अल-हश्र · 4/24
अनुवाद उच्चारण — अल-हश्र
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۖ وَمَن يُشَاقِّ اللَّهَ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ ۝٤
Zaalika bi annahum shaaqqul laaha wa Rasoolahoo wa many yushaaaqqil laaha fa innal laaha shadeedul-`iqaab
📖 हिंदी अर्थ
ये इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त की और जिसने ख़ुदा की मुख़ालेफ़त की तो (याद रहे कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब देने वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَاقُّوا (शाक्कू): अर्थात उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की खिलाफ़त की, उनका विरोध किया और उनके आदेशों के खिलाफ जाने में हद से गुज़र गए। यह शब्द "शिक़ाक़" से लिया गया है, जिसका अर्थ है दो पक्षों का एक-दूसरे के विपरीत हो जाना।
  • شَدِيدُ الْعِقَابِ (शदीदुल इक़ाब): अत्यंत कठोर दंड देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन यहूदियों के हालात का ज़िक्र कर रही है, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का विरोध किया और उनके खिलाफ साज़िशें रचीं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह सज़ा और अज़ाब जो उन्हें दुनिया में मिला (जैसे बनी नज़ीर का निष्कासन और उनकी बस्तियों का विनाश) और आख़िरत में जो उनके लिए तैयार है, यह सब इसलिए है क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा की, उनके आदेशों को ठुकराया और उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने अल्लाह के दीन से दुश्मनी की और अपने वादों व अहदों को तोड़ा।

फिर अल्लाह तआला एक सामान्य नियम बयान करता है: "और जो कोई अल्लाह की खिलाफ़त करे, तो अल्लाह सख्त सज़ा देने वाला है।" यानी यह सिर्फ़ उन यहूदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि जो कोई भी अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करेगा, उसके लिए अल्लाह का अज़ाब तैयार है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका दंड किसी भी हाल में टलने वाला नहीं।

दावती पहलू (प्रचारात्मक दृष्टिकोण):

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा का पालन करना ही सफलता का मार्ग है। जो लोग अल्लाह के दीन से दुश्मनी करते हैं, वे चाहे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह की सज़ा से नहीं बच सकते। इतिहास गवाह है कि जिन क़ौमों ने अल्लाह के नबियों का विरोध किया, उनका अंजाम बहुत बुरा हुआ। आज भी जो लोग इस्लाम के खिलाफ साज़िशें रचते हैं, वे अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।

अल्लाह तआला हमें इस आयत के ज़रिए बताते हैं कि उसकी राह पर चलना ही हमारी भलाई है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के साथ हैं, उन्हें कभी डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि अल्लाह उनका हिमायती है। और जो लोग अल्लाह की खिलाफ़त करते हैं, उनका अंजाम तबाही और बर्बादी है। यह आयत हमें दावत देती है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के आदेशों के अनुसार ढालें, उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, और उन लोगों के नक्शे-क़दम पर न चलें जिन्होंने अल्लाह से दुश्मनी की और आख़िरकार रुसवा हुए। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो उससे मुंह मोड़ते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — अल-हश्र

2هُوَ الَّذِي أَخْرَجَ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن دِيَارِهِمْ لِأَوَّلِ الْحَشْرِ ۚ مَا ظَنَنتُمْ أَن يَخْرُجُوا ۖ وَظَنُّوا أَنَّهُم مَّانِعَتُهُمْ حُصُونُهُم مِّنَ اللَّهِ فَأَتَاهُمُ اللَّهُ مِنْ حَيْثُ لَمْ يَحْتَسِبُوا ۖ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ ۚ يُخْرِبُونَ بُيُوتَهُم بِأَيْدِيهِمْ وَأَيْدِي الْمُؤْمِنِينَ فَاعْتَبِرُوا يَا أُولِي الْأَبْصَارِ
वही तो है जिसने कुफ्फ़ार अहले किताब (बनी नुजैर) को पहले हश्र (ज़िलाए वतन) में उनके घरों से निकाल बाहर किया (मुसलमानों) तुमको तो ये वहम भी न था कि वह निकल जाएँगे और वह लोग ये समझे हुये थे कि उनके क़िले उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से बचा लेंगे मगर जहाँ से उनको ख्याल भी न था ख़ुदा ने उनको आ लिया और उनके दिलों में (मुसलमानों) को रौब डाल दिया कि वह लोग ख़ुद अपने हाथों से और मोमिनीन के हाथों से अपने घरों को उजाड़ने लगे तो ऐ ऑंख वालों इबरत हासिल करो
3وَلَوْلَا أَن كَتَبَ اللَّهُ عَلَيْهِمُ الْجَلَاءَ لَعَذَّبَهُمْ فِي الدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابُ النَّارِ
और ख़ुदा ने उनकी किसमत में ज़िला वतनी न लिखा होता तो उन पर दुनिया में भी (दूसरी तरह) अज़ाब करता और आख़ेरत में तो उन पर जहन्नुम का अज़ाब है ही
4ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۖ وَمَن يُشَاقِّ اللَّهَ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त की और जिसने ख़ुदा की मुख़ालेफ़त की तो (याद रहे कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब देने वाला है
5مَا قَطَعْتُم مِّن لِّينَةٍ أَوْ تَرَكْتُمُوهَا قَائِمَةً عَلَىٰ أُصُولِهَا فَبِإِذْنِ اللَّهِ وَلِيُخْزِيَ الْفَاسِقِينَ
(मोमिनों) खजूर का दरख्त जो तुमने काट डाला या जूँ का तँ से उनकी जड़ों पर खड़ा रहने दिया तो ख़ुदा ही के हुक्म से और मतलब ये था कि वह नाफरमानों को रूसवा करे
6وَمَا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِ مِنْهُمْ فَمَا أَوْجَفْتُمْ عَلَيْهِ مِنْ خَيْلٍ وَلَا رِكَابٍ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُسَلِّطُ رُسُلَهُ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(तो) जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को उन लोगों से बे लड़े दिलवा दिया उसमें तुम्हार हक़ नहीं क्योंकि तुमने उसके लिए कुछ दौड़ धूप तो की ही नहीं, न घोड़ों से न ऊँटों से, मगर ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जिस पर चाहता है ग़लबा अता फरमाता है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
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Tuesday, August 18, 2026

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