अल-आराफ · 133/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الطُّوفَانَ وَالْجَرَادَ وَالْقُمَّلَ وَالضَّفَادِعَ وَالدَّمَ آيَاتٍ مُّفَصَّلَاتٍ فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُّجْرِمِينَ ۝١٣٣
Fa arsalnaa `alaihimut toofaana waljaraada walqum mala waddafaadi`a waddama Aayaatim mufassalaatin fastakbaroo wa kaanoo qawmam mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और जुएं और मेंढ़कों और खून (का अज़ाब भेजा कि सब जुदा जुदा (हमारी कुदरत की) निशानियाँ थी उस पर भी वह लोग तकब्बुर ही करते रहें और वह लोग गुनेहगार तो थे ही

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अत-तूफ़ान: विनाशकारी बाढ़ या सैलाब जो फसलों और बस्तियों को तबाह कर दे।
  • अल-जराद: टिड्डियाँ जो खेतों और फसलों को चट कर जाती हैं।
  • अल-क़ुम्मल: छोटे कीड़े (जैसे जूँ या घुन) जो फसलों और इंसानों को नुकसान पहुँचाते हैं।
  • अद-दम: खून, जो पानी में मिलकर उसे अशुद्ध कर देता है।
  • आयातिन मुफ़स्सलात: अलग-अलग और स्पष्ट निशानियाँ जो एक के बाद एक लगातार आईं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर उनके ज़ुल्म और हक़ को झुठलाने की सज़ा में एक के बाद एक कई स्पष्ट निशानियाँ भेजीं। पहले उन पर विनाशकारी बाढ़ (तूफ़ान) भेजी गई जिसने उनके खेतों, बागों और फ़सलों को डुबो दिया और उनकी बस्तियों को तबाह कर दिया। फिर टिड्डियों का हमला हुआ जिसने उनकी बची-खुची फ़सलों, पेड़ों, यहाँ तक कि उनके घरों के दरवाज़ों और छतों तक को चट कर गया। इसके बाद छोटे कीड़े (क़ुम्मल) भेजे गए जो फ़सलों को खराब करते और उनके शरीर और कपड़ों को नुकसान पहुँचाते थे। फिर मेंढकों का हमला हुआ जिन्होंने उनके घरों, बर्तनों, खाने-पीने की चीज़ों और सोने की जगहों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया, जिससे उनकी ज़िंदगी दुश्वार हो गई। आख़िरकार उनके तालाबों, कुओं और नदियों का पानी खून में बदल दिया गया, यहाँ तक कि उन्हें पीने के लिए एक बूँद साफ़ पानी भी नसीब नहीं हुआ।

ये सारी निशानियाँ अल्लाह की क़ुदरत के स्पष्ट प्रमाण थीं, जो एक के बाद एक लगातार आईं ताकि वे अपनी ग़लती समझें और ईमान लाएँ। लेकिन इन सबके बावजूद फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने घमंड और अकड़ से काम लिया, हक़ को क़बूल करने से इनकार किया और अपने ज़ुल्म और गुनाहों पर अड़े रहे। वे ऐसे लोग थे जो अल्लाह की नाफ़रमानी और बुराई में डूबे हुए थे, और हर निशानी के बाद भी अपनी सरकशी और ज़िद पर क़ायम रहे।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि अल्लाह की निशानियाँ और चेतावनियाँ कभी बेकार नहीं जातीं। जब इंसान हक़ को देखकर भी उससे मुँह मोड़ता है और घमंड करता है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त होती है। हमें चाहिए कि अल्लाह की हर निशानी और हर चेतावनी से सबक़ लें, अपने गुनाहों से तौबा करें और उसकी रहमत की तरफ़ लौटें। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ आएँ, लेकिन अगर हम अकड़ और ज़िद पर अड़े रहें, तो उसकी पकड़ से बचना मुश्किल है। याद रखें, अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी तरफ़ झुकते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो हक़ से मुँह मोड़ते हैं। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें और उसके दीन पर चलने की कोशिश करें।



📜 आयत 131-135 — अल-आराफ

131فَإِذَا جَاءَتْهُمُ الْحَسَنَةُ قَالُوا لَنَا هَٰذِهِ ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ يَطَّيَّرُوا بِمُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ ۗ أَلَا إِنَّمَا طَائِرُهُمْ عِندَ اللَّهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
तो जब उन्हें कोई राहत मिलती तो कहने लगते कि ये तो हमारे लिए सज़ावार ही है और जब उन्हें कोई मुसीबत पहुँचती तो मूसा और उनके साथियों की बदशुगूनी समझते देखो उनकी बदशुगूनी तो ख़ुदा के हा (लिखी जा चुकी) थी मगर बहुतेरे लोग नही जानते हैं
132وَقَالُوا مَهْمَا تَأْتِنَا بِهِ مِنْ آيَةٍ لِّتَسْحَرَنَا بِهَا فَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ
और फिरऔन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निशानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें
133فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الطُّوفَانَ وَالْجَرَادَ وَالْقُمَّلَ وَالضَّفَادِعَ وَالدَّمَ آيَاتٍ مُّفَصَّلَاتٍ فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُّجْرِمِينَ
तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और जुएं और मेंढ़कों और खून (का अज़ाब भेजा कि सब जुदा जुदा (हमारी कुदरत की) निशानियाँ थी उस पर भी वह लोग तकब्बुर ही करते रहें और वह लोग गुनेहगार तो थे ही
134وَلَمَّا وَقَعَ عَلَيْهِمُ الرِّجْزُ قَالُوا يَا مُوسَى ادْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ ۖ لَئِن كَشَفْتَ عَنَّا الرِّجْزَ لَنُؤْمِنَنَّ لَكَ وَلَنُرْسِلَنَّ مَعَكَ بَنِي إِسْرَائِيلَ
(और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते कि ऐ मूसा तुम से जो ख़ुदा ने (क़बूल दुआ का) अहद किया है उसी की उम्मीद पर अपने ख़ुदा से दुआ माँगों और अगर तुमने हम से अज़ाब को टाल दिया तो हम ज़रूर भेज देगें
135فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ الرِّجْزَ إِلَىٰ أَجَلٍ هُم بَالِغُوهُ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَ
फिर जब हम उनसे उस वक्त क़े वास्ते जिस तक वह ज़रूर पहुँचते अज़ाब को हटा लेते तो फिर फौरन बद अहदी करने लगते
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अनुवाद — अल-आराफ 133

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Tuesday, August 18, 2026

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