अल-हाक़्का · 22/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ ۝٢٢
Fee jannnatin `aaliyah
📖 हिंदी अर्थ
बड़े आलीशान बाग़ में

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَّةٍ: बाग़, स्वर्ग का उद्यान
  • عَالِيَةٍ: ऊँची, बुलंद, उच्च स्थान और दर्जे वाली

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस ख़ुशनसीब इंसान के अंजाम का ज़िक्र कर रही है जिसे उसका आमालनामा दाहिने हाथ में दिया जाएगा। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह तआला ने जो इनाम तैयार किया है, उसका एक हिस्सा यह है कि वे "ऊँची जन्नत" में होंगे।

यह जन्नत सिर्फ़ ऊँचाई में ही बुलंद नहीं होगी, बल्कि दर्जे, शान, और मरतबे में भी अत्यंत उच्च होगी। इसका मक़ाम इतना रिफ़अत वाला होगा कि उसकी कोई मिसाल इस दुनिया में नहीं। यह वह जगह है जहाँ हर दर्द, हर ग़म, हर थकान और हर कमी से पाक और मुकम्मल ज़िंदगी होगी।

इस जन्नत की ऊँचाई का मतलब यह भी है कि वहाँ के मक़ामात बहुत बुलंद हैं, और उसके फल और मेवे इतने क़रीब होंगे कि बैठा हुआ, लेटा हुआ या खड़ा हुआ — हर हालत में इंसान आसानी से उन्हें तोड़ सकेगा। वहाँ की हवा, पानी, साये, महल, और हर चीज़ ऐसी होगी जो आँखों को ठंडक और दिल को सुकून देने वाली होगी।

यह वही जन्नत है जिसका वादा अल्लाह ने अपने नेक बंदों से किया है — जिन्होंने दुनिया में ईमान के साथ नेक अमल किए, जिन्होंने यक़ीन किया कि उन्हें अपने रब के सामने हाज़िर होना है और उन्होंने उसी हिसाब से अपनी ज़िंदगी गुज़ारी। उन्हीं के लिए यह ऊँची जन्नत है।

दावती पहलू:

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए जो इनाम बयान किया है, वह हमारे लिए एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी और उम्मीद की किरण है। यह हमें बताती है कि दुनिया की मुश्किलें, मेहनत, और अल्लाह की राह में की जाने वाली कुर्बानियाँ कभी राईगाँ नहीं जातीं। अल्लाह के पास उनका अज्र महफ़ूज़ है — और वह अज्र इतना बड़ा है कि उसे बयान करना मुश्किल है।

तो आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें, अपने ईमान को मज़बूत करें, नेक अमल करें, और उस ऊँची जन्नत के हक़दार बनने की कोशिश करें — जहाँ हर दुख का अंत, और हर ख़ुशी का आग़ाज़ होगा। यही असली कामयाबी है, और यही वह मंज़िल है जिसके लिए हमें दुनिया में जीना और मरना है। अल्लाह हम सबको इस ऊँची जन्नत का हक़दार बनाए। आमीन।



📜 आयत 20-24 — सूरा अल-हाक़्का

20إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَاقٍ حِسَابِيَهْ
तो मैं तो जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब) ज़रूर मिलेगा
21فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ
फिर वह दिल पसन्द ऐश में होगा
22فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
बड़े आलीशान बाग़ में
23قُطُوفُهَا دَانِيَةٌ
जिनके फल बहुत झुके हुए क़रीब होंगे
24كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ
जो कारगुज़ारियाँ तुम गुज़िशता अय्याम में करके आगे भेज चुके हो उसके सिले में मज़े से खाओ पियो
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 22

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Wednesday, September 30, 2026

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