ittakhazooo ahbaarahum wa ruhbaanahum arbaabammin doonil laahi wal Maseehab na Maryama wa maaa umirooo illaa liya`budooo Ilaahanw Waa hidan laaa ilaaha illaa Hoo; Subhaanahoo `ammaa yushrikoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों ने तो अपने ख़ुदा को छोड़कर अपनी आलिमों को और अपने ज़ाहिदों को और मरियम के बेटे मसीह को अपना परवरदिगार बना डाला हालॉकि उन्होनें सिवाए इसके और हुक्म ही नहीं दिया गया कि ख़ुदाए यक़ता (सिर्फ़ ख़ुदा) की इबादत करें उसके सिवा (और कोई क़ाबिले परसतिश नहीं)
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
انہوں نے اپنے علماء اور مشائخ اور مسیح ابن مریم کو الله کے سوا خدا بنا لیا حالانکہ اُن کو یہ حکم دیا گیا تھا کہ خدائے واحد کے سوا کسی کی عبادت نہ کریں۔ اس کے سوا کوئی معبود نہیں۔ اور وہ ان لوگوں کے شریک مقرر کرنے سے پاک ہے
रुहबान (رُهْبَان): ईसाई धर्म के संन्यासी और इबादत करने वाले।
अरबाब (أَرْبَاب): 'रब' का बहुवचन, यानी स्वामी और पालनहार।
मिन दूनिल्लाह (مِن دُونِ اللَّهِ): अल्लाह के अलावा।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत यहूद और ईसाइयों की उस गलतफहमी और गुमराही को उजागर करती है जिसमें उन्होंने अपने धर्मगुरुओं और संन्यासियों को अल्लाह का दर्जा दे दिया था। यहूदियों ने अपने विद्वानों (अहबार) को और ईसाइयों ने अपने संन्यासियों (रुहबान) को इस हद तक मान लिया कि वे जो कुछ भी हलाल या हराम कहते, उसे वे बिना किसी सवाल के मान लेते—चाहे वह अल्लाह के हुक्म के खिलाफ ही क्यों न हो। इस तरह उन्होंने अपने धर्मगुरुओं को अल्लाह के सिवा अपना रब बना लिया। इसी तरह ईसाइयों ने मरियम के बेटे ईसा (अलैहिस्सलाम) को भी अल्लाह का बेटा और पूजा के योग्य मान लिया, जबकि ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के नबी और रसूल थे।
अल्लाह तआला फरमाता है कि इन सबको केवल एक ही आदेश दिया गया था—कि वे सिर्फ एक अकेले ईश्वर की इबादत करें, जो सच्चा माबूद है। उसके अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं। अल्लाह पाक है और उन सब चीजों से पाक है जो ये लोग उसके साथ शरीक ठहराते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम का मूल संदेश तौहीद (एकेश्वरवाद) है। अल्लाह ने हर युग में हर नबी को यही सिखाया कि इबादत सिर्फ अल्लाह की हो। किसी इंसान को—चाहे वह कितना ही बड़ा विद्वान, संत या पैगंबर ही क्यों न हो—अल्लाह का दर्जा देना या उसकी पूजा करना सबसे बड़ा पाप है। आज भी हमें चौकन्ना रहना चाहिए कि कहीं हम भी किसी इंसान, रिवायत, या ताकत को अल्लाह का हुक्म न मान बैठें। असली कामयाबी उसी में है कि हम अपनी जिंदगी को अल्लाह की बताई हुई राह पर चलाएं और उसी की इबादत करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आखिरत की सफलता तक पहुंचाता है।
उन लोगों ने तो अपने ख़ुदा को छोड़कर अपनी आलिमों को और अपने ज़ाहिदों को और मरियम के बेटे मसीह को अपना परवरदिगार बना डाला हालॉकि उन्होनें सिवाए इसके और हुक्म ही नहीं दिया गया कि ख़ुदाए यक़ता (सिर्फ़ ख़ुदा) की इबादत करें उसके सिवा (और कोई क़ाबिले परसतिश नहीं)
अहले किताब में से जो लोग न तो (दिल से) ख़ुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोज़े आख़िरत पर और न ख़ुदा और उसके रसूल की हराम की हुई चीज़ों को हराम समझते हैं और न सच्चे दीन ही को एख्तियार करते हैं उन लोगों से लड़े जाओ यहाँ तक कि वह लोग ज़लील होकर (अपने) हाथ से जज़िया दे
यहूद तो कहते हैं कि अज़ीज़ ख़ुदा के बेटे हैं और ईसाई कहते हैं कि मसीहा (ईसा) ख़ुदा के बेटे हैं ये तो उनकी बात है और (वह ख़ुद) उन्हीं के मुँह से ये लोग भी उन्हीं काफ़िरों की सी बातें बनाने लगे जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं ख़ुदा उनको क़त्ल (तहस नहस) करके (देखो तो) कहाँ से कहाँ भटके जा रहे हैं
उन लोगों ने तो अपने ख़ुदा को छोड़कर अपनी आलिमों को और अपने ज़ाहिदों को और मरियम के बेटे मसीह को अपना परवरदिगार बना डाला हालॉकि उन्होनें सिवाए इसके और हुक्म ही नहीं दिया गया कि ख़ुदाए यक़ता (सिर्फ़ ख़ुदा) की इबादत करें उसके सिवा (और कोई क़ाबिले परसतिश नहीं)
जिस चीज़ को ये लोग उसका शरीक़ बनाते हैं वह उससे पाक व पाक़ीजा है ये लोग चाहते हैं कि अपने मुँह से (फ़ूंक मारकर) ख़ुदा के नूर को बुझा दें और ख़ुदा इसके सिवा कुछ मानता ही नहीं कि अपने नूर को पूरा ही करके रहे
अगरचे कुफ्फ़ार बुरा माना करें वही तो (वह ख़ुदा) है कि जिसने अपने रसूल (मोहम्मद) को हिदायत और सच्चे दीन के साथ ( मबऊस करके) भेजता कि उसको तमाम दीनो पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा माना करे
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