अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الرِّجْزُ (रिज़्ज़) — अज़ाब, यातना, या वह विपत्ति जो अल्लाह की ओर से सज़ा के तौर पर आती है। यहाँ इसका अर्थ वह विशेष यातना है जो फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर भेजी गई थी।
- بِمَا عَهِدَ عِندَكَ — उस वचन और प्रतिज्ञा के कारण जो अल्लाह ने आपसे की है, यानी नबुव्वत (पैग़म्बरी) का वादा।
- لَنُؤْمِنَنَّ لَكَ — हम आप पर अवश्य ईमान लाएँगे।
- وَلَنُرْسِلَنَّ مَعَكَ — हम अवश्य आपके साथ (बनी इस्राईल को) जाने देंगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह का अज़ाब फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर आ पड़ा — और यह अज़ाब अलग-अलग विपत्तियों की शक्ल में आया, जैसे तूफ़ान, टिड्डियाँ, जूँ, मेंढक और ख़ून — तो उनकी सारी सरकशी और घमंड धूल में मिल गया। जिस फ़िरऔन ने पहले मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और उन्हें जादूगर कहा, वही अब मजबूर होकर उनके पास दौड़ा आया। उन्होंने विनम्रता से कहा: "ऐ मूसा! अपने रब से हमारे लिए दुआ कीजिए, उस वचन के ज़रिए जो उसने आपसे किया है — यानी नबुव्वत और रिसालत का वादा — कि वह हमसे यह अज़ाब हटा ले। अगर आपने यह अज़ाब हमसे हटा दिया, तो हम आप पर अवश्य ईमान लाएँगे और बनी इस्राईल को आपके साथ जाने देंगे, उन्हें आज़ाद कर देंगे।"
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान जब मुसीबत में घिरता है, तो उसे अपने घमंड और अकड़ को छोड़कर अल्लाह की ओर रुजू करना चाहिए। फ़िरऔन जैसा ज़ालिम भी जब अज़ाब देखता है, तो उसकी ज़बान से निकलता है कि "ऐ मूसा! हमारे लिए दुआ कीजिए।" यह दिखाता है कि सच्चा सहारा केवल अल्लाह है, और उसके नबी ही सच्चे शफ़ी (सिफ़ारिश करने वाले) हैं।
लेकिन अफ़सोस! यह ईमान और वादा केवल मुसीबत के वक़्त तक सीमित था। जैसे ही अल्लाह उनसे अज़ाब हटाता, वे फिर से अपने वादे से मुकर जाते। यह हमारे लिए एक बड़ी सीख है — हमें केवल मुसीबत में ही नहीं, बल्कि हर हालत में अल्लाह को याद रखना चाहिए। जो इंसान सुख में अल्लाह को भूल जाता है, वह दुख में भी सिर्फ़ दुनियावी नजात चाहता है, न कि सच्ची हिदायत।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नबियों की दुआ बहुत असरदार होती है, और अल्लाह अपने नबियों की दुआ से अज़ाब को टाल सकता है। लेकिन अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यह है कि जो लोग हक़ को देखकर भी उसे न मानें, उन पर अंततः अज़ाब आकर रहता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह से सच्चे दिल से तौबा करें, और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 132-136 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 134
सूरा अल-आराफ आयत 134 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते…सूरा आयत 134/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 132–136. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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