अल-अनफाल · 68/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
لَّوْلَا كِتَابٌ مِّنَ اللَّهِ سَبَقَ لَمَسَّكُمْ فِيمَا أَخَذْتُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ ۝٦٨
Law laa Kitaabum minal laahi sabaqa lamassakum fee maaa akhaztum `azaabun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ख़ुदा की तरफ से पहले ही (उसकी) माफी का हुक्म आ चुका होता तो तुमने जो (बदर के क़ैदियों के छोड़ देने के बदले) फिदिया लिया था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوْلَا: यदि न होता।
  • كِتَابٌ مِنَ اللهِ سَبَقَ: अल्लाह का वह पूर्व लिखित फैसला जो उसके ज्ञान और आदेश से पहले ही तय हो चुका था।
  • لَمَسَّكُمْ: तुम्हें छू लेता, तुम पर आ पड़ता।
  • فِيمَا أَخَذْتُمْ: उस चीज़ के कारण जो तुमने ली (यानी फ़िदया और ग़नीमत)।
  • عَذَابٌ عَظِيمٌ: बहुत बड़ा और भयानक अज़ाब।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने बद्र के युद्ध के बाद मुसलमानों को नसीहत करते हुए फ़रमाया कि यदि अल्लाह का वह फैसला पहले से तय न होता जो उसने अपने इल्म और हिकमत से लिख दिया था कि इस उम्मत के लिए ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाला धन) और कैदियों से फ़िदया (रिहाई के बदले में धन) लेना हलाल है, तो तुम लोगों ने जो कुछ लिया था—चाहे वह युद्ध में मिला माल हो या कैदियों से लिया गया फ़िदया—उसकी वजह से तुम पर कोई बहुत बड़ा अज़ाब आ जाता। यह बात इसलिए कही गई क्योंकि उस वक़्त मुसलमानों ने कैदियों को छोड़ने के बदले में धन लेने का फैसला किया था, जबकि अभी तक अल्लाह की तरफ से इसकी इजाज़त नहीं आई थी। अल्लाह ने अपनी रहमत से उन्हें माफ़ कर दिया और उनकी इस ग़लती पर उन्हें पकड़ा नहीं, बल्कि उनके लिए ग़नीमत और फ़िदया को हलाल कर दिया। यह अल्लाह का पहले से लिखा हुआ फैसला था जो उसने अपने इल्म के मुताबिक़ लिखा था कि यह उम्मत इन चीज़ों की हक़दार है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और उनकी ग़लतियों को माफ़ करने वाला है। जब बंदा ग़लती कर बैठता है, तो अल्लाह अपनी रहमत से उसे ढक लेता है और उसे सज़ा नहीं देता।
  2. इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह का फैसला और उसकी तक़दीर उसके इल्म के मुताबिक़ पहले से लिखी हुई है। जो कुछ होता है, वह अल्लाह के इल्म और उसकी मंशा के बिना नहीं होता।
  3. मुसलमानों को चाहिए कि किसी भी मामले में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के हुक्म का इंतज़ार करें, और अपनी राय से जल्दबाज़ी न करें। अगर इंसान से कोई ग़लती हो जाए, तो उसे तौबा करनी चाहिए और अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।
  4. यह आयत उम्मत-ए-मुहम्मदिया ﷺ के लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अल्लाह ने उनके लिए ग़नीमत और फ़िदया को हलाल किया, जो पहले की उम्मतों पर हराम था। यह इस उम्मत के लिए अल्लाह की ख़ास रहमत और फज़ल है।
  5. अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है, और उसके हुक्म की खिलाफ़वाज़ी करने वालों को बड़े अज़ाब का डर होना चाहिए। लेकिन साथ ही उसकी रहमत भी बहुत वसीअ है, जो उसके तौबा करने वाले बंदों को गले लगा लेती है।


📜 आयत 66-70 — सूरा अल-अनफाल

66الْآنَ خَفَّفَ اللَّهُ عَنكُمْ وَعَلِمَ أَنَّ فِيكُمْ ضَعْفًا ۚ فَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ صَابِرَةٌ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُمْ أَلْفٌ يَغْلِبُوا أَلْفَيْنِ بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصَّابِرِينَ
अब ख़ुदा ने तुम से (अपने हुक्म की सख्ती में) तख्फ़ीफ (कमी) कर दी और देख लिया कि तुम में यक़ीनन कमज़ोरी है तो अगर तुम लोगों में से साबित क़दम रहने वाले सौ होगें तो दो सौ (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगें और अगर तुम लोगों में से (ऐसे) एक हज़ार होगें तो ख़ुदा के हुक्म से दो हज़ार (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगे और (जंग की तकलीफों को) झेल जाने वालों का ख़ुदा साथी है
67مَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَن يَكُونَ لَهُ أَسْرَىٰ حَتَّىٰ يُثْخِنَ فِي الْأَرْضِ ۚ تُرِيدُونَ عَرَضَ الدُّنْيَا وَاللَّهُ يُرِيدُ الْآخِرَةَ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
कोई नबी जब कि रूए ज़मीन पर (काफिरों का) खून न बहाए उसके यहाँ कैदियों का रहना मुनासिब नहीं तुम लोग तो दुनिया के साज़ो सामान के ख्वाहॉ (चाहने वाले) हो औॅर ख़ुदा (तुम्हारे लिए) आख़िरत की (भलाई) का ख्वाहॉ है और ख़ुदा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
68لَّوْلَا كِتَابٌ مِّنَ اللَّهِ سَبَقَ لَمَسَّكُمْ فِيمَا أَخَذْتُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और अगर ख़ुदा की तरफ से पहले ही (उसकी) माफी का हुक्म आ चुका होता तो तुमने जो (बदर के क़ैदियों के छोड़ देने के बदले) फिदिया लिया था
69فَكُلُوا مِمَّا غَنِمْتُمْ حَلَالًا طَيِّبًا ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसकी सज़ा में तुम पर बड़ा अज़ाब नाज़िल होकर रहता तो (ख़ैर जो हुआ सो हुआ) अब तुमने जो माल ग़नीमत हासिल किया है उसे खाओ (और तुम्हारे लिए) हलाल तय्यब है और ख़ुदा से डरते रहो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
70يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّمَن فِي أَيْدِيكُم مِّنَ الْأَسْرَىٰ إِن يَعْلَمِ اللَّهُ فِي قُلُوبِكُمْ خَيْرًا يُؤْتِكُمْ خَيْرًا مِّمَّا أُخِذَ مِنكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ रसूल जो कैदी तुम्हारे कब्जे में है उनसे कह दो कि अगर तुम्हारे दिलों में नेकी देखेगा तो जो (माल) तुम से छीन लिया गया है उससे कहीं बेहतर तुम्हें अता फरमाएगा और तुम्हें बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
68आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 68

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Wednesday, September 30, 2026

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