Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ذَٰلِكَ – यह (अज़ाब)।
- بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيكُمْ – उसके कारण जो तुम्हारे हाथों ने आगे भेजा (अर्थात् तुम्हारे कर्म)।
- لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ – बंदों पर अत्याचार करने वाला नहीं है (अर्थात् वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता)।
तफ़सीर:
यह अज़ाब और यातना जो काफ़िरों को मिल रही है—चाहे वह मृत्यु के समय हो, क़ब्र में हो या आख़िरत में—यह अल्लाह की ओर से कोई अन्याय या ज़ुल्म नहीं है। बल्कि यह उनके उन कर्मों का परिणाम है जो उन्होंने दुनिया में अपने हाथों से किए थे। उन्होंने कुफ़्र, शिर्क और अल्लाह के रसूल के विरोध का रास्ता अपनाया, और इसी का फल उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
अल्लाह तआला अपने बंदों पर ज़ुल्म करने से पाक है। वह न तो किसी को उसके कर्मों से बढ़कर सज़ा देता है और न ही किसी के अच्छे कर्म को बेकार करता है। वह पूर्ण न्याय करने वाला है। उसका फ़ैसला हर हाल में अदल और हिकमत पर आधारित होता है। जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही बदला मिलता है—यही उसका न्याय है।
फ़ायदे (उपदेश):
- कर्मों का फल अवश्य मिलता है: यह आयत सिखाती है कि दुनिया में किया गया हर अच्छा या बुरा काम आख़िरत में सामने आएगा। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपने कर्मों को सुधारे और अल्लाह की नाराज़गी से बचे।
- अल्लाह पर भरोसा और न्याय का यक़ीन: यह आयत मुसलमान के दिल में यह बात पक्की करती है कि अल्लाह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। इससे बंदे को सुकून मिलता है कि चाहे दुनिया में कुछ भी हो, आख़िरत में अल्लाह का फ़ैसला पूर्ण न्याय पर होगा।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार खुद है। वह अपनी गलतियों का ठीकरा किसी और पर नहीं फोड़ सकता। यह आयत इंसान को ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाती है और उसे अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की मरज़ी के मुताबिक ढालने की तरफ़ राह दिखाती है।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: जब हम जानते हैं कि अल्लाह ज़ुल्म नहीं करता, तो हमें यह भी यक़ीन होता है कि उसकी रहमत और माफ़ी भी इंसाफ़ पर आधारित है। जो तौबा करके लौट आता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है, क्योंकि वह बड़ा क्षमाशील है।
📜 आयत 49-53 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 51
सूरा अल-अनफाल आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये सज़ा उसकी है जो तुम्हारे हाथों ने पहले किया…सूरा आयत 51/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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