अत-तौबा · 49/129
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तौबा
وَمِنْهُم مَّن يَقُولُ ائْذَن لِّي وَلَا تَفْتِنِّي ۚ أَلَا فِي الْفِتْنَةِ سَقَطُوا ۗ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ ۝٤٩
Wa minhum mai yaqoolu` zal lee wa laa taftinneee; alaa fil fitnati saqatoo; wa inna Jahannama lamuheetatum bil kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों में से बाज़ ऐसे भी हैं जो साफ कहते हैं कि मुझे तो (पीछे रह जाने की) इजाज़त दीजिए और मुझ बला में न फॅसाइए (ऐ रसूल) आगाह हो कि ये लोग खुद बला में (औंधे मुँह) गिर पड़े और जहन्नुम तो काफिरों का यक़ीनन घेरे हुए ही हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • "ائْذَن لِّي": मुझे (जिहाद से) रुकने की अनुमति दे।
  • "وَلَا تَفْتِنِّي": मुझे परीक्षा/फितने में मत डाल (अर्थात मुझ पर ऐसा आरोप मत लगा जो मुझे गुनाह में डाल दे)।
  • "سَقَطُوا": वे गिर पड़े (अर्थात उसमें जा पड़े)।
  • "لَمُحِيطَةٌ": (उन्हें) चारों ओर से घेरने वाली है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) में से कुछ लोग हैं जो नबी (ﷺ) से कहते हैं: "हमें जिहाद से रुकने की अनुमति दे दीजिए और हमें उस परीक्षा में मत डालिए जो आपके साथ चलने पर हम पर आ सकती है।" उनका बहाना यह था कि जब हम रूम (बाइज़ैन्टाइन) की स्त्रियों को देखेंगे तो हम पर उनका फितना (मोह) हावी हो जाएगा और हम गुनाह में पड़ जाएँगे। अल्लाह ने उनके इस झूठे बहाने का खंडन करते हुए फ़रमाया: "सुन लो! ये लोग उस बड़ी फितने में गिर चुके हैं जो उनके दावे से कहीं बड़ी है — और वह है निफ़ाक़ (मुनाफ़िक़ी) का फितना और अल्लाह के हुक्म की अवज्ञा करके जिहाद से पीछे हटना। यानी उन्होंने जिस फितने से बचने की बात कही, वह तो सिर्फ़ एक वहम था, लेकिन वास्तव में वे निफ़ाक़ और अल्लाह की नाफ़रमानी के फितने में जा पड़े हैं।" फिर अल्लाह ने उन्हें डराते हुए फ़रमाया: "निश्चय ही जहन्नम (नरक) की आग काफ़िरों को चारों ओर से घेरने वाली है — वे उससे बच निकलने का कोई रास्ता नहीं पाएँगे, और वह उन्हें हर तरफ से घेर लेगी।"

फ़ायदे (सीख):

  1. मुनाफ़िक़ी और धोखेबाज़ी की हक़ीक़त यह है कि लोग छोटे-मोटे बहानों से बड़ी ज़िम्मेदारियों से भागते हैं, लेकिन इससे वे अल्लाह की नज़र में बड़े गुनाह में पड़ जाते हैं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के हुक्मों का पालन करे और बहाने न बनाए।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में क़ुर्बानी और जिहाद (संघर्ष) से पीछे हटना किसी भी मुसलमान के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि यह निफ़ाक़ की निशानी है।
  3. अल्लाह का डर और उसके अज़ाब का ख़्याल इंसान को गुनाहों से बचाता है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि काफ़िरों और नाफ़रमानों के लिए जहन्नम का अज़ाब तैयार है, जो उन्हें घेर लेगा।
  4. मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दिल को निफ़ाक़ से पाक रखे और अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) के हुक्मों को पूरे दिल से माने, क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है।


📜 आयत 47-51 — सूरा अत-तौबा

47لَوْ خَرَجُوا فِيكُم مَّا زَادُوكُمْ إِلَّا خَبَالًا وَلَأَوْضَعُوا خِلَالَكُمْ يَبْغُونَكُمُ الْفِتْنَةَ وَفِيكُمْ سَمَّاعُونَ لَهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ
अगर ये लोग तुममें (मिलकर) निकलते भी तो बस तुममे फ़साद ही बरपा कर देते और तुम्हारे हक़ में फ़ितना कराने की ग़रज़ से तुम्हारे दरमियान (इधर उधर) घोड़े दौड़ाते फिरते और तुममें से उनके जासूस भी हैं (जो तुम्हारी उनसे बातें बयान करते हैं) और ख़ुदा शरीरों से ख़ूब वाक़िफ़ है
48لَقَدِ ابْتَغَوُا الْفِتْنَةَ مِن قَبْلُ وَقَلَّبُوا لَكَ الْأُمُورَ حَتَّىٰ جَاءَ الْحَقُّ وَظَهَرَ أَمْرُ اللَّهِ وَهُمْ كَارِهُونَ
(ए रसूल) इसमें तो शक़ नहीं कि उन लोगों ने पहले ही फ़साद डालना चाहा था और तुम्हारी बहुत सी बातें उलट पुलट के यहॉ तक कि हक़ आ पहुंचा और ख़ुदा ही का हुक्म ग़ालिब रहा और उनको नागवार ही रहा
49وَمِنْهُم مَّن يَقُولُ ائْذَن لِّي وَلَا تَفْتِنِّي ۚ أَلَا فِي الْفِتْنَةِ سَقَطُوا ۗ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةٌ بِالْكَافِرِينَ
उन लोगों में से बाज़ ऐसे भी हैं जो साफ कहते हैं कि मुझे तो (पीछे रह जाने की) इजाज़त दीजिए और मुझ बला में न फॅसाइए (ऐ रसूल) आगाह हो कि ये लोग खुद बला में (औंधे मुँह) गिर पड़े और जहन्नुम तो काफिरों का यक़ीनन घेरे हुए ही हैं
50إِن تُصِبْكَ حَسَنَةٌ تَسُؤْهُمْ ۖ وَإِن تُصِبْكَ مُصِيبَةٌ يَقُولُوا قَدْ أَخَذْنَا أَمْرَنَا مِن قَبْلُ وَيَتَوَلَّوا وَّهُمْ فَرِحُونَ
तुमको कोई फायदा पहुंचा तो उन को बुरा मालूम होता है और अगर तुम पर कोई मुसीबत आ पड़ती तो ये लोग कहते हैं कि (इस वजह से) हमने अपना काम पहले ही ठीक कर लिया था और (ये कह कर) ख़ुश (तुम्हारे पास से उठकर) वापस लौटतें है
51قُل لَّن يُصِيبَنَا إِلَّا مَا كَتَبَ اللَّهُ لَنَا هُوَ مَوْلَانَا ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हम पर हरगिज़ कोई मुसीबत पड़ नही सकती मगर जो ख़ुदा ने तुम्हारे लिए (हमारी तक़दीर में) लिख दिया है वही हमारा मालिक है और ईमानदारों को चाहिए भी कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अत-तौबा 49

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Monday, September 28, 2026

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