नूह · 2/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ ۝٢
Qaala yaa qawmi innee lakum nazeerum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَذِيرٌ (नज़ीर) — डराने वाला, सचेत करने वाला।
  • مُبِينٌ (मुबीन) — स्पष्ट, खुला हुआ, जिसमें कोई अस्पष्टता न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सम्बोधित करते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।" यानी मैं कोई रहस्यमयी या अस्पष्ट बात नहीं कह रहा, बल्कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ और मेरा काम यह है कि तुम्हें उस अज़ाब से डराऊँ जो तुम्हारे सिर पर मंडरा रहा है, अगर तुम अपनी शिर्क और नाफ़रमानी से तौबा नहीं करोगे।

मेरी चेतावनी बिल्कुल साफ़ और स्पष्ट है — इसमें कोई धोखा नहीं, कोई मिलावट नहीं। मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि अल्लाह की इबादत करो, उसके साथ किसी को शरीक न करो, और मेरी बात मानो। अगर तुमने ऐसा किया तो अल्लाह तुम्हारे गुनाह माफ़ कर देगा और तुम्हें लंबी उम्र देगा। लेकिन अगर तुमने इनकार किया, तो तुम पर एक ऐसा अज़ाब आएगा जिसे कोई टाल नहीं सकता।

यह चेतावनी केवल डराने के लिए नहीं थी, बल्कि इसके पीछे अल्लाह की रहमत और मेहरबानी थी। अल्लाह तआला ने हर ज़माने में अपने नबियों को भेजा ताकि लोगों को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ लाएँ। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की यह पुकार सिर्फ उनकी क़ौम के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक सबक़ है जो अल्लाह के रसूलों की बातों को सुनकर भी अनसुना कर देता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी अपनी क़ौम के लिए सबसे ज़्यादा शफ़ीक़ (मेहरबान) होते हैं। वे चाहते हैं कि लोग जहन्नुम की आग से बच जाएँ और जन्नत की नेमतें हासिल करें। इसलिए हमें चाहिए कि जब भी हमें अल्लाह का पैग़ाम पहुँचे, तो हम उसे खुले दिल से क़बूल करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो उसकी नाफ़रमानी पर अड़े रहते हैं।



📜 आयत 1-4 — सूरा नूह

1إِنَّا أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
हमने नूह को उसकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा कि क़ब्ल उसके कि उनकी क़ौम पर दर्दनाक अज़ाब आए उनको उससे डराओ
2قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ
3أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ
कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो
4يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ اللَّهِ إِذَا جَاءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते
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अनुवाद — नूह 2

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Tuesday, September 29, 2026

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