अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- वलीजा (وَلِيجَةً): किसी व्यक्ति का विशेष मित्र, भेदिया या अंदरूनी साथी बनाना, जिससे व्यक्ति अपने रहस्य साझा करे। यहाँ इसका अर्थ है काफ़िरों को अपना घनिष्ठ मित्र और सहयोगी बनाना।
- अम (أَمْ): यहाँ यह 'बल्कि' या 'क्या' के अर्थ में है, जो पूछताछ के लिए आया है।
- लम्मा (لَمَّا): 'अभी तक नहीं' — यानी जब तक ऐसा नहीं हो जाता।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! क्या तुमने यह समझ लिया है कि तुम्हें यूँ ही छोड़ दिया जाएगा, बिना किसी परीक्षा के? यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि वह अपने बंदों को परीक्षा में डालता है, ताकि सच्चे और झूठे लोग स्पष्ट हो जाएँ। यह परीक्षा जिहाद (संघर्ष) के माध्यम से होती है — कि तुममें से कौन अल्लाह के मार्ग में सच्चे दिल से संघर्ष करता है, और कौन केवल दिखावे के लिए या सांसारिक लाभ के लिए।
अल्लाह तआला का यह ज्ञान पहले से ही है, लेकिन उसका तरीका यह है कि वह चीज़ों को प्रकट रूप में सामने लाता है, ताकि लोगों पर हुज्जत (प्रमाण) स्थापित हो। इस परीक्षा में वही लोग कामयाब होते हैं जो अल्लाह, उसके रसूल (ﷺ) और मोमिनीन को अपना सच्चा सहारा और मित्र बनाते हैं, और काफ़िरों को अपना अंदरूनी मित्र व भेदिया नहीं बनाते। ऐसे लोग जो काफ़िरों से दोस्ती करते हैं और उन्हें अपने रहस्य सौंपते हैं, वे अल्लाह की नज़र में सच्चे मोमिन नहीं हैं।
अल्लाह तआला हर उस काम से पूरी तरह अवगत है जो तुम करते हो — चाहे वह अच्छा हो या बुरा, चाहे वह इख़लास (शुद्ध नियत) के साथ हो या दिखावे के साथ। वह तुम्हारे सभी कर्मों का हिसाब लेगा और उसका बदला देगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- परीक्षा अनिवार्य है: अल्लाह ने मोमिनों को यह स्पष्ट कर दिया कि ईमान का दावा करना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि परीक्षा से गुज़रना ज़रूरी है। यह जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो व्यक्ति को निखारता है।
- सच्चाई और ईमानदारी की पहचान: यह आयत हमें सिखाती है कि कठिनाइयों और परीक्षाओं के समय ही सच्चे और झूठे लोगों की पहचान होती है। इसलिए परीक्षा को बुरा नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे अल्लाह की ओर से एक नेमत समझना चाहिए।
- वफ़ादारी का पैमाना: मोमिन की पहचान यह है कि वह अल्लाह, उसके रसूल और मोमिनीन के साथ वफ़ादार रहे, और काफ़िरों को अपना अंदरूनी मित्र न बनाए। यह हमें सिखाता है कि हमारी मित्रता और सहयोग की नींव ईमान पर होनी चाहिए।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह हमारे हर काम से वाकिफ़ है। यह एहसास हमें अच्छे काम करने की प्रेरणा देता है और बुरे कामों से रोकता है।
- इख़लास की अहमियत: अल्लाह के यहाँ वही काम क़बूल है जो शुद्ध नियत से किया जाए। दिखावे और सांसारिक लाभ के लिए किए गए काम अल्लाह के यहाँ बेकार हैं। यह हमें सिखाता है कि हर अमल में इख़लास (शुद्ध नियत) को शामिल करें।
📜 आयत 14-18 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 16
सूरा अत-तौबा आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुमने ये समझ लिया है कि तुम (यूं ही)…सूरा आयत 16/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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