Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اعْبُدُوا = अल्लाह की इबादत करो (उसे अकेला मानो, उसकी पूजा करो)
- وَاتَّقُوهُ = उससे डरो, उसकी नाराज़गी से बचो
- وَأَطِيعُونِ = और मेरी आज्ञा का पालन करो (नूह अलैहिस्सलाम की बात मानो)
विस्तृत तफ़सीर:
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को जो सबसे पहली और सबसे बुनियादी दावत दी, वह यही थी कि वे अल्लाह की इबादत करें। यह दावत किसी दुनियावी मतलब के लिए नहीं थी, बल्कि यह उनके नबी होने का मूल संदेश था। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाता हूँ, उसकी इबादत करो, उसके सिवा किसी और की पूजा मत करो।"
इस आयत में तीन बड़ी बातें बताई गई हैं:
पहली बात: अल्लाह की इबादत करना। यानी उसे अकेला मानना, उसी के आगे झुकना, उसी से मदद माँगना और उसी के बताए रास्ते पर चलना। इबादत का मतलब सिर्फ नमाज़ और रोज़ा नहीं है, बल्कि पूरी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बनाना है।
दूसरी बात: अल्लाह से डरना (तक़वा)। यानी उसकी नाराज़गी से बचना, उसके हुक्मों को नज़रअंदाज़ न करना। तक़वा यह है कि इंसान हर काम में यह सोचे कि अल्लाह मुझे देख रहा है, मुझे उसके सामने जवाब देना है। यह डर इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेक कामों की तरफ ले जाता है।
तीसरी बात: नबी की इताअत (आज्ञा का पालन) करना। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से कहा कि जो बात मैं तुम्हें अल्लाह की तरफ से पहुँचा रहा हूँ, उसे मानो। नबी की इताअत दरअसल अल्लाह की इताअत है, क्योंकि नबी अपनी तरफ से कुछ नहीं कहते, बल्कि अल्लाह का पैगाम पहुँचाते हैं।
यह तीनों बातें आपस में जुड़ी हुई हैं। जो अल्लाह की इबादत करता है, उसके दिल में अल्लाह का डर पैदा होता है, और जिसके दिल में अल्लाह का डर होता है, वह नबी की बात मानने में हिचकिचाता नहीं। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की यह दावत आज भी हमारे लिए नुस्खा है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में इन तीनों चीज़ों को अपनाना है: अल्लाह की इबादत, अल्लाह का डर, और उसके रसूल की इताअत। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा। अल्लाह तआला हम सबको इस दावत को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 1-5 — सूरा नूह
अनुवाद — नूह 3
सूरा नूह आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से…सूरा आयत 3/28 — सूरा नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा नूह सुनें, सूरा नूह अनुवाद, सूरा नूह mp3, सूरा नूह pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा नूह
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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