Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْخَوَالِفِ (अल-ख़वालिफ़): यह "خَالِفَة" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है पीछे रह जाने वाली औरतें, बच्चे, और वे लोग जिनके पास जिहाद से माफ़ी का कोई उज़्र (कारण) हो।
- طُبِعَ (तुबि'अ): मुहर लगा दी गई, सील कर दी गई।
- يَفْقَهُونَ (यफ़्क़हून): समझते हैं, अक़्ल और समझ से काम लेते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
इन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) ने अपने लिए यह अपमान और ज़िल्लत पसंद की कि वे जिहाद और अल्लाह के रास्ते में रसूलुल्लाह ﷺ के साथ निकलने के बजाय उन औरतों, बच्चों और माफ़ी पाने वाले लोगों के साथ घरों में बैठे रहें। उन्होंने इसी को अपनी ख़ुशी और संतुष्टि का ज़रिया बना लिया। अल्लाह तआला ने उनके कुफ़्र और निफ़ाक़ की वजह से उनके दिलों पर मुहर लगा दी, यानी उनके दिल बंद कर दिए गए, जिससे हक़ और सच्चाई उनमें दाख़िल नहीं हो सकती। नतीजा यह हुआ कि वे यह नहीं समझ पाते कि उनकी भलाई और कामयाबी किस चीज़ में है — वह जिहाद और रसूल ﷺ की मोहब्बत व इताअत में है, न कि पीछे रह जाने और आराम-तलबी में। वे अपनी आख़िरत को बर्बाद करके दुनिया की फ़ानी राहत पर ख़ुश हैं, और यही उनकी सबसे बड़ी नादानी है।
फ़ायदे (उपदेश):
- इज़्ज़त और कामयाबी अल्लाह की इताअत में है: जो बंदा अल्लाह और उसके रसूल की बात मानता है और उसके दीन की ख़िदमत करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। जिहाद और नेक कामों से पीछे हटना ज़िल्लत का ज़रिया है।
- दिल की मुहर — गुनाहों का अंजाम: जब इंसान लगातार गुनाह और निफ़ाक़ पर अड़ा रहता है, तो अल्लाह उसके दिल पर मुहर लगा देता है, जिससे वह हिदायत और नेकी को समझ ही नहीं पाता। यह सबसे बड़ी सज़ा है।
- आराम-तलबी और ज़िम्मेदारी से भागना मुनाफ़िक़ों की आदत है: सच्चा मुसलमान वह है जो दीन की ख़ातिर कुर्बानी देने को तैयार रहे, चाहे उसमें मेहनत और मुश्किल ही क्यों न हो। आराम पसंदी और ज़िम्मेदारियों से बचना ईमान की कमज़ोरी की निशानी है।
- समझदारी का असली मापदंड: असली अक़्लमंद वह नहीं जो सिर्फ़ दुनिया की भागदौड़ समझे, बल्कि वह है जो आख़िरत की तैयारी को समझे और उस पर अमल करे। जो लोग आख़िरत को भूलकर दुनिया पर ख़ुश हो जाते हैं, वे सबसे बड़े नासमझ हैं।
- अल्लाह की रहमत से निराश न हों: यह आयत हमें सिखाती है कि जब तक दिल खुला है और हम सच्चाई को समझ सकते हैं, हमें तौबा कर लेनी चाहिए। किसी को भी अपने गुनाहों पर अड़े रहने की जुर्रत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दिल की मुहर लगने के बाद हिदायत का रास्ता बंद हो जाता है।
📜 आयत 85-89 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 87
सूरा अत-तौबा आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये इस बात से ख़ुश हैं कि पीछे रह जाने…सूरा आयत 87/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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