Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْخَيْرَاتُ: भलाइयाँ, लाभ और कल्याण के सभी रूप — दुनिया में विजय, ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाला धन) और आख़िरत में जन्नत की नेअमतें।
- الْمُفْلِحُونَ: कामयाब लोग, वे जो अपनी मंज़िल तक पहुँच गए और हर उस चीज़ से बच गए जो उन्हें नुक़सान पहुँचा सकती थी।
तफ़सीर:
ये आयत उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के जवाब में है जो जिहाद से पीछे रह गए थे और बहाने बनाते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर ये लोग पीछे रह गए, तो कोई बात नहीं, क्योंकि अल्लाह के रसूल ﷺ और उनके साथ के सच्चे ईमान वाले — जिनका ईमान पक्का था — उन्होंने अपने माल और अपनी जान से अल्लाह की राह में जिहाद किया। उन्होंने अपनी दौलत ख़र्च की, अपनी जानें खतरे में डालीं, और दुश्मन के मुक़ाबले में डटे रहे। यही लोग हैं जिनके लिए हर तरह की भलाइयाँ हैं — दुनिया में उन्हें फ़तह, ग़नीमत और इज़्ज़त मिलती है, और आख़िरत में उनके लिए जन्नत, अल्लाह की रज़ा और हर तरह की कामयाबी है। यही लोग सच्चे कामयाब हैं, क्योंकि उन्होंने वह सब कुछ हासिल कर लिया जो वे चाहते थे (अल्लाह की रज़ा और जन्नत) और उस चीज़ से बच गए जिससे उन्हें डर था (अल्लाह का अज़ाब)। उनकी कामयाबी का राज़ यह था कि उन्होंने सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान नहीं कहा, बल्कि अपने अमल से उसे साबित किया — अपने माल और अपनी जान से अल्लाह की राह में कुर्बानी दी।
फ़ायदे (सबक़):
- सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि अमल से साबित होता है — जब ज़रूरत पड़े तो माल और जान दोनों कुर्बान करने का जज़्बा हो।
- अल्लाह की राह में कुर्बानी देने वालों को दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई मिलती है — दुनिया में इज़्ज़त और मदद, आख़िरत में जन्नत।
- पीछे रह जाने वालों की वजह से दीन का काम नहीं रुकता — अल्लाह हमेशा अपने सच्चे बंदों को आगे बढ़ाता है।
- असली कामयाबी वही है जो अल्लाह की राह में जिहाद (कोशिश) करने वालों को मिलती है — यही वो लोग हैं जो हर खतरे से बचकर अपनी मंज़िल तक पहुँचते हैं।
- ये आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत और जंग के वक़्त सबसे पहले आगे बढ़ना चाहिए, पीछे हटना नहीं — क्योंकि अल्लाह उन्हीं से मुहब्बत करता है जो उसकी राह में आगे बढ़ते हैं।
📜 आयत 86-90 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 88
सूरा अत-तौबा आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर रसूल और जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं…सूरा आयत 88/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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