ़त की, उनका विरोध किया और उनके आदेशों के खिलाफ जाने में हद से गुज़र गए। यह शब्द "शिक़ाक़" से लिया गया है, जिसका अर्थ है दो पक्षों का एक-दूसरे के विपरीत हो जाना।
- شَدِيدُ الْعِقَابِ (शदीदुल इक़ाब): अत्यंत कठोर दंड देने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन यहूदियों के हालात का ज़िक्र कर रही है, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का विरोध किया और उनके खिलाफ साज़िशें रचीं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह सज़ा और अज़ाब जो उन्हें दुनिया में मिला (जैसे बनी नज़ीर का निष्कासन और उनकी बस्तियों का विनाश) और आख़िरत में जो उनके लिए तैयार है, यह सब इसलिए है क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा की, उनके आदेशों को ठुकराया और उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने अल्लाह के दीन से दुश्मनी की और अपने वादों व अहदों को तोड़ा।
फिर अल्लाह तआला एक सामान्य नियम बयान करता है: "और जो कोई अल्लाह की खिलाफ़त करे, तो अल्लाह सख्त सज़ा देने वाला है।" यानी यह सिर्फ़ उन यहूदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि जो कोई भी अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करेगा, उसके लिए अल्लाह का अज़ाब तैयार है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका दंड किसी भी हाल में टलने वाला नहीं।
दावती पहलू (प्रचारात्मक दृष्टिकोण):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा का पालन करना ही सफलता का मार्ग है। जो लोग अल्लाह के दीन से दुश्मनी करते हैं, वे चाहे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह की सज़ा से नहीं बच सकते। इतिहास गवाह है कि जिन क़ौमों ने अल्लाह के नबियों का विरोध किया, उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ। आज भी जो लोग इस्लाम के खिलाफ साज़िशें रचते हैं, वे अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।
अल्लाह तआला हमें इस आयत के ज़रिए बताते हैं कि उसकी राह पर चलना ही हमारी भलाई है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के साथ हैं, उन्हें कभी डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि अल्लाह उनका हिमायती है। और जो लोग अल्लाह की खिलाफ़त करते हैं, उनका अंजाम तबाही और बर्बादी है। यह आयत हमें दावत देती है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के आदेशों के अनुसार ढालें, उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, और उन लोगों के नक्शे-क़दम पर न चलें जिन्होंने अल्लाह से दुश्मनी की और आख़िरकार रुसवा हुए। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो उससे मुंह मोड़ते हैं।
📜 आयत 2-6 — अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 4
सूरा अल-हश्र आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल…सूरा आयत 4/24 — अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हश्र सुनें, अल-हश्र अनुवाद, अल-हश्र mp3, अल-हश्र pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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