अल-क़द्र · 5/5
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़द्र
سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ ۝٥
Salaamun hiya hattaa mat la`il fajr
📖 हिंदी अर्थ
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَلَامٌ — शांति, सलामती, खैरियत
  • هِيَ — वह (यानी यह रात)
  • حَتَّىٰ — तक, जब तक
  • مَطْلَعِ الْفَجْرِ — सुबह के उजाले के निकलने का समय, फज्र का तुलू होना

तफसीर:

यह आयत मुबारक लैलतुल क़द्र की उस रात का जिक्र कर रही है जो पूरी की पूरी रहमत और बरकत से भरी हुई है। अल्लाह तआला फरमाता है कि यह रात सरासर सलामती और खैरियत वाली है — यानी इस रात में कोई शर, कोई बुराई, कोई तकलीफ नहीं होती। यह रात अपने आग़ाज़ से लेकर अपने आखिर तक — यानी सूरज डूबने से लेकर सुबह के उजाले के निकलने तक — पूरी तरह अमन, सुकून और रहमत से भरी हुई है।

इस रात में अल्लाह के नेक बंदों पर खास रहमतें नाज़िल होती हैं। फरिश्ते जमीन पर उतरते हैं और मोमिनीन के लिए दुआएं करते हैं। यह रात उन लोगों के लिए सलामती और बचाव का जरिया बनती है जो अल्लाह की इबादत में गुजारते हैं। हदीस में आया है कि इस रात में शैतान बंधे रहते हैं और हर तरफ नूर और रोशनी फैली होती है।

यह "सलाम" सिर्फ जिस्मानी सलामती नहीं है, बल्कि रूहानी सलामती भी है — यानी इस रात में अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ करता है, उनके दिलों को साफ करता है और उन्हें जहन्नुम की आग से आज़ादी देता है। जो शख्स इस रात को ईमान और सवाब की नीयत से इबादत में बिताता है, उसके लिए यह रात पूरी जिंदगी की सलाहियत बन जाती है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह ने अपने बंदों पर कितना बड़ा एहसान किया है कि उन्हें एक ऐसी रात अता की जो हजार महीनों से बेहतर है। हमें चाहिए कि इस रात को गुनाहों से बचकर, इबादत, तिलावत, जिक्र और दुआ में गुजारें, ताकि हम भी उस सलामती और रहमत का हिस्सा बन सकें जिसका वादा अल्लाह ने किया है। यह रात हमारे लिए माफी और नजात का जरिया है — आओ हम इसे हाथ से न जाने दें और इसकी बरकतों से भरपूर फायदा उठाएं।



📜 आयत 3-5 — सूरा अल-क़द्र

3لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है
4تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं
5سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है
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5आयत

अनुवाद — अल-क़द्र 5

सूरा अल-क़द्र आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है

सूरा आयत 5/5 — सूरा अल-क़द्र القدر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़द्र सुनें, सूरा अल-क़द्र अनुवाद, सूरा अल-क़द्र mp3, सूरा अल-क़द्र pdf. आयत 3–5. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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