अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَسَبِّحْ: पवित्रता की घोषणा करो, हर दोष से पाक बताओ।
- بِاسْمِ رَبِّكَ: अपने पालनहार के नाम का स्मरण करो।
- الْعَظِيمِ: जो महान है, जिसकी महिमा का कोई अंत नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! जब तुम यह देखते हो कि कितने लोग इस स्पष्ट क़ुरआन को झुठला रहे हैं, और यह जानते हो कि यह झुठलाना उनके लिए पछतावे और विनाश का कारण बनेगा, तो तुम्हारा कर्तव्य यह है कि तुम अपने महान पालनहार की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करो। उसे हर उस चीज़ से पाक बताओ जो उसके शान के ख़िलाफ़ है — न तो उसकी कोई संतान है, न वह किसी का मोहताज है, न उसके काम में कोई कमी है। उसके नाम का स्मरण करो, जो सबसे बड़ा, सबसे ऊँचा और सबसे पवित्र है। यह तस्बीह तुम्हारे दिल को सुकून देती है, तुम्हारे ईमान को मज़बूत करती है, और तुम्हें याद दिलाती है कि इस दुनिया की हर चीज़ फ़ानी है, लेकिन तुम्हारा रब हमेशा रहने वाला, सबसे महान और सबसे शक्तिशाली है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी हमें किसी बुराई, झुठलाने या मुश्किल का सामना करना पड़े, तो हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपने रब की तस्बीह करनी चाहिए। यह तस्बीह हमारे दिलों को साफ़ करती है, हमारे यक़ीन को बढ़ाती है, और हमें उस रास्ते पर चलने की ताक़त देती है जो हमारे रब को पसंद है। याद रखो, जो लोग इस क़ुरआन को झुठलाते हैं, वे आख़िरत में अपनी ग़लती का अफ़सोस करेंगे, लेकिन जो लोग इस पर ईमान लाते हैं और अपने रब की तस्बीह करते हैं, वे उस दिन सबसे ज़्यादा खुश और कामयाब होंगे। इसलिए, अपनी ज़ुबान को हमेशा अपने महान रब के ज़िक्र से तर रखो, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 50-52 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 52
सूरा अल-हाक़्का आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम अपने परवरदिगार की तसबीह करोसूरा आयत 52/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 50–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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