अत-तौबा · 15/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
وَيُذْهِبْ غَيْظَ قُلُوبِهِمْ ۗ وَيَتُوبُ اللَّهُ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ۝١٥
Wa yuzhib ghaiza quloobihim; wa yatoobullaahu `alaa mai yashaaa`; wallaahu `Aleemun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और उन मोनिनीन के दिल की क़ुदरतें जो (कुफ्फ़ार से पहुचॅती है) दफ़ा कर देगा और ख़ुदा जिसकी चाहे तौबा क़ुबूल करे और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार (और) हिकमत वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَیُذْهِبْ: दूर कर देगा, समाप्त कर देगा।
  • غَیْظَ: क्रोध, जलन, आंतरिक आक्रोश।
  • قُلُوبِهِمْ: उनके दिलों का (यहाँ मोमिनों के दिलों का उल्लेख है)।
  • وَیَتُوبُ اللّٰهُ عَلٰی مَنْ یَّشَاءُ: और अल्लाह जिस पर चाहता है, अपनी दया से रुजू करता है, उसे तौबा की तौफीक़ देता है और उसकी तौबा क़बूल करता है।
  • عَلِیمٌ: सब कुछ जानने वाला।
  • حَكِیمٌ: हर काम में हिकमत (गहरी समझ और योजना) रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने मोमिन बंदों से फ़रमाता है कि जब वे उसके दुश्मनों से जिहाद करेंगे, तो अल्लाह उन्हें अपने हाथों से अज़ाब देगा, उन्हें ज़िल्लत और शिकस्त से रुसवा करेगा, और मोमिनीन को उन पर फ़तह (विजय) अता करेगा। इस फ़तह और कामयाबी के ज़रिए अल्लाह उन मोमिनों के सीनों की तकलीफ़ और क़ल्बों के ग़ैज़ (क्रोध) को दूर कर देगा, जो लंबे अरसे से कुफ्फ़ार के ज़ुल्म और साज़िशों की वजह से उनके दिलों में जमा होता रहा था। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने बंदों के दिलों से यह ग़म और ग़ुस्सा निकाल देता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि इन हठधर्म दुश्मनों में से जो भी तौबा कर ले, अल्लाह उसकी तौबा क़बूल कर लेता है। जैसा कि मक्का की फ़तह के दिन कुछ लोगों (जैसे अबू सुफ़ियान) ने इस्लाम क़बूल किया और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया। अल्लाह तआला अपनी हिकमत से जिसे चाहता है, हिदायत देता है और तौबा की तौफीक़ अता करता है। वह (अल्लाह) अपने बंदों के दिलों के हाल को खूब जानता है कि कौन सच्चे दिल से तौबा कर रहा है और कौन झूठा दिखावा कर रहा है। वह हकीम है, यानी उसका हर फ़ैसला, हर क़ानून और हर कार्य गहरी हिकमत पर आधारित है; वह कोई काम बे-मक़सद या बे-हिकमत नहीं करता।


फ़ायदे (उपदेश और सबक):

  1. जिहाद और सब्र का इनाम: यह आयत मोमिनीन को बताती है कि दुश्मनों के मुक़ाबले में सब्र और जिहाद का नतीजा अल्लाह की तरफ से नसरत (मदद) और दिलों की तसल्ली है। अल्लाह अपने बंदों के दिलों से ग़म और ग़ुस्सा दूर करता है।
  2. अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है: चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार या दुश्मन क्यों न हो, जब तक वह सच्चे दिल से तौबा करे, अल्लाह उसे माफ़ करने के लिए तैयार है। यह अल्लाह की असीम रहमत की निशानी है।
  3. हिकमत और इल्म: अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है और हर काम हिकमत से करता है। इससे बंदे को यक़ीन होता है कि अल्लाह के हर फ़ैसले में भलाई है, चाहे वह हमारी समझ में न आए।
  4. दिल की सफ़ाई: अल्लाह चाहता है कि उसके बंदों के दिल किसी क्रोध, जलन या बैर से पाक हों। यह आयत दिलों को साफ़ रखने और अल्लाह पर भरोसा करने की तरग़ीब देती है।
  5. इस्लाम की ताक़त: यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि अल्लाह की मदद से वे अपने दुश्मनों पर ग़ालिब आएंगे और उनकी साज़िशें नाकाम होंगी।
🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अत-तौबा

13أَلَا تُقَاتِلُونَ قَوْمًا نَّكَثُوا أَيْمَانَهُمْ وَهَمُّوا بِإِخْرَاجِ الرَّسُولِ وَهُم بَدَءُوكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ أَتَخْشَوْنَهُمْ ۚ فَاللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَوْهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(मुसलमानों) भला तुम उन लोगों से क्यों नहीं लड़ते जिन्होंने अपनी क़समों को तोड़ डाला और रसूल को निकाल बाहर करना (अपने दिल में) ठान लिया था और तुमसे पहले छेड़ भी उन्होनें ही शुरू की थी क्या तुम उनसे डरते हो तो अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा उनसे कहीं बढ़ कर तुम्हारे डरने के क़ाबिल है
14قَاتِلُوهُمْ يُعَذِّبْهُمُ اللَّهُ بِأَيْدِيكُمْ وَيُخْزِهِمْ وَيَنصُرْكُمْ عَلَيْهِمْ وَيَشْفِ صُدُورَ قَوْمٍ مُّؤْمِنِينَ
इनसे (बेख़ौफ (ख़तर) लड़ो ख़ुदा तुम्हारे हाथों उनकी सज़ा करेगा और उन्हें रूसवा करेगा और तुम्हें उन पर फतेह अता करेगा और ईमानदार लोगों के कलेजे ठन्डे करेगा
15وَيُذْهِبْ غَيْظَ قُلُوبِهِمْ ۗ وَيَتُوبُ اللَّهُ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और उन मोनिनीन के दिल की क़ुदरतें जो (कुफ्फ़ार से पहुचॅती है) दफ़ा कर देगा और ख़ुदा जिसकी चाहे तौबा क़ुबूल करे और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार (और) हिकमत वाला है
16أَمْ حَسِبْتُمْ أَن تُتْرَكُوا وَلَمَّا يَعْلَمِ اللَّهُ الَّذِينَ جَاهَدُوا مِنكُمْ وَلَمْ يَتَّخِذُوا مِن دُونِ اللَّهِ وَلَا رَسُولِهِ وَلَا الْمُؤْمِنِينَ وَلِيجَةً ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
क्या तुमने ये समझ लिया है कि तुम (यूं ही) छोड़ दिए जाओगे और अभी तक तो ख़ुदा ने उन लोगों को मुमताज़ किया ही नहीं जो तुम में के (राहे ख़ुदा में) जिहाद करते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल और मोमेनीन के सिवा किसी को अपना राज़दार दोस्त नहीं बनाते और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
17مَا كَانَ لِلْمُشْرِكِينَ أَن يَعْمُرُوا مَسَاجِدَ اللَّهِ شَاهِدِينَ عَلَىٰ أَنفُسِهِم بِالْكُفْرِ ۚ أُولَٰئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ وَفِي النَّارِ هُمْ خَالِدُونَ
मुशरेकीन का ये काम नहीं कि जब वह अपने कुफ़्र का ख़ुद इक़रार करते है तो ख़ुदा की मस्जिदों को (जाकर) आबाद करे यही वह लोग हैं जिनका किया कराया सब अकारत हुआ और ये लोग हमेशा जहन्नुम में रहेंगे
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अनुवाद — अत-तौबा 15

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Tuesday, August 18, 2026

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