अल-अनफाल · 4/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ ۝٤
Ulaaa`ika humul mu`minoona haqqaa; lahum darajaatun `inda Rabbihim wa magh firatunw wa rizqun kareem
📖 हिंदी अर्थ
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَقًّا: सच्चे अर्थों में, पूर्ण रूप से, बिना किसी संदेह के।
  • دَرَجَاتٌ: ऊँचे दर्जे, मरातिब, जन्नत में ऊँचे स्थान।
  • مَغْفِرَةٌ: पापों की क्षमा, गुनाहों से दरगुज़र।
  • رِزْقٌ كَرِيمٌ: बहुमूल्य और सम्मानजनक आजीविका, यानी जन्नत की नेअमतें।

तफसीर (व्याख्या):

ये लोग—जिन्हें पिछली आयात में उन खास सिफ़ात (गुणों) के साथ पेश किया गया है, जैसे सच्चा ईमान, अल्लाह पर भरोसा, नमाज़ की पाबंदी, और अल्लाह के दिए रिज़्क़ में से ख़र्च करना—यही लोग सच्चे और पक्के मोमिन हैं। उनका ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिल और अमल दोनों में जड़ें जमा चुका है। उनके अंदर ईमान की सच्चाई इस कदर मौजूद है कि उनके बारे में किसी तरह का शुबहा (संदेह) नहीं किया जा सकता।

उनके लिए उनके रब के पास बुलंद दर्जे हैं—जन्नत में ऊँचे मुक़ामात, जो उनके अच्छे आमाल और सच्चे ईमान की बदौलत उन्हें मिलेंगे। साथ ही उनके लिए मग़फिरत है, यानी अल्लाह उनके गुनाहों को माफ़ कर देगा और उन पर रहमत फरमाएगा। और उनके लिए करीम रिज़्क़ है—वह नेअमतें और इनामात जो अल्लाह ने उनके लिए जन्नत में तैयार कर रखी हैं, जो किसी भी इंसानी अंदाज़े से बाहर हैं। यह रिज़्क़ इतना पाकीज़ा और बेहतरीन है कि उसकी कोई मिसाल दुनिया में नहीं मिल सकती।

फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. सच्चा ईमान सिर्फ़ दिल का दावा नहीं, बल्कि अमल से साबित होता है। जो लोग अपने ईमान को नमाज़, ख़र्च और अल्लाह पर भरोसे के ज़रिए ज़ाहिर करते हैं, वही अल्लाह के नज़दीक सच्चे मोमिन हैं।
  2. अल्लाह अपने सच्चे बंदों को सिर्फ़ जन्नत ही नहीं देता, बल्कि उन्हें ऊँचे दर्जे, मग़फिरत और करीम रिज़्क़ से नवाज़ता है—यह उसकी रहमत और फज़ल का इज़हार है।
  3. यह आयत मोमिनों को उम्मीद और ख़ुशी देती है कि उनकी मेहनत और ईमान बेकार नहीं जाएगा; अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देगा।
  4. इससे यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह के दिए रिज़्क़ में से ख़र्च करना और नमाज़ क़ायम करना ईमान की निशानी है, और यही आदतें इंसान को अल्लाह के करीब लाती हैं।
  5. मोमिन की सबसे बड़ी ख्वाहिश अल्लाह की रज़ा और जन्नत होनी चाहिए, और यह आयत उसे याद दिलाती है कि उसका असली इनाम उसके रब के पास महफ़ूज़ है।


📜 आयत 2-6 — सूरा अल-अनफाल

2إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ آيَاتُهُ زَادَتْهُمْ إِيمَانًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़ुदा का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके ईमान को और भी ज्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं
3الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
4أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)
5كَمَا أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيْتِكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ لَكَارِهُونَ
जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से) तुम्हारे घर से (जंग बदर) में निकाला था और मोमिनीन का एक गिरोह (उससे) नाखुश था
6يُجَادِلُونَكَ فِي الْحَقِّ بَعْدَمَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख्वाह माख्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 4

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Wednesday, September 30, 2026

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