Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अत-तूफ़ान: विनाशकारी बाढ़ या सैलाब जो फसलों और बस्तियों को तबाह कर दे।
- अल-जराद: टिड्डियाँ जो खेतों और फसलों को चट कर जाती हैं।
- अल-क़ुम्मल: छोटे कीड़े (जैसे जूँ या घुन) जो फसलों और इंसानों को नुकसान पहुँचाते हैं।
- अद-दम: खून, जो पानी में मिलकर उसे अशुद्ध कर देता है।
- आयातिन मुफ़स्सलात: अलग-अलग और स्पष्ट निशानियाँ जो एक के बाद एक लगातार आईं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर उनके ज़ुल्म और हक़ को झुठलाने की सज़ा में एक के बाद एक कई स्पष्ट निशानियाँ भेजीं। पहले उन पर विनाशकारी बाढ़ (तूफ़ान) भेजी गई जिसने उनके खेतों, बागों और फ़सलों को डुबो दिया और उनकी बस्तियों को तबाह कर दिया। फिर टिड्डियों का हमला हुआ जिसने उनकी बची-खुची फ़सलों, पेड़ों, यहाँ तक कि उनके घरों के दरवाज़ों और छतों तक को चट कर गया। इसके बाद छोटे कीड़े (क़ुम्मल) भेजे गए जो फ़सलों को खराब करते और उनके शरीर और कपड़ों को नुकसान पहुँचाते थे। फिर मेंढकों का हमला हुआ जिन्होंने उनके घरों, बर्तनों, खाने-पीने की चीज़ों और सोने की जगहों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया, जिससे उनकी ज़िंदगी दुश्वार हो गई। आख़िरकार उनके तालाबों, कुओं और नदियों का पानी खून में बदल दिया गया, यहाँ तक कि उन्हें पीने के लिए एक बूँद साफ़ पानी भी नसीब नहीं हुआ।
ये सारी निशानियाँ अल्लाह की क़ुदरत के स्पष्ट प्रमाण थीं, जो एक के बाद एक लगातार आईं ताकि वे अपनी ग़लती समझें और ईमान लाएँ। लेकिन इन सबके बावजूद फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने घमंड और अकड़ से काम लिया, हक़ को क़बूल करने से इनकार किया और अपने ज़ुल्म और गुनाहों पर अड़े रहे। वे ऐसे लोग थे जो अल्लाह की नाफ़रमानी और बुराई में डूबे हुए थे, और हर निशानी के बाद भी अपनी सरकशी और ज़िद पर क़ायम रहे।
दावती पहलू:
यह क़िस्सा हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि अल्लाह की निशानियाँ और चेतावनियाँ कभी बेकार नहीं जातीं। जब इंसान हक़ को देखकर भी उससे मुँह मोड़ता है और घमंड करता है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त होती है। हमें चाहिए कि अल्लाह की हर निशानी और हर चेतावनी से सबक़ लें, अपने गुनाहों से तौबा करें और उसकी रहमत की तरफ़ लौटें। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ आएँ, लेकिन अगर हम अकड़ और ज़िद पर अड़े रहें, तो उसकी पकड़ से बचना मुश्किल है। याद रखें, अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी तरफ़ झुकते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो हक़ से मुँह मोड़ते हैं। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें और उसके दीन पर चलने की कोशिश करें।
📜 आयत 131-135 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 133
सूरा अल-आराफ आयत 133 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और…सूरा आयत 133/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 131–135. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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