Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُطْفِئُوا: बुझा दें, समाप्त कर दें।
- نُورَ اللَّهِ: अल्लाह का नूर (प्रकाश), जिसका अर्थ है इस्लाम, क़ुरआन और वे स्पष्ट प्रमाण जो अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ के माध्यम से भेजे हैं।
- بِأَفْوَاهِهِمْ: अपने मुँह से, अर्थात अपने झूठे दावों और बातों के द्वारा।
- يَأْبَى اللَّهُ: अल्लाह इनकार करता है, अर्थात अल्लाह की इच्छा इसके विपरीत है।
- يُتِمَّ نُورَهُ: अपने नूर को पूरा करे, अर्थात इस्लाम को पूर्ण और विजयी बनाए।
- وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ: चाहे काफ़िर (इनकार करने वाले) इसे कितना ही नापसंद करें।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन काफ़िरों के हालात का वर्णन करती है जो अल्लाह के दीन (इस्लाम) को मिटाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे। वे अपने मुँह से झूठे आरोप लगाते थे, रसूल ﷺ को जादूगर और शायर कहते थे, और क़ुरआन के बारे में मनगढ़ंत बातें कहते थे। उनका उद्देश्य यह था कि वे इन बातों से इस्लाम के प्रकाश को बुझा दें और लोगों को सत्य के मार्ग से भटका दें। लेकिन अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से यह तय कर रखा था कि वह अपने दीन को पूरा करके रहेगा, उसे स्पष्ट रूप से प्रकट करेगा और उसे सभी दीनों पर ग़ालिब बनाएगा। अल्लाह की इच्छा के आगे काफ़िरों की सारी कोशिशें नाकाम रहेंगी, चाहे वे इससे कितना ही नफ़रत करें। यह अल्लाह का वादा है कि सत्य की जीत अवश्य होगी, और असत्य की हार तय है। काफ़िरों के मुँह से निकले हुए शब्द उस नूर को नहीं बुझा सकते, क्योंकि अल्लाह का नूर उसकी अपनी रोशनी से पूर्ण होता है, न कि किसी इंसान की बातों से।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह पर भरोसा: इस आयत से मुसलमानों को यह सीख मिलती है कि अल्लाह का दीन किसी इंसान की बातों या साज़िशों से कमज़ोर नहीं पड़ता। अल्लाह अपने दीन की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है, इसलिए मोमिन को पूरा भरोसा रखना चाहिए।
- सत्य की विजय अवश्यंभावी: यह आयत मुसलमानों को यक़ीन दिलाती है कि चाहे दुनिया में कितनी भी मुश्किलें आएँ, सत्य की जीत तय है। यह विश्वास मुसलमान को हर हाल में सब्र और स्थिरता प्रदान करता है।
- काफ़िरों की कोशिशों की नाकामी: यह आयत बताती है कि अल्लाह के दीन के ख़िलाफ़ चलने वाली सारी साज़िशें बेकार हैं। यह मुसलमानों के लिए तसल्ली का सबब है कि उन्हें दुश्मनों के नुक़्सान से डरने की ज़रूरत नहीं।
- अल्लाह की इच्छा का बोलबाला: जब अल्लाह किसी चीज़ का इरादा कर लेता है, तो उसे कोई रोक नहीं सकता। यह बात मोमिन के दिल में अल्लाह की अज़मत और उसकी क़ुदरत का एहसास पैदा करती है।
- इस्लाम की हिफ़ाज़त: यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि उन्हें अपने दीन की हिफ़ाज़त के लिए कोशिश करनी चाहिए, लेकिन अंतिम भरोसा अल्लाह पर ही रखना चाहिए, क्योंकि असली हिफ़ाज़त करने वाला अल्लाह ही है।
📜 आयत 30-34 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 32
सूरा अत-तौबा आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस चीज़ को ये लोग उसका शरीक़ बनाते हैं वह…सूरा आयत 32/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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