अल-अनफाल · 50/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ يَتَوَفَّى الَّذِينَ كَفَرُوا ۙ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ وَذُوقُوا عَذَابَ الْحَرِيقِ ۝٥٠
Wa law taraaa iz yatawaf fal lazeena kafarul malaaa`ikatu yadriboona wujoohahum wa adbaarahum wa zooqoo `azaabal hareeq
📖 हिंदी अर्थ
और काश (ऐ रसूल) तुम देखते जब फ़रिश्ते काफ़िरों की जान निकाल लेते थे और रूख़ और पुश्त (पीठ) पर कोड़े मारते थे और (कहते थे कि) अज़ाब जहन्नुम के मज़े चखों

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَتَوَفَّى – (यहाँ) आत्मा निकालना, मृत्यु देना
  • أَدْبَارَهُمْ – उनकी पीठें (पीछे का भाग)
  • الْحَرِيقِ – जलाने वाला (आग का) अज़ाब

तफ़सीर:

ऐ नबी! यदि तुम उस समय को देखते जब फ़रिश्ते काफ़िरों की आत्माएँ निकालते हैं, तो तुम एक अत्यंत भयानक और हैरतअंगेज़ दृश्य देखते। फ़रिश्ते उनके चेहरों पर और उनकी पीठों पर मारते हैं — जब वे आगे बढ़ते हैं तो उनके मुँह पर और जब वे पीछे भागते हैं तो उनकी पीठों पर कोड़े मारते हैं। यह इसलिए कि वे मौत से बचने की कोशिश करें, लेकिन फ़रिश्ते उन्हें हर तरफ से घेर लेते हैं। साथ ही फ़रिश्ते उनसे कहते हैं: "अब चखो जलाने वाले अज़ाब का मज़ा!" यानी यह मौत का अज़ाब तो बस शुरुआत है, इसके बाद तो जहन्नम की आग उनका इंतज़ार कर रही है।

यह दृश्य यद्यपि बद्र की लड़ाई के सिलसिले में उतरा था, लेकिन यह हर उस काफ़िर के लिए सामान्य है जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान नहीं लाता। हर काफ़िर की मौत के वक़्त फ़रिश्ते इसी तरह उसकी आत्मा को सख्ती से निकालते हैं, उसे पीटते हैं और उसे अज़ाब की ख़बर देते हैं। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो हक़ से मुँह मोड़ते हैं।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से मालूम होता है कि काफ़िरों की मौत बेहद सख्त और दर्दनाक होती है, और फ़रिश्ते उनके साथ बेरहमी से पेश आते हैं — यह उनके कुफ़्र और नाफ़रमानी का नतीजा है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए, क्योंकि मौत का वक़्त बहुत कठिन होता है और उस वक़्त कोई भी पछतावा काम नहीं आता।
  3. मोमिन के लिए यह ख़ुशख़बरी है कि उसकी मौत फ़रिश्तों के लिए रहमत और सलामती का ज़रिया होगी, जबकि काफ़िर के लिए वही वक़्त अज़ाब और रुसवाई का होगा — इसलिए हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने हमें ईमान की नेमत दी।
  4. यह आयत हमें दावत का पैग़ाम देती है कि हम लोगों को सच्चाई से आगाह करें, ताकि वे उस भयानक अंजाम से बच सकें जो काफ़िरों का इंतज़ार कर रहा है।


📜 आयत 48-52 — सूरा अल-अनफाल

48وَإِذْ زَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ وَقَالَ لَا غَالِبَ لَكُمُ الْيَوْمَ مِنَ النَّاسِ وَإِنِّي جَارٌ لَّكُمْ ۖ فَلَمَّا تَرَاءَتِ الْفِئَتَانِ نَكَصَ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ وَقَالَ إِنِّي بَرِيءٌ مِّنكُمْ إِنِّي أَرَىٰ مَا لَا تَرَوْنَ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ ۚ وَاللَّهُ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और जब शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया और उनके कान में फूंक दिया कि लोगों में आज कोई ऐसा नहीं जो तुम पर ग़ालिब आ सके और मै तुम्हारा मददगार हूं फिर जब दोनों लश्कर मुकाबिल हुए तो अपने उलटे पॉव भाग निकला और कहने लगा कि मै तो तुम से अलग हूं मै वह चीजें देख रहा हूं जो तुम्हें नहीं सूझती मैं तो ख़ुदा से डरता हूं और ख़ुदा बहुत सख्त अज़ाब वाला है
49إِذْ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ غَرَّ هَٰؤُلَاءِ دِينُهُمْ ۗ وَمَن يَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
(ये वक्त था) जब मुनाफिक़ीन और जिन लोगों के दिल में (कुफ्र का) मर्ज़ है कह रहे थे कि उन मुसलमानों को उनके दीन ने धोके में डाल रखा है (कि इतराते फिरते हैं हालॉकि जो शख़्स ख़ुदा पर भरोसा करता है (वह ग़ालिब रहता है क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन ग़ालिब और हिकमत वाला है
50وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ يَتَوَفَّى الَّذِينَ كَفَرُوا ۙ الْمَلَائِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَارَهُمْ وَذُوقُوا عَذَابَ الْحَرِيقِ
और काश (ऐ रसूल) तुम देखते जब फ़रिश्ते काफ़िरों की जान निकाल लेते थे और रूख़ और पुश्त (पीठ) पर कोड़े मारते थे और (कहते थे कि) अज़ाब जहन्नुम के मज़े चखों
51ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيكُمْ وَأَنَّ اللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
ये सज़ा उसकी है जो तुम्हारे हाथों ने पहले किया कराया है और ख़ुदा बन्दों पर हरगिज़ ज़ुल्म नहीं किया करता है
52كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ ۙ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ شَدِيدُ الْعِقَابِ
(उन लोगों की हालत) क़ौमे फिरऔन और उनके लोगों की सी है जो उन से पहले थे और ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे तो ख़ुदा ने भी उनके गुनाहों की वजह से उन्हें ले डाला बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त और बहुत सख्त अज़ाब देने वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
50आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 50

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Wednesday, September 30, 2026

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