अत-तकवीर · 10/29
अनुवाद उच्चारण — अत-तकवीर
وَإِذَا الصُّحُفُ نُشِرَتْ ۝١٠
Wa izas suhufu nushirat
📖 हिंदी अर्थ
और जिस वक्त (आमाल के) दफ्तर खोले जाएं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصُّحُفُ: (सुहुफ़) — यह 'صَحِيفَة' (सहीफ़ा) का बहुवचन है, जिसका अर्थ है किताब या लिखित पत्र। यहाँ इससे मुराद आमाल (कर्मों) के पन्ने/रिकॉर्ड हैं।
  • نُشِرَتْ: (नुशिरत) — खोले गए, फैलाए गए, या प्रस्तुत किए गए।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़ियामत का दिन आएगा और हिसाब का समय नज़दीक आएगा, तो हर इंसान के आमाल (कर्मों) के पन्ने खोल दिए जाएंगे और उसके सामने फैला दिए जाएंगे। ये वही सहीफ़े हैं जिन्हें अल्लाह के नेक फ़रिश्ते (किरामन कातिबीन) ने दुनिया में इंसान के हर अच्छे और बुरे काम को लिखकर संजोया था। उस दिन कोई भी काम छिपा नहीं रहेगा, हर छोटी-बड़ी बात, हर नेकी और हर गुनाह इन पन्नों में दर्ज होगा।

यह वह समय होगा जब हर शख्स अपनी किताब (आमाल की रिकॉर्ड) सामने खुली हुई पाएगा। नेक लोगों को उनकी सहीफ़ा उनके दाहिने हाथ में दी जाएगी, जो उनके लिए खुशी और सफलता का कारण बनेगी, और बुरे लोगों को उनकी सहीफ़ा उनके बाएँ हाथ में या पीठ की तरफ से दी जाएगी, जो उनके लिए शर्मिंदगी और अफसोस का सबब होगी।

यहाँ अल्लाह तआला ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ये पन्ने "नश्र" किए जाएंगे यानी खोले जाएंगे और उनमें लिखी हर बात सामने आ जाएगी। यह इंसान के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है कि उसका हर काम लिखा जा रहा है और एक दिन उसे पढ़ना ही होगा।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने हर अमल (काम) में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हमारे साथ अल्लाह के फ़रिश्ते हर वक़्त मौजूद हैं और हर बात लिख रहे हैं। यह हमारे लिए रहमत भी है कि हमारी नेकियाँ दर्ज होती हैं, और डर भी कि हमारी बुराइयाँ भी दर्ज होती हैं।

इसलिए प्यारे भाइयों और बहनों! आज ही अपने आमाल की जाँच कर लें, तौबा कर लें, और अपने सहीफ़े को ऐसा बनाएँ जो हमारे लिए गवाही दे कि हम अल्लाह के नेक बंदे थे। याद रखिए, उस दिन कोई सिफ़ारिश या बहाना काम नहीं आएगा, सिर्फ़ हमारे आमाल ही हमारे साथ होंगे। अल्लाह हम सबको नेक आमाल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अत-तकवीर

8وَإِذَا الْمَوْءُودَةُ سُئِلَتْ
और जिस वक्त ज़िन्दा दर गोर लड़की से पूछा जाएगा
9بِأَيِّ ذَنبٍ قُتِلَتْ
कि वह किस गुनाह के बदले मारी गयी
10وَإِذَا الصُّحُفُ نُشِرَتْ
और जिस वक्त (आमाल के) दफ्तर खोले जाएं
11وَإِذَا السَّمَاءُ كُشِطَتْ
और जिस वक्त आसमान का छिलका उतारा जाएगा
12وَإِذَا الْجَحِيمُ سُعِّرَتْ
और जब दोज़ख़ (की आग) भड़कायी जाएगी
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अनुवाद — अत-तकवीर 10

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Tuesday, August 18, 2026

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