अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَالشَّمْسِ: सूर्य की क़सम
- وَضُحَاهَا: उसके उजाले की, यानी जब सूर्य निकलकर पूरी रोशनी फैलाए
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में सूर्य की क़सम खाई है और उसके उजाले की क़सम खाई है, यानी उस वक़्त की क़सम जब सूर्य अपनी पूरी चमक के साथ उगता है और पूरी दुनिया में रोशनी फैला देता है। यह क़सम अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत और उसकी बेमिसाल रचना की तरफ इशारा करती है। सूर्य अल्लाह की सबसे बड़ी निशानियों में से एक है, जो हर सुबह उगता है और पूरी दुनिया को रोशनी देता है, जिससे ज़िंदगी का हर काम आसान हो जाता है। यह क़सम इसलिए खाई गई ताकि इंसान अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करे और समझे कि जिस अल्लाह ने सूर्य को इतनी रोशनी और ताकत दी है, वही अल्लाह इंसान की भलाई और बुराई को भी जानता है, और उसी ने इंसान को सही रास्ता दिखाने के लिए यह क़ुरआन उतारा है। जिस तरह सूर्य की रोशनी अंधेरे को दूर करती है, उसी तरह क़ुरआन की रोशनी इंसान के दिल के अंधेरे को दूर करती है और उसे सच्चाई की राह दिखाती है। यह क़सम हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर निशानी पर ग़ौर करना चाहिए, क्योंकि हर निशानी में अल्लाह की महानता और उसकी रहमत की झलक मौजूद है। जो इंसान इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अल्लाह के और करीब हो जाता है। यह आयत हमें यह भी बताती है कि जिस तरह सूर्य की रोशनी से दुनिया रोशन होती है, उसी तरह ईमान और अच्छे आमाल की रोशनी से इंसान का दिल रोशन होता है, और यही रोशनी उसे जन्नत की राह दिखाती है। अल्लाह तआला ने इस क़सम के बाद आगे की आयात में इंसान की कामयाबी और नाकामी का फैसला बताया है, ताकि हम समझें कि जिस अल्लाह ने सूर्य को इतनी अज़ीम निशानी बनाया है, उसका हुक्म मानना और उसकी राह पर चलना ही हमारी असली कामयाबी है।
📜 आयत 1-3 — अश-शम्स
अनुवाद — अश-शम्स 1
सूरा अश-शम्स आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सूरज की क़सम और उसकी रौशनी कीसूरा आयत 1/15 — अश-शम्स الشمس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शम्स सुनें, अश-शम्स अनुवाद, अश-शम्स mp3, अश-शम्स pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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