नूह · 3/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ ۝٣
Ani`udul laaha watta qoohu wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اعْبُدُوا = अल्लाह की इबादत करो (उसे अकेला मानो, उसकी पूजा करो)
  • وَاتَّقُوهُ = उससे डरो, उसकी नाराज़गी से बचो
  • وَأَطِيعُونِ = और मेरी आज्ञा का पालन करो (नूह अलैहिस्सलाम की बात मानो)

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को जो सबसे पहली और सबसे बुनियादी दावत दी, वह यही थी कि वे अल्लाह की इबादत करें। यह दावत किसी दुनियावी मतलब के लिए नहीं थी, बल्कि यह उनके नबी होने का मूल संदेश था। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाता हूँ, उसकी इबादत करो, उसके सिवा किसी और की पूजा मत करो।"

इस आयत में तीन बड़ी बातें बताई गई हैं:

पहली बात: अल्लाह की इबादत करना। यानी उसे अकेला मानना, उसी के आगे झुकना, उसी से मदद माँगना और उसी के बताए रास्ते पर चलना। इबादत का मतलब सिर्फ नमाज़ और रोज़ा नहीं है, बल्कि पूरी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बनाना है।

दूसरी बात: अल्लाह से डरना (तक़वा)। यानी उसकी नाराज़गी से बचना, उसके हुक्मों को नज़रअंदाज़ न करना। तक़वा यह है कि इंसान हर काम में यह सोचे कि अल्लाह मुझे देख रहा है, मुझे उसके सामने जवाब देना है। यह डर इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेक कामों की तरफ ले जाता है।

तीसरी बात: नबी की इताअत (आज्ञा का पालन) करना। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से कहा कि जो बात मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ से पहुँचा रहा हूँ, उसे मानो। नबी की इताअत दरअसल अल्लाह की इताअत है, क्योंकि नबी अपनी तरफ से कुछ नहीं कहते, बल्कि अल्लाह का पैगाम पहुँचाते हैं।

यह तीनों बातें आपस में जुड़ी हुई हैं। जो अल्लाह की इबादत करता है, उसके दिल में अल्लाह का डर पैदा होता है, और जिसके दिल में अल्लाह का डर होता है, वह नबी की बात मानने में हिचकिचाता नहीं। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की यह दावत आज भी हमारे लिए नुस्खा है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में इन तीनों चीज़ों को अपनाना है: अल्लाह की इबादत, अल्लाह का डर, और उसके रसूल की इताअत। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा। अल्लाह तआला हम सबको इस दावत को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-5 — नूह

1إِنَّا أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ أَنْ أَنذِرْ قَوْمَكَ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
हमने नूह को उसकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा कि क़ब्ल उसके कि उनकी क़ौम पर दर्दनाक अज़ाब आए उनको उससे डराओ
2قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ
3أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ
कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो
4يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ اللَّهِ إِذَا جَاءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते
5قَالَ رَبِّ إِنِّي دَعَوْتُ قَوْمِي لَيْلًا وَنَهَارًا
(जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा
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अनुवाद — नूह 3

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सूरा आयत 3/28 — नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: नूह सुनें, नूह अनुवाद, नूह mp3, नूह pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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