Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَیُذْهِبْ: दूर कर देगा, समाप्त कर देगा।
- غَیْظَ: क्रोध, जलन, आंतरिक आक्रोश।
- قُلُوبِهِمْ: उनके दिलों का (यहाँ मोमिनों के दिलों का उल्लेख है)।
- وَیَتُوبُ اللّٰهُ عَلٰی مَنْ یَّشَاءُ: और अल्लाह जिस पर चाहता है, अपनी दया से रुजू करता है, उसे तौबा की तौफीक़ देता है और उसकी तौबा क़बूल करता है।
- عَلِیمٌ: सब कुछ जानने वाला।
- حَكِیمٌ: हर काम में हिकमत (गहरी समझ और योजना) रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने मोमिन बंदों से फ़रमाता है कि जब वे उसके दुश्मनों से जिहाद करेंगे, तो अल्लाह उन्हें अपने हाथों से अज़ाब देगा, उन्हें ज़िल्लत और शिकस्त से रुसवा करेगा, और मोमिनीन को उन पर फ़तह (विजय) अता करेगा। इस फ़तह और कामयाबी के ज़रिए अल्लाह उन मोमिनों के सीनों की तकलीफ़ और क़ल्बों के ग़ैज़ (क्रोध) को दूर कर देगा, जो लंबे अरसे से कुफ्फ़ार के ज़ुल्म और साज़िशों की वजह से उनके दिलों में जमा होता रहा था। यह अल्लाह की रहमत है कि वह अपने बंदों के दिलों से यह ग़म और ग़ुस्सा निकाल देता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि इन हठधर्म दुश्मनों में से जो भी तौबा कर ले, अल्लाह उसकी तौबा क़बूल कर लेता है। जैसा कि मक्का की फ़तह के दिन कुछ लोगों (जैसे अबू सुफ़ियान) ने इस्लाम क़बूल किया और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया। अल्लाह तआला अपनी हिकमत से जिसे चाहता है, हिदायत देता है और तौबा की तौफीक़ अता करता है। वह (अल्लाह) अपने बंदों के दिलों के हाल को खूब जानता है कि कौन सच्चे दिल से तौबा कर रहा है और कौन झूठा दिखावा कर रहा है। वह हकीम है, यानी उसका हर फ़ैसला, हर क़ानून और हर कार्य गहरी हिकमत पर आधारित है; वह कोई काम बे-मक़सद या बे-हिकमत नहीं करता।
फ़ायदे (उपदेश और सबक):
- जिहाद और सब्र का इनाम: यह आयत मोमिनीन को बताती है कि दुश्मनों के मुक़ाबले में सब्र और जिहाद का नतीजा अल्लाह की तरफ से नसरत (मदद) और दिलों की तसल्ली है। अल्लाह अपने बंदों के दिलों से ग़म और ग़ुस्सा दूर करता है।
- अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है: चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार या दुश्मन क्यों न हो, जब तक वह सच्चे दिल से तौबा करे, अल्लाह उसे माफ़ करने के लिए तैयार है। यह अल्लाह की असीम रहमत की निशानी है।
- हिकमत और इल्म: अल्लाह हर चीज़ का इल्म रखता है और हर काम हिकमत से करता है। इससे बंदे को यक़ीन होता है कि अल्लाह के हर फ़ैसले में भलाई है, चाहे वह हमारी समझ में न आए।
- दिल की सफ़ाई: अल्लाह चाहता है कि उसके बंदों के दिल किसी क्रोध, जलन या बैर से पाक हों। यह आयत दिलों को साफ़ रखने और अल्लाह पर भरोसा करने की तरग़ीब देती है।
- इस्लाम की ताक़त: यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि अल्लाह की मदद से वे अपने दुश्मनों पर ग़ालिब आएंगे और उनकी साज़िशें नाकाम होंगी।
📜 आयत 13-17 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 15
सूरा अत-तौबा आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन मोनिनीन के दिल की क़ुदरतें जो (कुफ्फ़ार से…सूरा आयत 15/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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