Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَهْمَا: जो कुछ भी, कोई भी चीज़।
- آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण।
- لِتَسْحَرَنَا: ताकि तू हमें अपने जादू से बहका दे (यानी हमें हमारे धर्म से फेर दे)।
- بِمُؤْمِنِينَ: ईमान लाने वाले, तुझे सच्चा मानने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
फ़िरऔन की क़ौम (क़िब्ती लोग) ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) से हठधर्मी और सरकशी के साथ कहा: "तू चाहे जो भी निशानी या चमत्कार हमारे सामने लेकर आए, जिससे तू हमें हमारे दीन (फ़िरऔन की पूजा और उसकी बात मानने) से हटाना चाहता है, हम तो तुझ पर कभी ईमान नहीं लाएँगे और न ही तुझे सच्चा मानेंगे।" उन्होंने उसकी लाई हुई निशानियों को चमत्कार नहीं, बल्कि जादू कहकर उसका मज़ाक उड़ाया और पहले ही से ठान लिया कि वे किसी भी हालत में उसकी बात नहीं मानेंगे। यह उनका पूर्वाग्रह और सत्य के प्रति अंध विरोध था, क्योंकि वे जानते थे कि ये निशानियाँ सच्ची हैं, लेकिन अपनी बड़ाई और दुनियावी सुख-सुविधाओं के कारण उन्हें मानने से इनकार कर रहे थे।
फ़ायदे (सीख):
- सत्य को स्वीकार करने में सबसे बड़ी रुकावट अहंकार और हठधर्मिता है। जब इंसान पहले से ही ठान ले कि वह मानेगा नहीं, तो कोई भी चमत्कार या प्रमाण उसके दिल को नरम नहीं कर सकता।
- नबियों और सच्चे दावेदारों के साथ मज़ाक करना और उनकी निशानियों को जादू कहना, मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों की पुरानी आदत रही है। इससे हमें सीखना चाहिए कि हम सत्य के प्रति विनम्र रहें और उसे खुले दिल से स्वीकार करें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमारे पास सच्चाई हो, तो हमें उस पर डटे रहना चाहिए, भले ही लोग हमें ठुकराएँ या मज़ाक उड़ाएँ। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने इसके बावजूद अपना प्रचार जारी रखा और अंततः सत्य की जीत हुई।
- ईमान दिल की चीज़ है, जो अल्लाह की तौफ़ीक़ से आता है। जिसे अल्लाह ने हिदायत न दी, उसे दुनिया की तमाम निशानियाँ भी हिदायत नहीं दे सकतीं। इसलिए हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सत्य को स्वीकार करने की तौफ़ीक़ दे।
📜 आयत 130-134 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 132
सूरा अल-आराफ आयत 132 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिरऔन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे…सूरा आयत 132/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 130–134. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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