अल-अनफाल · 3/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ ۝٣
Allazeena yuqeemoonas Salaata wa mimmaa razaqnaahum yunfiqoon
📖 हिंदी अर्थ
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ: नमाज़ को पूर्णता के साथ, उसके नियमों और शर्तों की रक्षा करते हुए, समय पर अदा करना।
  • مِمَّا رَزَقْنَاهُمْ: उस (धन-संपत्ति, ज्ञान, शक्ति आदि) में से जो हमने उन्हें प्रदान किया है।
  • يُنفِقُونَ: खर्च करते हैं, दान देते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन ईमानवालों के गुणों का वर्णन कर रही है जिनके दिलों में अल्लाह का डर और उसकी याद का असर होता है। ऐसे लोग नमाज़ को सिर्फ़ अदा ही नहीं करते, बल्कि उसे "क़ायम" करते हैं—यानी उसे पूरी पाबंदी, विनम्रता, रुकू', सजदे और समय की रक्षा के साथ अदा करते हैं। वे नमाज़ को एक औपचारिकता नहीं बनाते, बल्कि उसे अपने जीवन का आधार बनाते हैं, जो उन्हें बुराई और अश्लील कामों से रोकती है।

साथ ही, वे अल्लाह द्वारा दी गई रोज़ी (धन, संपत्ति, ज्ञान, समय, शक्ति) में से दूसरों के हक़ को याद रखते हैं। वे फ़र्ज़ (अनिवार्य) खर्च जैसे ज़कात और रिश्तेदारों, गरीबों, ज़रूरतमंदों के हक़ अदा करते हैं, और साथ ही नफ़्ल (स्वैच्छिक) दान भी करते हैं। यह खर्च केवल धन तक सीमित नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, समय और क्षमताओं से भी लोगों की मदद करते हैं। यही उनके ईमान की सच्चाई का प्रमाण है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. नमाज़ की पाबंदी और उसे पूर्णता के साथ अदा करना ईमान की निशानी है। जो व्यक्ति नमाज़ का पूरा ध्यान रखता है, उसका दिल अल्लाह से जुड़ा रहता है और उसके अंदर अच्छाई पैदा होती है।
  2. अल्लाह ने जो कुछ दिया है—चाहे वह धन हो, ज्ञान हो या समय—उसमें से दूसरों के लिए खर्च करना सच्चे ईमान की पहचान है। यह हमें स्वार्थ और लालच से बचाता है और समाज में भाईचारा पैदा करता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से डरने वाले और उसकी रहमत की उम्मीद रखने वाले लोग नमाज़ और खर्च (दान) को एक साथ जोड़ते हैं। यानी इबादत और सेवा का संगम ही सच्ची सफलता का रास्ता है।
  4. इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपनी रोज़ी में अल्लाह का हक़ याद रखें और ज़रूरतमंदों की मदद करें, क्योंकि यही वह पूँजी है जो हमारे लिए आख़िरत में बचेगी।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अल-अनफाल

1يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْأَنفَالِ ۖ قُلِ الْأَنفَالُ لِلَّهِ وَالرَّسُولِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْ ۖ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इसलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो
2إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ آيَاتُهُ زَادَتْهُمْ إِيمَانًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़ुदा का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके ईमान को और भी ज्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं
3الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
4أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)
5كَمَا أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيْتِكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ لَكَارِهُونَ
जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से) तुम्हारे घर से (जंग बदर) में निकाला था और मोमिनीन का एक गिरोह (उससे) नाखुश था
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
3आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 3

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Tuesday, August 18, 2026

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