अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا: यदि न होता।
- كِتَابٌ مِنَ اللهِ سَبَقَ: अल्लाह का वह पूर्व लिखित फैसला जो उसके ज्ञान और आदेश से पहले ही तय हो चुका था।
- لَمَسَّكُمْ: तुम्हें छू लेता, तुम पर आ पड़ता।
- فِيمَا أَخَذْتُمْ: उस चीज़ के कारण जो तुमने ली (यानी फ़िदया और ग़नीमत)।
- عَذَابٌ عَظِيمٌ: बहुत बड़ा और भयानक अज़ाब।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने बद्र के युद्ध के बाद मुसलमानों को नसीहत करते हुए फ़रमाया कि यदि अल्लाह का वह फैसला पहले से तय न होता जो उसने अपने इल्म और हिकमत से लिख दिया था कि इस उम्मत के लिए ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाला धन) और कैदियों से फ़िदया (रिहाई के बदले में धन) लेना हलाल है, तो तुम लोगों ने जो कुछ लिया था—चाहे वह युद्ध में मिला माल हो या कैदियों से लिया गया फ़िदया—उसकी वजह से तुम पर कोई बहुत बड़ा अज़ाब आ जाता। यह बात इसलिए कही गई क्योंकि उस वक़्त मुसलमानों ने कैदियों को छोड़ने के बदले में धन लेने का फैसला किया था, जबकि अभी तक अल्लाह की तरफ से इसकी इजाज़त नहीं आई थी। अल्लाह ने अपनी रहमत से उन्हें माफ़ कर दिया और उनकी इस ग़लती पर उन्हें पकड़ा नहीं, बल्कि उनके लिए ग़नीमत और फ़िदया को हलाल कर दिया। यह अल्लाह का पहले से लिखा हुआ फैसला था जो उसने अपने इल्म के मुताबिक़ लिखा था कि यह उम्मत इन चीज़ों की हक़दार है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और उनकी ग़लतियों को माफ़ करने वाला है। जब बंदा ग़लती कर बैठता है, तो अल्लाह अपनी रहमत से उसे ढक लेता है और उसे सज़ा नहीं देता।
- इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह का फैसला और उसकी तक़दीर उसके इल्म के मुताबिक़ पहले से लिखी हुई है। जो कुछ होता है, वह अल्लाह के इल्म और उसकी मंशा के बिना नहीं होता।
- मुसलमानों को चाहिए कि किसी भी मामले में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के हुक्म का इंतज़ार करें, और अपनी राय से जल्दबाज़ी न करें। अगर इंसान से कोई ग़लती हो जाए, तो उसे तौबा करनी चाहिए और अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।
- यह आयत उम्मत-ए-मुहम्मदिया ﷺ के लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अल्लाह ने उनके लिए ग़नीमत और फ़िदया को हलाल किया, जो पहले की उम्मतों पर हराम था। यह इस उम्मत के लिए अल्लाह की ख़ास रहमत और फज़ल है।
- अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है, और उसके हुक्म की खिलाफ़वाज़ी करने वालों को बड़े अज़ाब का डर होना चाहिए। लेकिन साथ ही उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है, जो उसके तौबा करने वाले बंदों को गले लगा लेती है।
📜 आयत 66-70 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 68
सूरा अल-अनफाल आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर ख़ुदा की तरफ से पहले ही (उसकी) माफी…सूरा आयत 68/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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