अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَعِبٌ (ल'अबुन): खेल-कूद, वह चीज़ जिसमें कोई गंभीरता और स्थिरता न हो।
- لَهْوٌ (लह्वुन): मनोरंजन, वह चीज़ जो इंसान को खुद में मशगूल कर ले और आख़िरत से ग़ाफ़िल कर दे।
- الدَّارُ الْآخِرَةُ (अद-दारुल आख़िरा): आख़िरत का घर, यानी क़यामत के बाद का स्थायी जीवन।
- يَتَّقُونَ (यत्तक़ून): तक़वा अपनाने वाले, यानी अल्लाह के अज़ाब से बचने के लिए उसके हुक्मों की पालना करने वाले और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में दुनिया की हक़ीक़त बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि यह दुनिया की ज़िंदगी, अपनी पूरी शान-ओ-शौकत, माल-ओ-दौलत, ऐश-ओ-आराम और रंग-रलियों के साथ, आख़िरकार एक खेल और मनोरंजन के सिवा कुछ नहीं है। जिस तरह बच्चे खेल में मशगूल होते हैं और उसे ही सब कुछ समझते हैं, लेकिन वह खेल कुछ देर बाद ख़त्म हो जाता है और कुछ भी हाथ नहीं आता, ठीक उसी तरह दुनिया की ज़िंदगी भी एक अस्थायी खेल है। जो लोग सिर्फ़ इसी दुनिया में खोए रहते हैं, वह उस खेल में मशगूल बच्चों की तरह हैं, जो आख़िरकार खाली हाथ रह जाते हैं।
लेकिन इसके मुक़ाबले में आख़िरत का घर — यानी जन्नत — उन लोगों के लिए कहीं बेहतर और बेहतरीन है जो तक़वा अपनाते हैं। तक़वा यानी अल्लाह का डर दिल में रखना, उसके हुक्मों पर अमल करना, और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचना। यही लोग हैं जो दुनिया को आख़िरत पर तरजीह नहीं देते, बल्कि इस फ़ानी ज़िंदगी को आख़िरत की हमेशा रहने वाली ज़िंदगी के लिए खेती बनाते हैं। उनके लिए आख़िरत का सुख-चैन, उसकी नेअमतें और अल्लाह की रज़ा — यह सब कुछ दुनिया की किसी भी चीज़ से बेहतर है।
अल्लाह तआला आख़िर में फ़रमाते हैं: "क्या तुम अक़्ल नहीं रखते?" यानी ऐ मुशरिकों! जो लोग दुनिया की चमक-दमक में धोखा खा गए हैं, क्या तुम इतना भी नहीं समझते कि जो चीज़ हमेशा रहने वाली है वह उस चीज़ से बेहतर है जो कुछ दिनों में ख़त्म हो जाने वाली है? क्या तुम्हारी अक़्ल तुम्हें यह नहीं सिखाती कि फ़ानी (नाशवान) चीज़ को बाक़ी (स्थायी) चीज़ पर तरजीह देना बेवक़ूफ़ी है?
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें ज़िंदगी का असली मक़सद समझाती है। दुनिया की मोहब्बत और उसके झूठे खेल में मशगूल होकर हम उस आख़िरत को न भूलें जो हमेशा रहने वाली है। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम सही और ग़लत में फ़र्क़ कर सकें। आओ, हम अपनी अक़्ल का इस्तेमाल करें, दुनिया को आख़िरत का ज़रिया बनाएँ न कि मक़सद। जो चीज़ हमेशा रहने वाली है — यानी जन्नत — उसे हासिल करने की कोशिश करें, और उस खेल में न खोएँ जो एक पल में ख़त्म हो जाने वाला है। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए और हमें तक़वा अपनाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 30-34 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 32
सूरा अल-अनआम आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ये) दुनियावी ज़िन्दगी तो खेल तमाशे के सिवा कुछ…सूरा आयत 32/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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