अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صُحُفِ (सुहुफ़): पवित्र पन्ने, ग्रंथ, या वे लिखित पन्ने जो अल्लाह की ओर से नाज़िल हुए।
- إِبْرَاهِيمَ (इब्राहीम): हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम, जो अल्लाह के ख़लील (दोस्त) थे।
- مُوسَىٰ (मूसा): हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम, जिन्हें अल्लाह ने तौरात दी।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये बातें जो इस सूरह (अल-आला) में बयान की गई हैं—यानी अल्लाह की तौहीद, पाकीज़गी, नेकी और आख़िरत की कामयाबी का रास्ता—ये सब कुछ नई नहीं हैं, बल्कि यही हक़ीक़तें उन पवित्र पन्नों में भी दर्ज थीं जो अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर नाज़िल फ़रमाई थीं। यानी यह क़ुरआन उन्हीं सच्चाइयों की तस्दीक़ करता है जो पहले के नबियों पर उतारी गई थीं।
इन सुहुफ़ (पन्नों) में वही बुनियादी उसूल थे—अल्लाह की वहदानियत, उसकी पाकीज़गी बयान करना, नेक अमल करना, और यह यक़ीन रखना कि आख़िरत की ज़िंदगी बेहतर और बाक़ी रहने वाली है। यह पैग़ाम किसी एक ज़माने या किसी एक उम्मत के लिए नहीं, बल्कि तमाम इंसानों के लिए है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम कोई नया या अजनबी दीन नहीं है, बल्कि यह वही सच्चा दीन है जो अल्लाह ने शुरू से इंसानों के लिए चुना। हज़रत इब्राहीम और हज़रत मूसा जैसे अज़ीम पैग़म्बरों को जो हिदायत दी गई थी, उसी की तकमील क़ुरआन में की गई। यह बात हमारे दिलों को सुकून देती है कि हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं, वही रास्ता अल्लाह के नेक बंदों का रहा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस क़ुरआन की तालीमात पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें यह आख़िरी किताब दी, जो पहले की सारी किताबों की मुकम्मल और महफ़ूज़ शक्ल है—इस पर अमल करके हम उन पैग़म्बरों की सुन्नत पर चलने वाले बन सकते हैं।
📜 आयत 17-19 — अल-आला
अनुवाद — अल-आला 19
सूरा अल-आला आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इबराहीम और मूसा के सहीफ़ों में भी हैसूरा आयत 19/19 — अल-आला الأعلى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आला सुनें, अल-आला अनुवाद, अल-आला mp3, अल-आला pdf. आयत 17–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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